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पीजीआई में 'अमृत' के नाम पर चल रहा खेल और लूटे जा रहे मरीज, अफसरों तक पहुंचा मामला
Thu, 09 Jan 2020 11:34 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 09 Jan 2020 11:34 AM IST
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पीजीआई चंडीगढ़
- फोटो : फाइल फोटो
पीजीआई चंडीगढ़ के आधुनिक बाल चिकित्सा केंद्र में 'अमृत' नाम से चलाई जा रही दवा की दुकान में आवंटित नाम बदलने का मामला सामने आया है। पीजीआई के दस्तावेज में दुकान को टेंडर के समय अमृता चाइल्ड केयर नाम से आवंटन किया गया था जबकि इसे बदलकर शिव अमृत बेबी केयर कर दिया गया है।
अमृता का अमृत होने के बाद दुकान पर प्रधानमंत्री की फोटो और 80 प्रतिशत तक छूट देने की बात कहकर मरीजों और उनके परिजनों को भ्रमित किया जा रहा है जबकि स्थिति ठीक इससे उलट है। यहां मरीजों को छूट के नाम पर बाहर के रेट पर ही दवाएं बेची जा रही हैं।
दुकान अलॉट करने की प्रक्रिया में सबसे पहले पीजीआई प्रशासन आवेदक को एक चिह्नित स्थान देता है। उस समय दुकान के लिए प्रस्तावित नाम भी पूछा जाता है। उसके बाद आवेदक एक फर्म बनाता है। उस फर्म के बनने के बाद ड्रग लाइसेंस लेने की प्रक्रिया होती है।
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लाइसेंस मिलने के बाद जीएसटी नंबर आवंटित करने की प्रक्रिया में दुकान के बोर्ड की फोटो जमा करना अनिवार्य होता है। उस दौरान भी पीजीआई बदले गए नाम पर ध्यान नहीं देता, न ही दुकान खुलने के बाद कोई सर्वे करता है, जिसका फायदा उठाकर अमृता का अमृत करने का काम धड़ल्ले से किया जा रहा है।
अलॉट किए गए नाम में इस तरह से फेरबदल कराने वालों पर अब पीजीआई शिकंजा कसने की तैयारी में है। इस बार नए मानक तय किए गए हैं, जिससे नाम बदलने जैसी स्थिति ही उत्पन्न नहीं होगी।
- प्रो. अशोक कुमार, पीजीआई प्रवक्ता
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अमृता का अमृत होने के बाद दुकान पर प्रधानमंत्री की फोटो और 80 प्रतिशत तक छूट देने की बात कहकर मरीजों और उनके परिजनों को भ्रमित किया जा रहा है जबकि स्थिति ठीक इससे उलट है। यहां मरीजों को छूट के नाम पर बाहर के रेट पर ही दवाएं बेची जा रही हैं।
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दुकान अलॉट करने की प्रक्रिया में सबसे पहले पीजीआई प्रशासन आवेदक को एक चिह्नित स्थान देता है। उस समय दुकान के लिए प्रस्तावित नाम भी पूछा जाता है। उसके बाद आवेदक एक फर्म बनाता है। उस फर्म के बनने के बाद ड्रग लाइसेंस लेने की प्रक्रिया होती है।
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लाइसेंस मिलने के बाद जीएसटी नंबर आवंटित करने की प्रक्रिया में दुकान के बोर्ड की फोटो जमा करना अनिवार्य होता है। उस दौरान भी पीजीआई बदले गए नाम पर ध्यान नहीं देता, न ही दुकान खुलने के बाद कोई सर्वे करता है, जिसका फायदा उठाकर अमृता का अमृत करने का काम धड़ल्ले से किया जा रहा है।
अलॉट किए गए नाम में इस तरह से फेरबदल कराने वालों पर अब पीजीआई शिकंजा कसने की तैयारी में है। इस बार नए मानक तय किए गए हैं, जिससे नाम बदलने जैसी स्थिति ही उत्पन्न नहीं होगी।
- प्रो. अशोक कुमार, पीजीआई प्रवक्ता