फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   High Court ordered release of man served 2 years sentence in 2001 for death of person in accident

Chandigarh: एक रुपये के लिए गई थी जान, आरोपी ने 23 साल काटे कोर्ट के चक्कर... अब हाईकोर्ट ने दिया ये आदेश

Wed, 26 Jun 2024 07:24 AM IST
निवेदिता वर्मा विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 26 Jun 2024 07:24 AM IST
सार

चंडीगढ़ के युवक ने एक फड़ी से तंबाकू का पैकेट लिया था। एक रुपये पर उसका फड़ी वाले से विवाद हो गया जिस पर उसने लात मार दी। फड़ी वाला पत्थर से टकराया और उसकी मौत हो गई थी। मामला 2001 का है।

विज्ञापन
High Court ordered release of man served 2 years sentence in 2001 for death of person in accident
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एक नादानी बन जाती है जिंदगी भर की परेशानी, कुछ ऐसे ही हालात में हुए एक हादसे के कारण 18 साल के युवक को 23 साल कोर्ट-कचहरी झेलनी पड़ी। 2001 में 1 रुपये के विवाद के कारण हुए हादसे में व्यक्ति की मौत के कारण 2 साल 10 माह की सजा झेलने वाले व्यक्ति की काटी गई सजा को काफी मानते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने उसे रिहा करने का आदेश दिया है।

विज्ञापन


याचिका दाखिल करते हुए चंडीगढ़ निवासी राजू गुरांग ने बताया कि उसके खिलाफ 13 अप्रैल, 2001 को गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया था। एफआईआर के अनुसार वह विजय कुमार की फड़ी पर गया था और वहां पर उसने सिगरेट ली। 

विज्ञापन

एक रुपये के लिए हुई हाथापाई में चली गई थी जान

इसके बाद तंबाकू की पुड़िया ली, जिसके लिए विजय ने एक रुपया मांगा। याची के पास खुले पैसे नहीं थे तो इसके चलते विजय ने पुड़िया वापस मांग ली। इस पर दोनों में बहस हुई जो हाथापाई में बदल गई। इस दौरान याची ने उसे लात मारी और वह पत्थर पर जा गिरा। उसके मुंह से खून निकल रहा था। उसे सेक्टर 16 के अस्पताल में भर्ती करवाया गया। बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

21 साल कोर्ट में विचाराधीन रही अपील

पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की थी और शव का पोस्टमार्टम करवाया गया। डॉक्टरों ने मौत का कारण सिर पर लगी गंभीर चोट बताया था। 2003 में चंडीगढ़ की ट्रायल कोर्ट ने याची को गैर-इरादतन हत्या का दोषी मानकर पांच साल की सजा सुनाई थी। याची ने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील कर दी थी जो हाईकोर्ट में बीते 21 साल से विचाराधीन थी। इसी बीच याची ने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर अपील लंबित रहते सजा निलंबित करने की मांग की थी।

हाईकोर्ट ने कहा- यह गैर इरादतन हत्या का मामला नहीं

अपराध में अधिकतम सजा 5 वर्ष की थी और याची 2 साल 10 माह की सजा काट चुका था, ऐसे में हाईकोर्ट ने याची की सजा को निलंबित कर दिया था। हाईकोर्ट ने अपील पर अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि याची ने किसी हथियार का इस्तेमाल नहीं किया था और न ही उसे पता था कि उस वार से विजय कुमार की मौत हो जाएगी। यह गैर-इरादतन हत्या का मामला नहीं बनता, बल्कि गंभीर हमले और चोट पहुंचाने का मामला बनता है। ऐसे में हाईकोर्ट ने 5 साल की सजा के आदेश को रद्द कर दिया और याची को 1 साल की सजा सुनाई क्योंकि याची 2 साल 10 माह की सजा पहले ही काट चुका है तो ऐसे में हाईकोर्ट ने उसकी काटी गई सजा को ही काफी मानते हुए उसे रिहा करने का आदेश दिया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed