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वारंट अधिकारी से बदसलूकी गंभीर मामला, इस अराजकता से सख्ती से निपटना जरूरी : हाईकोर्ट

Mon, 25 Mar 2024 03:20 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 25 Mar 2024 03:20 AM IST
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Misbehavior with warrant officer is a serious matter, it is necessary to deal with this anarchy strictly: High Court
चंडीगढ़। पुलिस अधिकारियों की ओर से वारंट अधिकारी के साथ बदसलूकी करने व अपमानजनक रवैया अपनाने को अराजकता की स्थिति बताते हुए मारपीट के आरोप पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब के डीजीपी से जवाब मांग लिया है। बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में तलाशी लेने के लिए न्यायालय की ओर से वारंट अधिकारी नियुक्त किया गया था।वारंट अधिकारी की ओर से हाईकोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट पर जस्टिस एनएस शेखावत ने कहा कि रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि वहां मौजूद कुछ पुलिस अधिकारियों ने न्यायालय द्वारा नियुक्त वारंट अधिकारी के साथ दुर्व्यवहार किया और उन पर हमला किया। पुलिस अधिकारियों के इस अमानवीय, अपमानजनक और आपराधिक आचरण को हल्के में नहीं लिया जा सकता। इस तरह की अराजकता को सख्ती से रोकने की जरूरत है। न्यायालय द्वारा नियुक्त एक वारंट अधिकारी के साथ न केवल विशेष कमांडो द्वारा ज्यादती की गई बल्कि न्यायालय के कार्य में बाधा भी डाला गया। इस दौरान वहां पर एक व्यक्ति मौजूद था जो इंस्पेक्टर शिवकुमार होने का दावा कर रहा था। यह आचरण न केवल अपराध है बल्कि अपमानजनक भी है।
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मोहाली निवासी एक व्यक्ति ने हाईकोर्ट में ईमेल के जरिए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि उसके परिवार के सदस्यों को कुछ लोगों ने हिरासत में ले लिया है जो खुद को पंजाब पुलिस बता रहे हैं याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने एडवोकेट मनोज कश्यप को वारंट अधिकारी नियुक्त किया और विभिन्न स्थानों पर जाकर तलाशी लेने का निर्देश दिया।
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वारंट अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि जब वह तलाशी लेने के लिए मोहाली की स्पेशल सेल में पहुंचे तो उन्हें एक कांस्टेबल ने रोका और कहा कि कार्यालय के अंदर कोई पुलिस अधिकारी नहीं है। कांस्टेबल को यह बताने के बाद भी कि वह एक अदालत अधिकारी हैं और उन्हें पुलिस स्टेशन परिसर में कथित बंदियों की तलाश के लिए भेजा गया है, कांस्टेबल ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया और एसएसपी से संपर्क करने के लिए कहा।
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एसएसपी ने उनके कॉल का जवाब नहीं दिया। इसके बाद एक व्यक्ति ने खुद को इंस्पेक्टर बताते हुए स्पेशल सेल में दाखिल हुआ और उन पर बाहर जाने के लिए चिल्लाया। उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया। कश्यप की रिपोर्ट के मुताबिक, वह कथित बंदियों की तलाश के लिए मटौर पुलिस स्टेशन भी गए, जहां एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि ऐसे किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं किया गया है। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी करते हुए पुलिस महानिदेशक के व्यक्तिगत हलफनामे के जरिए जवाब मांगा है।

हाईकोर्ट ने कहा कि मोहाली के अधिकारियों ने वारंट अधिकारी के साथ सहयोग नहीं किया, इसलिए उनकी भूमिका की जांच की जानी चाहिए और पुलिस महानिदेशक को पुलिस महानिरीक्षक रैंक के एक अधिकारी को तैनात करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी भी पुलिस अधिकारी द्वारा संज्ञेय अपराध किया गया है तो वे जांच के दौरान उसे लिखित रूप में नोटिस जारी करें। मामले को 01 अप्रैल के लिए सूचीबद्ध करते हुए अदालत ने एसएसपी को कथित अवैध हिरासत में शामिल याचिकाकर्ता द्वारा उल्लिखित सभी व्यक्तियों को पेश करने का निर्देश दिया।


कोर्ट ने डीजीपी से हलफनामे में इन सवालों के जवाब मांगे हैं
- उस अधिकारी का नाम, जो स्पेशल सेल, पंजाब पुलिस, मटौर थाने का प्रमुख है
- उन सभी अधिकारियों के नाम और पदनाम, जो स्पेशल सेल में तैनात हैं और उस समय ड्यूटी पर थे
- उन अधिकारियों के नाम और पदनाम, जो विशेष सेल के बाहर और अंदर वारंट अधिकारी से मिले थे
- क्या वर्तमान मामले में कोई एफआईआर दर्ज की गई है? यदि हां, तो एफआईआर की एक प्रति संलग्न करें
- क्या वर्तमान मामले में दोषी पाए गए सभी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है?
- क्या दोषी पुलिस अधिकारी (कर्मचारियों) के विरुद्ध कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है/लेने का प्रस्ताव है
- उस अधिकारी का नाम, जिसने एसएसपी कार्यालय, मोहाली से सहयोग नहीं किया और ऐसे अधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई?
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