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हाईकोर्ट की टिप्पणी: सहमति संबंध में रह रही लड़की नाबालिग है, केवल इस आधार पर सुरक्षा से नहीं कर सकते इनकार
Fri, 29 Sep 2023 01:02 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 29 Sep 2023 01:02 PM IST
सार
हाईकोर्ट ने कहा कि हम रिश्ते की वैधता के मामले में नहीं जाना चाहते क्योंकि याची ने सांविधानिक अधिकार की रक्षा करने की अपील की है, रिश्ते पर मुहर लगाने की नहीं। जब सुरक्षा मांगने वाले बालिग न हों तो अदालतों को उनके संरक्षक के रूप में आगे आना चाहिए।
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Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
- फोटो : File Photo
विस्तार
कानूनन विवाह योग्य उम्र न होने के चलते सहमति संबंध में रह रहे प्रेमी जोड़े की सुरक्षा से जुड़ी याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि लड़की नाबालिग है, केवल इस आधार पर उन्हें सुरक्षा से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत इस रिश्ते की वैधता पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहती लेकिन संविधान का अनुच्छेद 21 प्रत्येक नागरिक को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार देता है जिसका न्यायालय रक्षक है।
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चंडीगढ़ के प्रेमी जोड़े ने हाईकोर्ट में सुरक्षा की मांग को लेकर याचिका दाखिल की थी। याचिका में हाईकोर्ट को बताया गया कि किशोरी की आयु 16 साल है, जबकि युवक 19 साल का है। दोनों की आयु विवाह योग्य नहीं है और ऐसे में वह सहमति संबंध में रह रहे हैं। दोनों ने अपने घर वालों से जान का खतरा बताया था और न्यायालय से अपील की थी कि उन्हें सुरक्षा मुहैया करवाई जाए।
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हाईकोर्ट ने कहा कि हम रिश्ते की वैधता के मामले में नहीं जाना चाहते क्योंकि याची ने सांविधानिक अधिकार की रक्षा करने की अपील की है, रिश्ते पर मुहर लगाने की नहीं। जब सुरक्षा मांगने वाले बालिग न हों तो अदालतों को उनके संरक्षक के रूप में आगे आना चाहिए और जीवन व स्वतंत्रता की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश जारी करना चाहिए।
पॉक्सो अधिनियम नाबालिग के साथ यौन संबंधों को दंडित करने का प्रावधान रखता है लेकिन यह संविधान के अनुच्छेद 21 के विपरीत नहीं चलता है। कोर्ट ने जोड़े को एसएसपी के पास सुरक्षा की मांग को लेकर पेश होने का भी आदेश दिया। कोर्ट ने चंडीगढ़ के एसएसपी को आदेश दिया कि वह इस जोड़े की सुरक्षा की मांग पर विचार कर उचित निर्णय लें।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि जब कोई नाबालिग पुलिस सुरक्षा के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाता है, तो अदालत ऐसे मामलों में बाल कल्याण समिति को शामिल करती है। समिति नाबालिग के भोजन और आवास के संबंध में उचित निर्णय लेने की जिम्मेदारी संभालती है।