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Chandigarh News: आदेश के बावजूद नहीं दर्ज हुई एफआईआर, डीजीपी को अवमानना नोटिस
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-एडीजीपी हिसार रेंज की जांच रिपोर्ट पर हाईकोर्ट ने लगाई फटकार
-आरोपियों पर कार्रवाई के स्थान पर उनका बचाव कर रहे एडीजीपी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। जींद के एसपी को दो लोगों की सुरक्षा का आदेश जारी करने के बाद उनको सुरक्षा के नाम पर कमरे में लॉक करने और भोजन, पानी व बिस्तर आदि मूलभूत जरूरतों से वंचित करने के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने प्रदेश के डीजीपी को कड़ी फटकार लगाई है। इस मामले में गैर जमानती धाराओं वाले आरोप होने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं होने पर हाईकोर्ट ने अवमानना की कार्रवाई को लेकर डीजीपी से जवाब मांगा है। हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए दुर्गई नाथ ने डेरे से जुड़े विवाद के चलते सुरक्षा की गुहार लगाई थी। हाईकोर्ट ने मामले में एसपी को याची के जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया था। एसएचओ ने याची को महिला कांस्टेबल व महंत नंदई नाथ को पुरुष कांस्टेबल सुरक्षा में दिया और एक कमरे में बंद कर दिया। दोनों ने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल करते हुए बताया कि उन्हें उस कमरे में भोजन व पानी तक नहीं दिया जा रहा है। हाईकोर्ट ने अब इस मामले की जांच करने का हरियाणा के डीजीपी को आदेश दिया है। इसके लिए आईजी स्तर का अधिकारी नियुक्त करना होगा जो आरोपों की जांच करेगा और यदि सत्यता पाई गई तो जरूरी कार्रवाई करेगा जिसमें एफआईआर तक शामिल होगी। मामले में एडीजीपी हिसार रेंज एम रवि किरण ने जांच रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि याची को लॉकअप में नहीं सेफ होम में रखा गया था। याचिकाकर्ता को उनके स्थान से हटा कर नया महंत नियुक्त किया गया था, जो नाथ संप्रदाय के नियमों के अनुसार था। पंचायत ने प्रस्ताव पास कर उन्हें हटाने का निर्णय लिया था। हाईकोर्ट ने कहा कि सेफ होम का कानून में प्रावधान ही नहीं है। जहां तक पंचायत के प्रस्ताव पास करने की बात है तो किसी स्थान पर किसी व्यक्ति का कब्जा कानून के अनुसार ही लिया जा सकता है। आभूषण, नकदी और कागजात गायब हाेने के गंभीर मामले की एडीजीपी ने जांच ही नहीं की। ऐसा प्रतीत होता है कि जिन पर कार्रवाई करनी थी उन्हें बचाने का प्रयास किया गया है। हाईकोर्ट ने अब डीजीपी को इस मामले में अपराध में शामिल लोगों व पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। साथ ही आदेश का पालन न होने पर पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए।
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-आरोपियों पर कार्रवाई के स्थान पर उनका बचाव कर रहे एडीजीपी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। जींद के एसपी को दो लोगों की सुरक्षा का आदेश जारी करने के बाद उनको सुरक्षा के नाम पर कमरे में लॉक करने और भोजन, पानी व बिस्तर आदि मूलभूत जरूरतों से वंचित करने के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने प्रदेश के डीजीपी को कड़ी फटकार लगाई है। इस मामले में गैर जमानती धाराओं वाले आरोप होने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं होने पर हाईकोर्ट ने अवमानना की कार्रवाई को लेकर डीजीपी से जवाब मांगा है। हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए दुर्गई नाथ ने डेरे से जुड़े विवाद के चलते सुरक्षा की गुहार लगाई थी। हाईकोर्ट ने मामले में एसपी को याची के जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया था। एसएचओ ने याची को महिला कांस्टेबल व महंत नंदई नाथ को पुरुष कांस्टेबल सुरक्षा में दिया और एक कमरे में बंद कर दिया। दोनों ने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल करते हुए बताया कि उन्हें उस कमरे में भोजन व पानी तक नहीं दिया जा रहा है। हाईकोर्ट ने अब इस मामले की जांच करने का हरियाणा के डीजीपी को आदेश दिया है। इसके लिए आईजी स्तर का अधिकारी नियुक्त करना होगा जो आरोपों की जांच करेगा और यदि सत्यता पाई गई तो जरूरी कार्रवाई करेगा जिसमें एफआईआर तक शामिल होगी। मामले में एडीजीपी हिसार रेंज एम रवि किरण ने जांच रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि याची को लॉकअप में नहीं सेफ होम में रखा गया था। याचिकाकर्ता को उनके स्थान से हटा कर नया महंत नियुक्त किया गया था, जो नाथ संप्रदाय के नियमों के अनुसार था। पंचायत ने प्रस्ताव पास कर उन्हें हटाने का निर्णय लिया था। हाईकोर्ट ने कहा कि सेफ होम का कानून में प्रावधान ही नहीं है। जहां तक पंचायत के प्रस्ताव पास करने की बात है तो किसी स्थान पर किसी व्यक्ति का कब्जा कानून के अनुसार ही लिया जा सकता है। आभूषण, नकदी और कागजात गायब हाेने के गंभीर मामले की एडीजीपी ने जांच ही नहीं की। ऐसा प्रतीत होता है कि जिन पर कार्रवाई करनी थी उन्हें बचाने का प्रयास किया गया है। हाईकोर्ट ने अब डीजीपी को इस मामले में अपराध में शामिल लोगों व पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। साथ ही आदेश का पालन न होने पर पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए।