फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Hypertension increasing in youth, Report of Department of PGI Community Medicine Reveals

युवा जोश पर भारी हाइपरटेंशन: पीजीआई कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की रिपोर्ट में खुलासा-लापरवाही से बढ़ रहा मर्ज

Fri, 19 Aug 2022 05:11 PM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 19 Aug 2022 05:11 PM IST
सार

देश में होने वाली 60 प्रतिशत मौतों का कारण नॉन कम्युनिकेबल यानी गैर संचारी रोग है। इसमें हाइपरटेंशन प्रमुख रूप में सामने आ रहा है। पंजाब में इसके बढ़ते दायरे पर काबू के लिए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 (एनएचएफएस-4) की रिपोर्ट का विश्लेषण किया गया।

विज्ञापन
Hypertension increasing in youth, Report of Department of PGI Community Medicine Reveals
high bp - फोटो : amar ujala

विस्तार

युवा तेजी से हाइपरटेंशन का शिकार हो रहे हैं। चिंता की बात यह है कि साइलेंट किलर के रूप में जाने जाने वाले इस मर्ज को लेकर युवा वर्ग लापरवाही भरा रवैया अपना रहा है। इससे स्थिति दिनोंदिन गंभीर होती जा रही है। 

विज्ञापन


चौंकाने वाली बात तो यह है कि इस मर्ज की चपेट में आ चुके युवाओं को इसकी जानकारी ही नहीं है। इतना ही नहीं जिन्हें पता भी है वो भी इलाज में अनदेखी कर रहे हैं। हाई प्रोफाइल वर्ग के उच्च शिक्षित युवा मध्य वर्ग के कम पढ़े-लिखे युवाओं की तुलना में ज्यादा लापरवाह हैं जो दु:खद पहलू है। यह खुलासा पीजीआई की कम्यूनिटी मेडिसिन द्वारा युवाओं पर किए गए एक व्यापक विश्लेषण में हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस मर्ज को लेकर युवा सचेत नहीं हुए तो स्थिति खतरनाक हो सकती है। 
विज्ञापन


विश्लेषण में शामिल कम्यूनिटी मेडिसिन के डॉ. सोनू गोयल ने बताया कि देश में होने वाली 60 प्रतिशत मौतों का कारण नॉन कम्युनिकेबल यानी गैर संचारी रोग है। इसमें हाइपरटेंशन प्रमुख रूप में सामने आ रहा है। पंजाब में इसके बढ़ते दायरे पर काबू के लिए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 (एनएचएफएस-4) की रिपोर्ट का विश्लेषण किया गया। लगभग तीन वर्षों के बाद उसका व्यापक विश्लेषण तैयार हुआ है। इसे मार्च 2022 में जरनल ऑफ पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित किया गया। इस विश्लेषण का मुख्य उद्देश्य युवाओं में बढ़ रहे मर्ज का प्रतिशत जानने के साथ ही उससे जुड़े लगभग सभी बिंदुओं पर रिपोर्ट एकत्र करना था ताकि बचाव के लिए उन बिंदुओं को शामिल कर कार्ययोजना बनाई जा सके। 
विज्ञापन
विज्ञापन


डॉ. सोनू ने बताया कि इस विश्लेषण में देशभर के 30 संस्थाओं के शोधकर्ता शामिल हुए थे। वहीं, एनएचएफएस-4 की रिपोर्ट को ही इसका आधार इसलिए बनाया गया क्योंकि एनएचएफएस-5 की रिपोर्ट आने में अभी कम से कम तीन से चार साल का समय लगेगा। ऐसे में यह सर्वे हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ क्योंकि उसमें देश के 15 से 40 साल के 8 लाख लोगों को शामिल किया गया था जिनमें से 14 प्रतिशत युवा इस मर्ज से ग्रस्त मिले। 

स्थिति और गंभीर हो रही

डॉ. सोनू गोयल ने बताया कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस)-5 के आंकड़ों के मुताबिक शहर में राष्ट्रीय औसत की तुलना में उच्च रक्तचाप के केस अधिक हैं। एक सर्वे में एनएफएचएस-4 के निष्कर्षों की तुलना में बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) में भी वृद्धि देखी गई है। 2015-16 में शहर में महिलाओं व पुरुषों में उच्च रक्तचाप क्रमश: 25 और 30.6 प्रतिशत था जबकि राष्ट्रीय औसत क्रमश: 21.3 और 24 प्रतिशत था। 2020-21 में जारी एनएफएचएस -5 के आंकड़ों से पता चलता है कि यह प्रतिशत बढ़कर क्रमश: 32 और 41.5 प्रतिशत पर पहुंच गया है। यह स्थिति चिंताजनक है। इस स्थिति से बचाव के लिए ही लगातार पंजाब में हाइपरटेंशन मैनेजमेंट के तहत सर्वे रिपोर्ट का विश्लेषण किया गया है। इससे इस मर्ज के बढ़ने के कारणों का गहराई से मूल्यांकन कर बचाव कार्य किया जा सके। 

