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प्यार का कोई दीप जला दीजिए.. मेरे देश को नववर्ष पर खिला दीजिए..
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चंडीगढ़। प्यार का कोई दीप जला दीजिए.. मेरे देश को नववर्ष पर खिला दीजिए.. नीलम त्रिखा ने जब अपनी रचना पढ़ी तो अन्य कवियों के साथ दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया। मौका था उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र द्वारा ‘काव्य रस-अलविदा 2020’ विषय पर ‘चतुर्थ हरियाणा ई-कवि सम्मेलन’ का गूगल मीट के आयोजन का। इस अवसर पर हरियाणा के आठ जाने-माने साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से ऐसा रंग रंग जमा कि काव्य पाठ से 2020 को अलविदा कहते हुए बड़े ही उत्साह और जोश के साथ नव वर्ष 2021 का अभिनंदन किया।
उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला के निदेशक प्रोफेसर सौभाग्य वर्धन ने बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकारा सुदेश मोदगिल नूर ने और संचालन नीलम त्रिखा ने किया। सुदेश मोदगिल ने अपनी रचना दुनिया को फिर खुशनुमा सी जिंदगानी दे ऐ प्रभु, सब की धड़कनों में पहले सी रवानी दे ऐ प्रभु.. सुनाकर कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद नरेंद्र अत्री संतोषी ने ‘प्यार में डूबा हुआ मन हर्ष ना तुझको निहारे, ओ तिरंगे रूप तेरा बस गया रूह में हमारे सुनाकर सभी को देशभक्ति में डूबे दिया। सतपाल शास्त्री ने क्या-क्या गुल खिलाए ट्वेंटी-ट्वेंटी साल ने सुनो.. सुनाया। संगीता राय ने अपनी रचना इधर-उधर की बातें छोड़ों.. सुनाई। इस दौरान शिखा श्याम राणा ने गौरव पथ की बेला में, मन मेरा सपने बुनता है.. सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। वहीं संदीप सिंह ने इरादों के तीर लेकर, मंजिल मैं तो चल पड़ा हूं.. सुनाई। कार्यक्रम के अंत में प्रोफेसर सौभाग्य वर्धन ने सभी का धन्यवाद करते हुए नववर्ष के आगमन पर सभी को शुभकामनाएं दीं।
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उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला के निदेशक प्रोफेसर सौभाग्य वर्धन ने बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकारा सुदेश मोदगिल नूर ने और संचालन नीलम त्रिखा ने किया। सुदेश मोदगिल ने अपनी रचना दुनिया को फिर खुशनुमा सी जिंदगानी दे ऐ प्रभु, सब की धड़कनों में पहले सी रवानी दे ऐ प्रभु.. सुनाकर कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद नरेंद्र अत्री संतोषी ने ‘प्यार में डूबा हुआ मन हर्ष ना तुझको निहारे, ओ तिरंगे रूप तेरा बस गया रूह में हमारे सुनाकर सभी को देशभक्ति में डूबे दिया। सतपाल शास्त्री ने क्या-क्या गुल खिलाए ट्वेंटी-ट्वेंटी साल ने सुनो.. सुनाया। संगीता राय ने अपनी रचना इधर-उधर की बातें छोड़ों.. सुनाई। इस दौरान शिखा श्याम राणा ने गौरव पथ की बेला में, मन मेरा सपने बुनता है.. सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। वहीं संदीप सिंह ने इरादों के तीर लेकर, मंजिल मैं तो चल पड़ा हूं.. सुनाई। कार्यक्रम के अंत में प्रोफेसर सौभाग्य वर्धन ने सभी का धन्यवाद करते हुए नववर्ष के आगमन पर सभी को शुभकामनाएं दीं।
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