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हरियाणा में रिश्वत मांगने के 200 बहाने: 42 विभागों में सेवाओं के लिए मांगे जाते हैं पैसे, पुलिस सबसे आगे
Tue, 26 Sep 2023 01:17 PM IST
निवेदिता वर्मा
सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 26 Sep 2023 01:17 PM IST
सार
2021 और 2022 में भ्रष्टाचार की सबसे अधिक शिकायतें पुलिस के खिलाफ ही आई हैं। पुलिस के खिलाफ 1445, पंचायती राज संस्थाओं की 755, शहरी स्थानीय निकाय 676, शिक्षा विभाग 488, बिजली 450, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग 424, राजस्व 390, स्वास्थ्य 239 और हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के खिलाफ 190 शिकायतें आई हैं।
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हरियाणा के सरकारी विभागों में रिश्वत मांगने के 200 से अधिक बहाने हैं। प्रदेश के कुल 97 विभागों, निगमों और बोर्डों में अलग-अलग सेवाओं के लिए दो से चार बहाने हैं। इन्हीं बहानों के बदले विभागों में फाइलें अटकाई जाती हैं और बाद में रिश्वत लेकर उसी काम को किया जाता है। इसकी तस्दीक पिछले दो साल में 42 विभागों में रिश्वत लेने के सामने आए 310 से मामले करते हैं।
इन आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में सबसे भ्रष्ट विभाग पुलिस है। दूसरे नंबर पर राजस्व और तीसरे नंबर पर बिजली विभाग है। उधर, पुलिस विभाग की बिगड़ती छवि को देखते हुए डीजीपी शत्रुजीत कपूर ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रवैया अख्तियार किया है।
यह भी पढ़ें: एक और खुलासा: जिस रवि शर्मा के नाम पर पासपोर्ट बनवाकर कनाडा भागा था हरदीप निज्जर, उसकी भी हुई थी हत्या
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हरियाणा सरकार प्रदेश में भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है। पिछले दो साल में औसतन हर दूसरे दिन प्रदेश में एक भ्रष्ट कर्मचारी या अधिकारी को गिरफ्तार किया गया है। आंकड़े बताते हैं कि पुलिस विभाग के 70, राजस्व विभाग के 42 और बिजली विभाग के 29 कर्मचारियों-अधिकारियों को रिश्वत लेने के मामलों में गिरफ्तार किया गया है। प्रदेश में कुल 44 सरकारी विभाग हैं। शेष निगम, बोर्ड और सोसायटी हैं।
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इन आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में सबसे भ्रष्ट विभाग पुलिस है। दूसरे नंबर पर राजस्व और तीसरे नंबर पर बिजली विभाग है। उधर, पुलिस विभाग की बिगड़ती छवि को देखते हुए डीजीपी शत्रुजीत कपूर ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रवैया अख्तियार किया है।
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हरियाणा सरकार प्रदेश में भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है। पिछले दो साल में औसतन हर दूसरे दिन प्रदेश में एक भ्रष्ट कर्मचारी या अधिकारी को गिरफ्तार किया गया है। आंकड़े बताते हैं कि पुलिस विभाग के 70, राजस्व विभाग के 42 और बिजली विभाग के 29 कर्मचारियों-अधिकारियों को रिश्वत लेने के मामलों में गिरफ्तार किया गया है। प्रदेश में कुल 44 सरकारी विभाग हैं। शेष निगम, बोर्ड और सोसायटी हैं।
इन कामों के लिए मांगे जाती है रिश्वत
दो साल में पकड़े गए रिश्वत लेने के मामले
पुलिस में 70, राजस्व 42, बिजली 29, यूएलबी 14, खाद्य आपूर्ति 12, स्वास्थ्य 10, एक्साइज 9, मार्केटिंग बोर्ड 7, शिक्षा, जनस्वास्थ्य, परिवहन विभाग 6- 6, जेल, पंचायती राज और सहकारिता 4-4, एचएसवीपी, होम गार्ड, सिंचाई, बागवानी, खनन, खजाना, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, एचएसआईआईडीसी में 3-3 केस पकड़े गए हैं। इनके अलावा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, भू अभिलेख, सामाजिक न्याय, श्रम विभाग में 2-2, पशुपालन, वक्फ बोर्ड, रोजगार, खादी, हाउसिंग बोर्ड, उद्योग, एचपीएससी, वन, कौशल निगम, फूड ड्रग्स, मछली पालन और पीडब्ल्यूडी विभाग में 1-1 कर्मचारी को रिश्वत लेते पकड़ा गया है।
- पुलिस विभाग : नई धारा जोड़ने, केस में से नाम निकालने, जमानत दिलाने, दर्ज केस में मदद करने, मामला रफा-दफा करने और पासपोर्ट की वेरिफिकेशन के लिए।
- राजस्व विभाग : रजिस्ट्री करने, भूमि का इंतकाल करने, फर्द और रिकार्ड देने के नाम पर और अधिगृहत भूमि का क्लेम जारी करने के लिए।
- बिजली विभाग : बिजली बिल ठीक और कम करने, खराब मीटर की रीडिंग ठीक करने, जल्दी कनेक्शन और सोलर नेट मीटरिंग फाइल को पास कराने के लिए।
- इंजीनियरिंग विभाग : बिल पास कराने, फर्म को ब्लैक लिस्ट करने, पुराना भुगतान जारी करने और टेंडर अलॉट करने के लिए।
