फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   ML Kausar Auditorium resonated with the beats of Ghungroos in memory of Birju Maharaj

बिरजू महाराज की याद में घुंघरूओं की थाप से गूंजा एमएल कौसर सभागार

Thu, 12 May 2022 02:12 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Thu, 12 May 2022 02:12 AM IST
विज्ञापन
ML Kausar Auditorium resonated with the beats of Ghungroos in memory of Birju Maharaj
प्राचीन कला केंद्र में पद्मभूषण बिरजू महाराज की याद में आयोजित कार्यक्रम में प्रस्तुति देते उनक - फोटो : CHANDIGARH
चंडीगढ़। प्राचीन कला केंद्र के एमएल कौसर सभागार में कभी कथक और भरतनाट्यम की जुगलबंदी पर तालियों की गड़गड़ाहट गूंज रही थी तो कभी राग बहार पर आधारित त्रिवट की प्रस्तुति पर। मौका था प्राचीन कला केंद्र की 272वीं मासिक बैठक का, जिसमें शाम को एमएल कौसर सभागार में एक विशेष नृत्य संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम द्वारा पंडित बिरजू महाराज परंपरा ने समरांजलि के माध्यम से पंडित बिरजू महाराज को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर बिरजू महाराज के सुपुत्र, पौत्र और पौत्र वधू ने प्रस्तुति देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। गौरतलब है कि बिरजू महाराज को केंद्र द्वारा 2011 में गुरू एमएल कौसर अवार्ड से नवाजा गया था।
विज्ञापन

कार्यक्रम का आरंभ त्रिभुवन महाराज द्वारा एकल प्रस्तुति शिव स्तुति से किया गया, जिसमें उन्होंने भगवान शिव के सुंदर रूप का वर्णन नृत्य के माध्यम से किया। ब्रज ताल पर आधारित पौने पांच मात्रा में एक रचना पर कत्थक प्रस्तुत किया गया। इसके बाद तीन ताल में पारंपरिक कथक नृत्य पेश किया गया। इनके साथ मंच पर राहुल विश्वकर्मा ने तबले पर, जयवर्द्धन दधीच ने गायन पर और जनाब वारिस खान ने सारंगी पर संगत की। इसके बाद रजनी महाराज द्वारा भरतनाट्यम में तकनीकी पक्ष पर आधारित तिल्लाना पेश किया गया। कार्यक्रम के अगले भाग में तीन युवा कलाकारों राहुल मोंगा, शैलजा पंचकस एवं तरण गर्ग द्वारा त्रिवट पेश किया गया जो राग बहार पर आधारित था। इसके बाद त्रिभुवन महाराज और रजनी महाराज द्वारा भरतनाट्यम और कथक की सुंदर जुगलबंदी पेश की गई। जाति आरोहन नामक प्रस्तुति में दोनों ने बेहद खूबसूरती से नृत्य, भाव और कला का प्रदर्शन करके दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के अंत में जयकिशन महाराज द्वारा बैठकी भाव प्रस्तुति किया गया, जिसमें कालका बिंदादीन महाराज एवं इस घराने की कुछ खास बंदिशों पर बैठकी भाव प्रस्तुत करके खूब तालियां बटोरीं। इनके साथ मंच पर राहुल विश्वकर्मा ने तबले पर, जयवर्द्धन दधीच ने गायन पर और जनबा वारिस खान ने सांरगी पर संगत की। कार्यक्रम के अंत में केंद्र की रजिस्ट्रार डॉ. शोभा कौसर ने कलाकारों को पुष्प देकर सम्मानित किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed