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एक्सक्लूसिवः भूकंप को लेकर भू-वैज्ञानिकों का बड़ा खुलासा

Mon, 27 Apr 2015 11:55 AM IST
संतोष सिंह/अमर उजाला, कानपुर/चंडीगढ़
संतोष सिंह/अमर उजाला, कानपुर/चंडीगढ़ Updated Mon, 27 Apr 2015 11:55 AM IST
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Geologists reveal big secret about earthquake

हिमालयन क्षेत्र में भूकंप का बड़ा खतरा है। इसका खुलासा आईआईटी कानपुर के शोध से हुआ है। कई सालों के शोध से पता चला है कि चंडीगढ़, पिंजौर और तकसाल के आसपास वीक (कमजोर) जोन हैं। यहां भूकंप के एक्टिव फाल्ट हैं जिससे जमीन के निचले हिस्से पर जबरदस्त प्रेशर बना है। यह प्रेशर जब भी रिलीज होगा, भूकंप आएगा। इससे हिमालयन क्षेत्र में भारी तबाही की आशंका है।

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आईआईटी में सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रोफेसर और भू-विज्ञानी प्रो. जावेद एन मलिक ने हिमालयन शृंखला में भूकंप की संभावना पर शोध किया। वर्ष 2001-2010 तक काम किया, फिर चंडीगढ़ सहित तीन स्थानों पर भूकंप आने के संकेत दिए। राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय जनरल में रिसर्च पेपर भी प्रकाशित कराया।
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प्रो. जावेद ने बताया कि हिमालयन क्षेत्र में 10 हजार साल पहले की गतिविधि अभी बनी है। हिमालय हर साल एक मिलीमीटर बढ़ रहा है। साल भर में बंगलूरू और तिब्बती प्लेट की आंतरिक दूरी 50 मिलीमीटर कम हो रही है। हालांकि बंगलूरू की तरफ से पांच मिलीमीटर प्लेट जाती है। इसके बावजूद हिमालयन शृंखला में 20 मिलीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जो कि खतरनाक संकेत हैं।

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वैज्ञानिक का दावा निकला झूठा

Geologists reveal big secret about earthquake

नेपाल और बिहार रीजन में 1934 में आए विनाशकारी भूकंप के बाद विज्ञानियों ने दावा किया था कि इस क्षेत्र में आगे भूकंप नहीं आएगा। क्योंकि इंडियन और यूरेशियन प्लेट का प्रेशर रिलीज हो चुका है।

इसके तमाम उदाहरण भी दिए गए थे। इसके बावजूद नेपाल-बिहार का यह भूकंप आया है। 1934 में 11000 लोगों की मौत हुई थी। इस बार भी संख्या ज्यादा है। आईआईटी के विज्ञानी का कहना है कि भूकंप का केंद्र कभी-कभी बदलता है।

ऐसा नहीं है कि जिस केंद्र पर भूकंप आया है, वहां प्लेट फिर आपस में नहीं टकराएंगी। इसलिए विज्ञानियों ने भूकंप न आने का जो दावा किया था। इसके लिए तमाम उदाहरण दिए थे, वह सही नही हैं।

35एमएम बदली चंडीगढ़ की सतह

Geologists reveal big secret about earthquake

प्रो. जावेद ने बताया कि सेटेलाइट डाटा और हाई रेजोल्यूशन कैमरे की मदद से चंडीगढ़ की जमीनी हकीकत देखी गई। इससे पता चला कि चंडीगढ़ में जमीन की सतह 35 मिलीमीटर बदली है।

चंडीगढ़ से 20 किलोमीटर आगे पिंजौर में जमीन की सतह 6-12 मीटर बदल चुकी है। शिमला में कालका के पास तकसाल फाल्ट का अध्ययन किया गया है। यहां जमीन का मूवमेंट अलग तरह से दिखाई पड़ रहा है।

जमीनी प्लेट ऊपर, नीचे या फिर एक दूसरे से भिड़ने की स्थिति में है। दबाव भी बना है। ऐसे में भूकंप आ सकता है। आईआईटी के विज्ञानी ने कहा कि हिमालयन शृंखला में शोध की जरूरत है। इसका प्रस्ताव मिनिस्ट्री ऑफ अर्थ साइंस को भेजा जा चुका है।

शोध से भूकंप कब आएगा और कितना नुकसान होगा, इसका आकलन किया जा सकता है। ऐसा हुआ तो जनहानि से बचा जा सकेगा। प्राकृतिक आपदा से निपटने का खाका पहले तैयार किया जा सकेगा।

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