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घन घनाघन घनघोर... से प्राचीन कला केंद्र में बांधा समा
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प्राचीन कला केन्द्र में कार्यक्रम अमृत महोत्सव के दौरान अपनी प्रस्तुति देते डॉ. निवेदिता सिंह।
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चंडीगढ़। प्राचीन कला केंद्र की ओर से शुक्रवार शाम को संगीत महोत्सव के पांचवें दिन आयोजित कार्यक्रम में शास्त्रीय गायिका डॉ. निवेदिता सिंह ने समा बांधा। डॉ. निवेदिता ने कार्यक्रम की शुरुआत राग मेघ से की।
इन्होंने आलाप के बाद विलम्बित ख्याल तीन ताल से सजी बंदिश ए बरखा ऋ तु पेश की। द्रुत तीन ताल में निबद्ध रचना घन घनाघन घनघोर... से सभागार को संगीतमय बनाया। इसके उपरांत एक ताल में मौसम अनुरूप ए ऋ तु बरसन की पेश की। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने राग देस में रचना पेश कर तालियां बटोरीं।
डॉ. निवेदिता के साथ तबले पर जयदेव और हारमोनियम पर सीमा कौर ने संगत की। डॉ. निवेदिता ने संगीत की शिक्षा प्रो. तारा सिंह से प्राप्त की। इसके बाद प्रोफेसर अजीतपाल सिंह और पंडित गणेश प्रसाद शर्मा से भी संगीत की बारीकियां सीखीं। वह पटियाला यूनिवर्सिटी में संगीत और गायन के प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। केंद्र की ओर से ऑफलाइन कार्यक्रम के साथ इसे सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म पर भी प्रसारित किया गया।
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इन्होंने आलाप के बाद विलम्बित ख्याल तीन ताल से सजी बंदिश ए बरखा ऋ तु पेश की। द्रुत तीन ताल में निबद्ध रचना घन घनाघन घनघोर... से सभागार को संगीतमय बनाया। इसके उपरांत एक ताल में मौसम अनुरूप ए ऋ तु बरसन की पेश की। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने राग देस में रचना पेश कर तालियां बटोरीं।
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डॉ. निवेदिता के साथ तबले पर जयदेव और हारमोनियम पर सीमा कौर ने संगत की। डॉ. निवेदिता ने संगीत की शिक्षा प्रो. तारा सिंह से प्राप्त की। इसके बाद प्रोफेसर अजीतपाल सिंह और पंडित गणेश प्रसाद शर्मा से भी संगीत की बारीकियां सीखीं। वह पटियाला यूनिवर्सिटी में संगीत और गायन के प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। केंद्र की ओर से ऑफलाइन कार्यक्रम के साथ इसे सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म पर भी प्रसारित किया गया।
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