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हाउसिंग स्कीम मामला: चंडीगढ़ प्रशासन के ढुलमुल रवैये पर हाईकोर्ट सख्त
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 19 Oct 2016 01:19 AM IST
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कोर्ट
- फोटो : डेमो फोटो
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यूटी प्रशासन के 4000 से अधिक सरकारी कर्मचारियों के लिए बनाई गई हाउसिंग स्कीम को लेकर दायर याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के रवैये पर कड़ा एतराज जताया है। यहां तक कहा है कि हाईकोर्ट अब इस मामले को अंजाम तक लेकर जाएगा।
जस्टिस अजय कुमार मित्तल और जस्टिस रामेंदर जैन की खंडपीठ ने मंगलवार को मामले पर सुनवाई के दौरान कहा कि केंद्र सरकार की ओर से मंजूरी के बावजूद चंडीगढ़ प्रशासन का रवैया इस बारे में ढुलमुल ही बना हुआ है।
इस बीच, मंगलवार को केंद्र सरकार की ओर से हाईकोर्ट में केंद्रीय गृह मंत्रालय में गत चार अक्तूबर को हुई बैठक के मिनट्स सौंपे। कहा गया कि सभी विषयों पर गौर करने के बाद अब मामले में डिपाटमेंट आफ एक्सपेंडीचर की राय के लिए भेजा गया है। केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि विभाग की राय मिलने के बाद आगे कार्रवाई की जाएगी। केंद्र से इस जवाब को रिकार्ड पर लेते हुए हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई 16 नवंबर तक स्थगित कर दी।
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जस्टिस अजय कुमार मित्तल और जस्टिस रामेंदर जैन की खंडपीठ ने मंगलवार को मामले पर सुनवाई के दौरान कहा कि केंद्र सरकार की ओर से मंजूरी के बावजूद चंडीगढ़ प्रशासन का रवैया इस बारे में ढुलमुल ही बना हुआ है।
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इस बीच, मंगलवार को केंद्र सरकार की ओर से हाईकोर्ट में केंद्रीय गृह मंत्रालय में गत चार अक्तूबर को हुई बैठक के मिनट्स सौंपे। कहा गया कि सभी विषयों पर गौर करने के बाद अब मामले में डिपाटमेंट आफ एक्सपेंडीचर की राय के लिए भेजा गया है। केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि विभाग की राय मिलने के बाद आगे कार्रवाई की जाएगी। केंद्र से इस जवाब को रिकार्ड पर लेते हुए हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई 16 नवंबर तक स्थगित कर दी।
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यह है मामला
सीएचबी
- फोटो : DEMO Pics
करीब छह वर्ष पहले चंडीगढ़ प्रशासन ने अपने कर्मचारियों को आवास देने के लिए एक नीति बनाई थी। इसके तहत सभी से अर्नेस्ट मनी भी जमा करवा ली गई। बाद में सभी को मकान देने के निर्णय को बदलते हुए ड्रा के जरिए कुछ कर्मचारियों को मकान देने की नीति बनाई गई।
हालांकि ड्रा में सफल होने वाले कर्मचारियों को भी प्रशासन ने आज तक मकान नहीं दिए। इसके लिए प्रशासन का तर्क था कि प्रशासन के पास शहर में जगह की कमी है। बाद में मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की गई थी।
कानूनी चुनौती का सामना करते हुए आखिरकार कर्मचारियों को हाउसिंग वेलफेयर स्कीम के तहत चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के मकान उपलब्ध करवाने के लिए प्रशासन ने केंद्रीय गृह विभाग के जरिए केंद्रीय वित्त मंत्रालय से अनुमति मांगी। दरअसल हाउसिंग बोर्ड के समक्ष सबसे बड़ी समस्या जमीन की बढ़ी कीमत थी।
हालांकि ड्रा में सफल होने वाले कर्मचारियों को भी प्रशासन ने आज तक मकान नहीं दिए। इसके लिए प्रशासन का तर्क था कि प्रशासन के पास शहर में जगह की कमी है। बाद में मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की गई थी।
कानूनी चुनौती का सामना करते हुए आखिरकार कर्मचारियों को हाउसिंग वेलफेयर स्कीम के तहत चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के मकान उपलब्ध करवाने के लिए प्रशासन ने केंद्रीय गृह विभाग के जरिए केंद्रीय वित्त मंत्रालय से अनुमति मांगी। दरअसल हाउसिंग बोर्ड के समक्ष सबसे बड़ी समस्या जमीन की बढ़ी कीमत थी।