एक ऐसा भूकंप, जिसने हिला डाला था हरियाणा
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खुशकिस्मती रही है कि हरियाणा में भूकंप के हल्के झटके लगे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज से 55 साल पहले प्रदेश में इतना जबरदस्त भूकंप आया था, जिसने प्रदेश को हिला डाला था। यह वक्त था वर्ष 1960 का।
इस साल में रिएक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 6.2 थी। गुड़गांव के साथ-साथ दिल्ली की जमीन कांपी थी। डॉ. अभय कुमार श्रीवास्तव बताते हैं कि भूकंप में दो लोगों की मौत हुई थी और करीब दो सौ घर तबाह हो गए थे।
राज्य के इतिहास में यह भूकंप की सर्वाधिक तीव्रता रही। चार-पांच साल पहले भी आए भूकंप की तीव्रता 4.2 रही।
अब भूकंप आया तो मच सकती है भारी तबाही
दूसरी ओर स्थिति यह है कि अगर भूकंप आया तो प्रदेश की भौगोलिक स्थिति ‘सिहरन’ जरूर पैदा करती है। भूकंप के लिहाज से राज्य के 21 में से 15 जिले खतरनाक जोन (हाई डैमेज रिस्क जोन) में हैं।
झटके जरा भी तेज हुए तो इन जिलों में भूकंप भारी तबाही का सबब बन सकता है। पूर्वी, दक्षिण-पूर्वी और मध्य हरियाणा के 15 जिले सर्वाधिक खतरनाक माने गए हैं। ये सभी जिले जोन चार में आते हैं।
बता दें कि हाई डैमेज रिस्क जोन को नंबर चार जोन में रखा गया है। इससे कम रिस्क को जोन तीन और सबसे कम रिस्क के क्षेत्र को जोन चार का नाम दिया गया है।
खतरनाक जोन में हैं सूबे के 15 जिले
राज्य के केवल तीन पश्चिमी जिले (सिरसा, फतेहाबाद व हिसार) कुछ सुरक्षित कह सकते हैं। आपदा प्रबंधन संस्थान (हरियाणा लोक प्रशासन संस्थान गुडगांव) के प्रमुख डा. अभय कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि भौगोलिक लिहाज से क्षेत्र को तीन जोन में सूचीबद्ध किया गया है। 15 जिले जोन चार आते हैं।
वैसे तथ्य यह भी है कि यदि रिएक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता छह का आंकड़ा छू जाएगी तो पूरा हरियाणा भूकंप की जद में आ सकता है। छह और इससे ज्यादा तीव्रता वाले भूकंप के झटके अमूमन 150 से लेकर 200 किलोमीटर तक नुकसान पहुंचाते हैं।
जोन चार: भूकंप में तबाही के लिहाज से इस जोन में फरीदाबाद, गुडगांव, पलवल, मेवात, रेवाड़ी, सोनीपत, रोहतक, झज्जर, पानीपत, करनाल, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, अंबाला व पंचकूला जिले शामिल हैं। इस जोन में नारनौल का आधा हिस्सा भी शामिल है।
जोन तीन: भिवानी, जींद, कैथल और हिसार। इस जोन में नारनौल का आधा और हिसार का 25 प्रतिशत हिस्सा शामिल है।
जोन दो: भूकंप में तबाही के लिहाज से सबसे कम रिस्की इस जोन में सिरसा व फतेहाबाद जिलों के अलावा हिसार का 75 प्रतिशत हिस्सा शामिल हैं।