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वित्तीय संकट में चंडीगढ़ निगम: प्रशासक कटारिया से पहली बार मिले मेयर कुलदीप, मांगे 200 करोड़ रुपये

Tue, 03 Sep 2024 08:48 PM IST
अंकेश ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: अंकेश ठाकुर Updated Tue, 03 Sep 2024 08:48 PM IST
सार

चंडीगढ़ नगर निगम वित्तीय संकट से गुजर रहा है। वित्तीय संकट से निकलने के लिए चंडीगढ़ के मेयर कुलदीप कुमार ने प्रशासक गुलाबचंद कटारिया से मुलाकात की और उनसे अतिरिक्त 200 करोड़ रुपये की ग्रांड की मांग की है। 

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financial crisis in MC Chandigarh Mayor Kuldeep Kumar demand for Rs 200 crore from Administrator Kataria
चंडीगढ़ के मेयर कुलदीप कुमार। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ के मेयर कुलदीप कुमार ने मंगलवार को पहली बार पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया से पंजाब राजभवन में मुलाकात की। मेयर ने प्रशासक को नगर निगम की वित्तीय स्थिति के बारे में बताया और करीब 200 करोड़ रुपये के अतिरिक्त ग्रांट की मांग की। साथ ही कहा कि निगम वित्तीय संकट में है, इसलिए कुछ ऐसे विभाग दिए जाएं जिससे निगम का राजस्व बढ़ सके। मेयर ने कई अन्य मुद्दे भी उठाए।

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मेयर कुलदीप कुमार ने प्रशासक को बताया कि नगर निगम के पास जितने भी विभाग हैं, उनके खर्च दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। इनमें से अधिकतर लोगों को सेवाएं देने वाले विभाग हैं, जो नो प्रॉफिट-नो लॉस पर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पानी, रेजिडेंशियल और काॅमर्शियल प्रॉपर्टी टैक्स, सामुदायिक केंद्रों की बुकिंग आदि से करीब 323 करोड़ रुपये का राजस्व ही जुटा पाता है, जो पर्याप्त नहीं है।
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उन्होंने बताया कि वर्ष 2023-24 में नगर निगम ने प्रशासन से मिली ग्रांट व अन्य सभी आमदनी के साथ करीब 1042 करोड़ रुपये जुटा पाया था। इसमें चंडीगढ़ प्रशासन से 560 करोड़ रुपये मिले थे। निगम का खर्च करीब 1143 करोड़ रुपये था। निगम करीब 100 करोड़ रुपये के घाटे में था।
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वर्ष 2024-25 में नगर निगम को अतिरिक्त करीब 200 करोड़ रुपये के ग्रांट की जरूरत है क्योंकि एरियर, सैलरी और पेंशन आदि देने हैं। उन्होंने प्रशासक से आग्रह किया कि वह निजी तौर पर इस मामले को देखें और जल्द नगर निगम को ग्रांट जारी की जाए ताकि रुके हुए कामों को पूरा किया जा सके।


शोभायात्रा में लगे बैनर मामले में जुर्माना राशि माफ करने की मांग
वर्ष 2019 में भगवान वाल्मीकि की शोभायात्रा के दौरान लगाए गए बैनर पर नगर निगम की तरफ से करीब 68 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। पिछले काफी समय से इस जुर्माने को माफ करने की मांग की जा रही है। मेयर ने प्रशासक को बताया कि यह शोभायात्रा कोई व्यावसायिक कार्यक्रम नहीं था बल्कि एक धार्मिक कार्यक्रम था। इससे पहले कभी भी किसी शोभायात्रा में आयोजन पर ऐसे नोटिस नहीं भेजे गए थे। उन्होंने प्रशासक से मांग की है कि वह इस मामले में दखल दें और निगम के विभाग के प्रमुख से इस नोटिस को वापस लेने के आदेश जारी करें। मेयर ने इसके अलावा चंडीगढ़ नगर निगम में आउटसोर्सिंग पर रखे जा रहे कर्मचारियों का मुद्दा भी उठाया और कहा कि इसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए, क्योंकि नगर निगम का काफी पैसा इन कर्मचारियों को ही वेतन देने में खर्च हो रहा है।

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