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मजदूर दिवस : लोगों ने उठाया छुट्टी का लुत्फ, दो वक्त की रोटी के लिए मजदूरी करते दिखे मजदूर
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चंडीगढ़। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर पंजाब में सरकारी छुट्टी होने के चलते कर्मचारी छुट्टी का आनंद उठा रहे थे, वहीं, चंडीगढ़ में मजदूर दो वक्त की रोटी के लिए मजदूरी करते हुए नजर आए। मजदूरों ने बताया कि उन्हें ई-श्रम कार्ड का लाभ भी नहीं मिल रहा है। पैसे न होने के कारण किसी दिन भूखे पेट भी पड़ता है। वह खुद को लाचार बेसहारा महसूस करते हैं। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर अपनी व्यथा साझा करते हुए मजदूरों ने बताया कि पिछले कुछ सालों में उनकी दिहाड़ी नाम मात्र ही बढ़ी है, असल जिंदगी के हालात वैसे के वैसे ही हैं। संघर्ष की दास्तां सुनाते हुए मजदूरों ने बताया कि पेट पालने के लिए हर दिन कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। काम नहीं मिलने पर पैसों की तंगी से भी गुजरना पड़ता है। दिहाड़ी लगाने से घर का गुजारा नहीं होेता। वहीं, ठेकेदार मजदूरों के हक की कमाई को खा जाते हैं। वह मजदूरों को समय से पैसे भी नहीं देते। समय से पैसे न मिलने पर घर चलाना मुश्किल हो जाता है। ऊंटी-ऊंची इमारतों और मशीनों में अपनी जिंदगी को दांव पर लगाकर दिहाड़ी मजदूरी करनी पड़ती है।
अपना दुख व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि मजदूरी करते वक्त अगर चोट लग जाए तो उन्हें पैसे नहीं मिलते। एक दिन की दिहाड़ी 400 रुपये है इतने कम पैसों से घर चलाना मुश्किल होता है।
क्या कहते हैं मजदूर
बच्चों को पढ़ा लिखा नहीं पाते
ठेकेदार समय से पैसे नहीं देता। कम मजदूरी मिलने के चलते बच्चों को पढ़ा लिखा नहीं पाते। मजबूरी में बच्चों से भी काम करवाना पड़ रहा है। ई-श्रम कार्ड का अब तक कोई लाभ नहीं मिला।
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-धर्मेंद्र, निवासी अयोध्या (उत्तर प्रदेश)
मजदूरों की बढ़नी चाहिए दिहाड़ी
खुद का घर नहीं है। जगह जगह भटकना पड़ता है। जहां मजदूरी करते हैं वहीं सोते हैं। मजदूरों की दिहाड़ी बढ़नी चाहिए ताकि वह अपना घर सही से चला सकें।
-सनोज, निवासी सिवान (बिहार)
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अपना दुख व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि मजदूरी करते वक्त अगर चोट लग जाए तो उन्हें पैसे नहीं मिलते। एक दिन की दिहाड़ी 400 रुपये है इतने कम पैसों से घर चलाना मुश्किल होता है।
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क्या कहते हैं मजदूर
बच्चों को पढ़ा लिखा नहीं पाते
ठेकेदार समय से पैसे नहीं देता। कम मजदूरी मिलने के चलते बच्चों को पढ़ा लिखा नहीं पाते। मजबूरी में बच्चों से भी काम करवाना पड़ रहा है। ई-श्रम कार्ड का अब तक कोई लाभ नहीं मिला।
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-धर्मेंद्र, निवासी अयोध्या (उत्तर प्रदेश)
मजदूरों की बढ़नी चाहिए दिहाड़ी
खुद का घर नहीं है। जगह जगह भटकना पड़ता है। जहां मजदूरी करते हैं वहीं सोते हैं। मजदूरों की दिहाड़ी बढ़नी चाहिए ताकि वह अपना घर सही से चला सकें।
-सनोज, निवासी सिवान (बिहार)