ऐसे होता है हाइपरटेंशन 

जिस समय दिल रक्त प्रवाह करने के बाद आराम की स्थिति में आता है, उस समय रक्त का दबाव बहुत कम हो जाता है। इस रक्त दबाव माप को प्रसारक (डायस्टोलिक) दबाव कहा जाता है। वयस्कों के लिए सामान्य ब्लड प्रेशर 120/80 एमएमएचजी माना जाता है। आमतौर पर 140/90 एमएमएचजी से अधिक ब्लड प्रेशर को वयस्कों के लिए हाई माना जाता है और 90/60 एमएमएचजी को कम माना जाता है। 

ये कारण हैं जिम्मेदार

मोटापा, मधुमेह, व्यायाम न करना, आनुवांशिक, लगातार तनाव में रहना, धूम्रपान, थायराइड

ये भी जान लें

सामान्य बीपी 120/80 से कम होना चाहिए। इससे ऊपर के स्टेज को प्री-हाइपरटेंशन कहते हैं। यदि बीपी 120 से 139, 80 से 89 के बीच है तो उस स्थिति में भी स्ट्रोक, किडनी, हृदयाघात, मधुमेह और आंखों की बीमारी बढ़ जाती है। 140/90 की स्थिति को हाइपरटेंशन कहते हैं, जो सबसे खतरनाक स्तर होता है। 

बीपी की जांच जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार 40 साल की उम्र के बाद हर व्यक्ति को ब्लड प्रेशर चेक करवाना चाहिए। यदि सामान्य आता है तो हर छह महीने में चेक करवाते रहना चाहिए। किसी मरीज में प्री-हाइपरटेंशन का स्तर आता है तो वह डॉक्टर से संपर्क करें और हर महीने चेकअप करवाएं। बीपी चेक करने से आधा घंटा पहले चाय-कॉफी न पिएं और न धूम्रपान करें। 

बचाव के लिए ये करें

  • प्रतिदिन कम से कम 45 मिनट व्यायाम करें। इसमें ब्रिस्क वॉक, जॉगिंग, साइक्लिंग, स्वीमिंग, एरोबिक्स डांस को शामिल करें। वॉक में एक मिनट में 40-50 कदम, ब्रिस्क वॉक में एक मिनट में 75-80 कदम और जॉगिंग में 150-160 कदम चलना चाहिए।
  • यदि तेज नहीं चल पाते हैं तो रोजाना कम से कम पांच किलोमीटर चलें। दिल के मरीज हैं तो एक्सरसाइज से पहले डॉक्टर से संपर्क करें।
  • नमक की मात्रा कम करें। सलाद पर नमक न डालें। पापड़ खाने से बचें। दिनभर में आधा चम्मच से ज्यादा नमक न खाएं।
  • वजन को नियंत्रण में रखें। वजन को चेक करते रहें।
  • तनाव दूर करने के लिए अपने शौक को पूरा करने के लिए समय निकालें।
  • फल और हाई-फाइबर वाली चीजें (गेहूं, ज्वार, बाजरा, जौ, दलिया, स्प्राउट्स, ओट्स, चना, दाल, ब्राउन राइस आदि) ज्यादा खाएं। 

इससे कर लें तौबा

फास्ट फूड, तली-भुनी चीजें (समोसा, टिक्की, ब्रेड पकौड़े आदि), कोल्डड्रिंक, मीठी चीजें, चावल, मैदा, सैचुरेटेड फैट (देसी घी, वनस्पति, मक्खन, नारियल तेल) पैक्ड फूड (सॉस, अचार, चिप्स, कुकीज) के अलावा अंडे का पीला भाग, रेड मीट और फुल क्रीम दूध के सेवन से बचें। 

ये अनदेखी हो सकती है आपके लिए खतरनाक

बिना डॉक्टर की सलाह खुद दवा बंद कर देना। नार्मल बीपी आने पर कुछ लोग दोस्तों व परिजनों की सलाह पर दवा नहीं लेते जबकि यह स्थिति ज्यादा खतरनाक होती है। इससे ब्रेन स्ट्रोक और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है। फॉलोअप में मरीज नहीं आते। कई बार दवा कम करनी होती है तो कई बार दवा बढ़ानी होती है इसलिए जरूरी है कि ब्लड प्रेशर होने पर डॉक्टर के संपर्क में रहें और चेकअप कराते रहें ताकि स्थिति गंभीर होने की नौबत ही न आए। 

विश्लेषण से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य 

  • कुल मरीजों में से महज 20 प्रतिशत ही सही इलाज ले रहे हैं
  • 80 प्रतिशत को पता ही नहीं है अपने मर्ज के बारे में 
  • 51 प्रतिशत सरकारी अस्पताल में व 49 प्रतिशत निजी अस्पताल में इलाज करा रहे हैं 
  • 15 से 25 साल वाले मरीज ज्यादा लापरवाह हैं 
  • 30 से 40 साल वाले सचेत हैं
  • ज्यादा पढ़े लिखे 16.6 प्रतिशत युवा ही समय पर दवा ले रहे हैं, जबकि कम पढ़े लिखे युवाओं का प्रतिशत 23 है 
  • जिनका इलाज चल रहा है उनमें 19 प्रतिशत हाई प्रोफाइल व 23 प्रतिशत लो प्रोफाइल ग्रुप के युवा शामिल हैं
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed