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पीयू का नया खुलासा, सारंगपुर की जमीन केवल प्रशासन के मास्टर प्लान में, अभी मिली नहीं

Mon, 30 Nov 2020 09:11 PM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Mon, 30 Nov 2020 09:11 PM IST
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New disclosure of PU, land of Sarangpur only in master plan of administration, not get land yet
चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय के पश्चिम कैंपस का इंतजार कर रहे विद्यार्थियों और शिक्षकों को झटका लगा है। सारंगपुर में जो जमीन इसके लिए देखी गई थी, वह केवल प्रशासन के मास्टर प्लान तक ही सीमित है। पीयू को अभी नहीं मिली है। यह खुलासा खुद पीयू ने किया है। इस जमीन के लिए पीयू को रकम चुकानी थी, लेकिन अब तक नहीं दे पाई। पीयू के शिक्षकों व छात्रों को छात्रावास, आवास व रिसर्च ब्लॉक के लिए अभी लंबा इंतजार करना होगा। हालांकि पांच साल में इस दिशा में कोई काम नहीं होने के कारण सभी हैरत में हैं। जानकारों का कहना है कि अफसरों को कार्य के लिए तैनात किया जाता है लेकिन फाइलें पांच-पांच साल से फंसी हों, ऐसे में उनसे अन्य क्या उम्मीदें की जा सकती हैं।
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इस बारे में रेनुका बी सलवान, डीपीआर पीयू ने कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन के मास्टर प्लान में ही जमीन है। अभी पीयू को हैंडओवर नहीं हुई है। जैसे ही प्रशासन से कोई आदेश मिलेंगे, उसके बाद अन्य कार्य किए जाएंगे।
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इस बारे में प्रो. अरुण ग्रोवर, पूर्व वीसी पीयू ने कहा कि मास्टर प्लान के अनुसार सारंगपुर में जो जमीन थी, उसमें से 50 एकड़ पीजीआई को दे दी गई। पीयू के पास पैसे नहीं थे इसलिए नहीं मिल पाई। दो बार इसके लिए प्रोजेक्ट भी जमा किया गया था, लेकिन कुछ बात नहीं बनी।
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इस तरह बनी थी योजना
2013 में चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से मास्टर प्लान 2030 तैयार किया जा रहा था। इस प्लान में पीयू ने 140 एकड़ जमीन मांगी और वह प्लान के मुताबिक दे दी गई। इस जमीन को चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से उसी समय पीयू को हैंडओवर (सौंपा जाना) करना चाहिए था, लेकिन पैसे के अभाव में ऐसा नहीं किया गया जबकि शिक्षण संस्थान के लिए जमीन मुफ्त में मिलनी थी। पीयू के पास वैसे ही पैसे की किल्लत थी। दो साल बाद पीजीआई को भी अपने नए कैंपस के लिए जगह चाहिए थी और 2015 में पीयू की 135 एकड़ भूमि में से 50 एकड़ काटकर पीजीआई को दे दी गई। बताते हैं कि पीजीआई को केंद्र से इस जमीन के लिए रकम मिली थी जो चुका दी गई। अब पीयू के खाते में 85 एकड़ जमीन रही।
पीयू ने दिया दो बार प्रोजेक्ट, नहीं किया काम
उसी दौरान पीयू से एक प्रोजेक्ट मांगा गया कि वह 85 एकड़ भूमि पर क्या करेंगे। पीयू ने विस्तृत प्लान दिया। चार नए हॉस्टल खोलने के अलावा 500 शिक्षक आवास व रिसर्च ब्लॉक शुरू करने की योजना दी। बसें भी सभी कैंपस को जोड़ने के लिए चलाने की बात कही। यह प्लान दो बार प्रशासन को दिया गया, लेकिन इस पर मुहर नहीं लग पाई पर पीयू के शिक्षकों व छात्रों को बताया गया कि उन्हें जल्द ही पश्चिम कैंपस मिलेगा। अब पीयू ने साफ कर दिया कि चंडीगढ़ प्रशासन मास्टर प्लान तक ही जमीन है, उन्हें मिली नहीं है।

धरे रह गए ख्वाब
पीयू में हर साल रिसर्च के लिए 500 से अधिक विद्यार्थी दाखिल होते हैं। इतने ही शोधार्थी पहले से कार्य कर रहे होते हैं। इनके अलावा विदेशी विद्यार्थी भी आते हैं। पीयू की योजना थी कि रिसर्च ब्लॉक तैयार होगा तो विदेशी शोधार्थियों को यह आकर्षित करेगा। वे केवल अपने सूटकेस के साथ आएंगे और शोध करके अपने देश चले जाएंगे। हर सुविधा उनको रिसर्च ब्लॉक में मिलनी थी। इससे पीयू की आय कई गुना बढ़ती और शोध पेपर देश-दुनिया में छा जाते। इससे रैंकिंग भी बढ़ती लेकिन यह सभी योजना धरी रह गईं।
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