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चंडीगढ़: सूर्य ग्रहण आज... सुबह नहीं खुलेंगे मंदिर के कपाट, पढ़ें- क्या होता है कंकण सूर्य ग्रहण

Sun, 21 Jun 2020 01:57 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Sun, 21 Jun 2020 01:57 AM IST
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Kankan solar eclipse today, the doors of the temple will not open
solar eclipse - फोटो : सोशल मीडिया

कंकण सूर्य ग्रहण आज है। ग्रहण का सूतक रविवार की रात से शुरू हो गया। कंकणाकृति सूर्य ग्रहण रविवार के दिन घटित हो रहा है इसलिए इस ग्रहण को चूड़ामणि सूर्य ग्रहण कहा जाता है। सूर्य ग्रहण का सूतक शनिवार की रात को ही लग जाएगा। रविवार की सुबह मंदिर के कपाट नहीं खुलेंगे। इक्कीसवीं सदी का कंकण चूड़ामणि सूर्य ग्रहण का योग अस्सी वर्ष के बाद बना है। यह कहना है सेक्टर- 30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र का।

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श्री महाकाली मंदिर सेक्टर- 30 के प्रधान राकेश पाल मोदगिल ने बताया कि सूतक लगने के कारण सुबह मंदिर बंद रहेगा। सुबह दर्शन नहीं होगा। मंदिर के कपाट शाम को खुलेंगे। शिव शक्ति मंदिर के पुजारी पंडित श्याम सुंदर शास्त्री ने बताया कि सूतक लगने के बाद मंदिर में प्रतिमाओं का स्पर्श वर्जित होता है।

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क्या होता है कंकण सूर्य ग्रहण
पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र का कहना है कि अमावस्या के दिन चंद्र जब सूर्य तथा पृथ्वी के मध्य आ जाता है तो इस आकाशीय घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है। इस स्थिति में जब चंद्र की छाया पूर्णरूप से सूर्य को ढक लेती है तो यह पूर्णग्रास सूर्य ग्रहण कहलाता है। लेकिन जब सूर्य की छाया चंद्र से बड़ी होती है और चंद्र की छाया सूर्य की छाया को पूरी तरह से ढक नहीं पाती तो इस अवस्था में सूर्य एक चांदी के चमकते कंकण अथवा वलय के आकर में दिखाई देता है जिसे वलयाकार अथवा कंकण सूर्य ग्रहण कहते हैं।


तीन घंटे 25 मिनट रहेगी ग्रहण की अवधि
तीन घंटा 25 मिनट की अवधि के ग्रहण का प्रारंभ चंडीगढ़ में सुबह 10.22 बजे शुरू होगा। ग्रहण दोपहर 1.47 बजे समाप्त होगा। उन्होंने कहा कि यह कंकण सूर्यग्रहण मिथुन राशि में घटित होगा। इस समय सूर्य, चंद्रमा, बुध तथा राहु ग्रह मिथुन राशि में स्थित हैं। मिथुन राशि का नक्षत्र मृगशिरा आद्रा है। मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी मंगल, आद्रा नक्षत्र का स्वामी राहु है तथा मकर राशि में नीच बृहस्पति के साथ वक्री शनि का संबंध है। इसलिए यह ग्रहण अनिष्टकारी है। इसमें अतिवृष्टि, अनावृष्टि, महामारी का भयंकर प्रकोप, प्राकृतिक आपदा, तूफान एवं आंतरिक तथा बाहरी शत्रुओं का प्रकोप रहेगा।

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