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बेसहारा बुजुर्गों के लिए सरकारी उदासीनता पर हाईकोर्ट सख्त

Sun, 19 Jul 2015 04:52 PM IST
सुरजीत सिंह सत्ती/अमर उजाला, चंडीगढ़
सुरजीत सिंह सत्ती/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 19 Jul 2015 04:52 PM IST
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High Court strict on government apathy on destitute elderly

बेसहारा बुजुर्गों के प्रति पंजाब सरकार कितनी संजीदा है, इसका अंदाज सामाजिक सुरक्षा एवं महिला व बाल विकास विभाग के आंकड़ों से सहज ही लगाया जा सकता है।

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प्रदेश भर में सरकारी वृद्धाश्रम केवल एक ही है। जबकि 35 आश्रमों का संचालन एनजीओ की ओर से हो रहा है। इनमें से केवल तीन ऐसे आश्रम हैं, जहां क्षमता के अनुसार वृद्धों को शरण दिया गया है। जबकि अन्य आश्रम खाली पड़े हैं।  यह खुलासा विभाग की अंडर सेक्रेटरी कमला देवी की ओर से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में दाखिल शपथ पत्र में दी जानकारी में हुआ है।
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शपथ पत्र में दी गई जानकारी के मुताबिक रोपड़ के नूरपुर बेदी में 50 की क्षमता है और वहां 50 बुजुर्ग रह रहे हैं। ऐसे ही हवेली कलां में 15 में से 15 और नवांशहर के दरयापुर में 25 में से 25 बुजुर्ग रह रहे हैं। उधर, होशियारपुर में सरकार के अपने ही आश्रम में 100 की क्षमता है, लेकिन यहां केवल 27 वृद्ध रह रहे हैं। सरकार ने वृद्धाश्रमों के प्रति कोई प्रचार नहीं किया, जबकि केंद्र से आई ग्रांट वृद्धाश्रमों को दी जाती हैं।
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साल 2007 में एक एक्ट बना, जिसमें राज्य के प्रत्येक जिले में एक सरकारी वृद्धाश्रम बनाना था। इसी पर हाईकोर्ट ने जानकारी मांगी थी कि इनके निर्माण के लिए क्या किया जा रहा है? इसके लिए आगामी बजट में क्या प्रावधान होगा? अंडर सेक्रेटरी ने कहा कि कोई प्रावधान नहीं रखा गया है। मौजूदा निजी वृद्धाश्रमों को केवल केंद्र से आई ग्रांट वितरित की जाती है।

इन शहरों में नहीं है वृद्धाश्रम

हाईकोर्ट ने 50000 से अधिक जनसंख्या वाले शहरों में वृद्धाश्रम की जानकारी मांगी थी। सरकार ने खुद माना है कि रामपुरा फूल, बरनाला, फतेहगढ़ साहिब, गोबिंदगढ़, अबोहर, कपूरथला, खन्ना, जगराओं, मलौट, मानसा, राजपुरा, नाभा, समाणा, पठानकोट, सुनाम, मालेर कोटला, धूरी, मोहाली, जीरकपुर, खरड़ और नयागांव में वृद्धाश्रम नहीं हैं।

हाईकोर्ट ने की टिप्पणी
जस्टिस एसके मित्तल की बेंच ने शुक्रवार को यह तथ्य सामने आने पर सरकार की खिंचाई करते हुए कहा कि लोग शामलात की जमीनें दबाए बैठे हैं। सवाल उठाया कि निजी संस्थाओं को वृद्धाश्रम चलाने के लिए जगह क्यों नहीं दी जाती। सरकार इन वृद्धाश्रमों में सुविधाएं एवं वित्तीय मदद खुद वहन करे।


जस्टिस मित्तल ने कहा कि उनके नोटिस में है कि चंडीगढ़ में बुजुर्ग और बेसहारा लोग सड़कों पर सोते हैं। पंजाब में यदि वृद्धाश्रम हैं और क्षमता के मुताबिक वृद्ध नहीं पहुंचते तो इसके पीछे जागरूकता का अभाव बड़ा कारण है।

इससे पहले भी हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर हुई थी। रोपड़ के एक वृद्धाश्रम के संचालक ने हाईकोर्ट को लिखे पत्र में कहा था कि उनकेवृद्धाश्रम में शरण के लिए अनेक लोग पहुंचते हैं, लेकिन क्षमता कम होने के कारण वह उन्हें नहीं रख सकते, लिहाजा सरकार को वृद्धाश्रम स्थापित करने चाहिए।

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