- शहरी स्थानीय निकाय : प्रॉपर्टी आईडी बनाने, प्रॉपर्टी टैक्स ठीक करने, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने और नक्शा पास कराने के नाम रिश्वत ली जाती है।
- सामाजिक विभाग : पेंशन बनवाने, विवाह शगुन और लाडली योजना की राशि लेने, लोन दिलाने के लिए रिश्वत ली जाती है।
दो साल में पकड़े गए रिश्वत लेने के मामले
पुलिस में 70, राजस्व 42, बिजली 29, यूएलबी 14, खाद्य आपूर्ति 12, स्वास्थ्य 10, एक्साइज 9, मार्केटिंग बोर्ड 7, शिक्षा, जनस्वास्थ्य, परिवहन विभाग 6- 6, जेल, पंचायती राज और सहकारिता 4-4, एचएसवीपी, होम गार्ड, सिंचाई, बागवानी, खनन, खजाना, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, एचएसआईआईडीसी में 3-3 केस पकड़े गए हैं। इनके अलावा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, भू अभिलेख, सामाजिक न्याय, श्रम विभाग में 2-2, पशुपालन, वक्फ बोर्ड, रोजगार, खादी, हाउसिंग बोर्ड, उद्योग, एचपीएससी, वन, कौशल निगम, फूड ड्रग्स, मछली पालन और पीडब्ल्यूडी विभाग में 1-1 कर्मचारी को रिश्वत लेते पकड़ा गया है।
दो साल में सबसे अधिक शिकायतें पुलिस के खिलाफ
2021 और 2022 में भ्रष्टाचार की सबसे अधिक शिकायतें पुलिस के खिलाफ ही आई हैं। पुलिस के खिलाफ 1445, पंचायती राज संस्थाओं की 755, शहरी स्थानीय निकाय 676, शिक्षा विभाग 488, बिजली 450, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग 424, राजस्व 390, स्वास्थ्य 239 और हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के खिलाफ 190 शिकायतें आई हैं। इनके अलावा अन्य विभागों और निगमों के खिलाफ भ्रष्टाचार की 55 शिकायतें एसीबी के पास आई हैं। केवल डाक विभाग ही ऐसा है जिसके खिलाफ कोई शिकायत नहीं आई है।
डीजीपी सख्त, पुलिसकर्मी भ्रष्टाचार में संलिप्त मिला तो सीओ से भी लिया जाएगा स्पष्टीकरण
एंटी करप्शन ब्यूरो में रहते भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी चोट कर चुके डीजीपी शत्रुजीत कपूर ने अब पुलिस विभाग में फैले भ्रष्टाचार पर भी सख्त रवैया अख्तियार कर लिया है। अब अगर कोई पुलिस कर्मचारी भ्रष्टाचार के मामले में फंसता है तो इस संबंध में सीओ (कंट्रोलिंग ऑफिसर) से भी स्पष्टीकरण लिया जाएगा। डीजीपी ने इस संबंध में हरियाणा सिविल सेवा (सरकारी कर्मचारी आचरण) नियम 2016 का हवाला देते हुए सभी एसपी (पुलिस अधीक्षक) और सीपी (पुलिस आयुक्त) को पत्र लिखा है। डीजीपी ने लिखा है कि अक्सर यह देखा गया है कि जब कोई कर्मचारी भ्रष्टाचार में संलिप्त पाया जाता है या रिश्वत लेते हुए पकड़ा जाता है तो उस पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है, लेकिन उनके कंट्रोलिंग ऑफिसर की जिम्मेदारी तय नहीं की जाती। भविष्य में जब कोई भी पुलिस कर्मचारी भ्रष्टाचार में संलिप्त पाया जाता है तो उस पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
2021 और 2022 में भ्रष्टाचार की सबसे अधिक शिकायतें पुलिस के खिलाफ ही आई हैं। पुलिस के खिलाफ 1445, पंचायती राज संस्थाओं की 755, शहरी स्थानीय निकाय 676, शिक्षा विभाग 488, बिजली 450, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग 424, राजस्व 390, स्वास्थ्य 239 और हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के खिलाफ 190 शिकायतें आई हैं। इनके अलावा अन्य विभागों और निगमों के खिलाफ भ्रष्टाचार की 55 शिकायतें एसीबी के पास आई हैं। केवल डाक विभाग ही ऐसा है जिसके खिलाफ कोई शिकायत नहीं आई है।
डीजीपी सख्त, पुलिसकर्मी भ्रष्टाचार में संलिप्त मिला तो सीओ से भी लिया जाएगा स्पष्टीकरण
एंटी करप्शन ब्यूरो में रहते भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी चोट कर चुके डीजीपी शत्रुजीत कपूर ने अब पुलिस विभाग में फैले भ्रष्टाचार पर भी सख्त रवैया अख्तियार कर लिया है। अब अगर कोई पुलिस कर्मचारी भ्रष्टाचार के मामले में फंसता है तो इस संबंध में सीओ (कंट्रोलिंग ऑफिसर) से भी स्पष्टीकरण लिया जाएगा। डीजीपी ने इस संबंध में हरियाणा सिविल सेवा (सरकारी कर्मचारी आचरण) नियम 2016 का हवाला देते हुए सभी एसपी (पुलिस अधीक्षक) और सीपी (पुलिस आयुक्त) को पत्र लिखा है। डीजीपी ने लिखा है कि अक्सर यह देखा गया है कि जब कोई कर्मचारी भ्रष्टाचार में संलिप्त पाया जाता है या रिश्वत लेते हुए पकड़ा जाता है तो उस पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है, लेकिन उनके कंट्रोलिंग ऑफिसर की जिम्मेदारी तय नहीं की जाती। भविष्य में जब कोई भी पुलिस कर्मचारी भ्रष्टाचार में संलिप्त पाया जाता है तो उस पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।