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World Heritage Day: चंडीगढ़ के हेरिटेज स्कूल हैं शानदार, रैंप और ओपन थिएटर जैसी चीजें बनाती हैं इन्हें खास
Tue, 18 Apr 2023 02:50 PM IST
निवेदिता वर्मा
प्रियंका ठाकुर, संवाद न्यूज, चंडीगढ़
प्रियंका ठाकुर, संवाद न्यूज, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 18 Apr 2023 02:50 PM IST
सार
चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर की एसोसिएट प्रोफेसर दीपिका गांधी ने बताया कि शहर के निर्माताओं ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया था। इसलिए सेक्टरों के बीच में स्कूलों के लिए जगह दी गई थी जिससे वह सभी की पहुंच में हो।
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चंडीगढ़ सेक्टर 18 के सरकारी स्कूल में बना कॉरिडोर।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
विश्व धरोहर दिवस पर जब विरासत की बात चलती है तो चंडीगढ़ के सरकारी हेरिटेज स्कूलों का नाम भी लिया जाता है। इनमें भारतीय शिक्षा पद्धति और आधुनिक वास्तुकला का बेजोड़ संगम देखने को मिलता है। देश के विभाजन के बाद चंडीगढ़ शहर के निर्माण का अहम उद्देश्य पश्चिम पंजाब की आबादी को बसाना था।
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नया शहर बसने के बाद यहां से लोग पलायन न करें और उन्हें सभी सुविधाएं मिलें इसलिए शहर की प्रारंभिक योजना में ही स्कूलों को शामिल किया गया था। उस समय के वास्तुकारों द्वारा बनाए आज आठ स्कूल विरासत केंद्र हैं, जिनकी संरचना में भारतीय संस्कृति और आधुनिक वास्तुकला झलकती है। रैंप, खुली जगह, ओपन थिटर आदि खासियत इन स्कूलों को विरासत का दर्जा देती हैं।
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चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर की एसोसिएट प्रोफेसर दीपिका गांधी ने बताया कि शहर के निर्माताओं ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया था। इसलिए सेक्टरों के बीच में स्कूलों के लिए जगह दी गई थी जिससे वह सभी की पहुंच में हो। पीयरे जेनरे, जेन ड्रियू और मैक्सवेल फ्राय जैसे वास्तुकार द्वारा डिजाइन किए स्कूलों में भारतीय संस्कृति और मॉडर्न वास्तुकला का मिश्रण दिखता है।
भारतीय शिक्षा प्रणाली के अनुसार खुले में पढ़ाने की पद्धति को बरकरार रखते हुए स्कूल में बड़ी-बड़ी कक्षाएं बनाई गई थी और ओपन स्पेस रखे गए थे। नर्सरी स्कूल की इमारतें एक मंजिला और बड़ी कक्षाओं को दो मंजिला बनाया गया था। स्कूलों में रैंप बनाए गए थे जिनकी अहमियत आज समावेशी शिक्षा में साफ दिखती है।
जेन ड्रियू द्वारा डिजाइन की सेक्टर-18 की स्कूल बिल्डिंग में ओपन एयर थिएटर बनाया गया था जहां आज भी बच्चों की प्रात: कालीन सभा होती है। सभी कक्षाओं में हवा के संचालन और रोशनी के लिए पर्याप्त मात्रा में खिड़कियां बनाई गई हैं। वास्तुकार पीयरे जेनरे ने स्कूल की दीवारों में पाइथागोरस प्रमेय, पृथ्वी का चित्र बना इमारतों को अलग रूप दिया है। अन्य विरासत केंद्रों के समान इन स्कूलों की इमारतों में भी पत्थर की दीवार बनाई गई है जो कम बजट में खूबसूरती की मिसाल कायम करती है।
चंडीगढ़ के इन स्कूलों की इमारत है विरासत केंद्र में सम्मिलित
चंडीगढ़ की हेरिटेज एक्सपर्ट कमेटी द्वारा शहर के आठ स्कूलों को विरासत केंद्र का दर्जा दिया गया है। इनमें गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर- 10, गवर्नमेंट स्कूल सेक्टर-15, गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर-16, गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर- 18, गवर्नमेंट हाई स्कूल सेक्टर-19, गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर-21, गवर्नमेंट जूनियर मॉडल स्कूल सेक्टर-22 और गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर-23 शामिल हैं।