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Chandigarh News: आखिरकार मनीमाजरा में 24 घंटे पानी सप्लाई प्रोजेक्ट की जांच शुरू
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चंडीगढ़। मनीमाजरा में 24 घंटे पानी सप्लाई प्रोजेक्ट की जांच आखिरकार शुरू हो गई है। नई दिल्ली से आई केंद्रीय टीम मंगलवार को पूरे दिन जांच में जुटी रही। पहले ही दिन टीम ने कागजों से लेकर मैदान तक, हर स्तर पर हालात का जायजा लिया।
सूत्रों के मुताबिक जांच टीम सबसे पहले नगर निगम कार्यालय पहुंची, जहां नगर आयुक्त से मुलाकात कर प्रारंभिक जानकारी ली गई। इसके बाद मनीमाजरा में साइट पर जाकर टीम ने प्रोजेक्ट की वास्तविक स्थिति देखी और फिर स्मार्ट सिटी कार्यालय पहुंचकर संबंधित फाइलें मांगी। टीम ने इस प्रोजेक्ट से जुड़े जेई, एसडीओ और एक्सईएन को भी बुलाया। सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक जांच जारी रही। कुछ आवश्यक फाइलें टीम तक नहीं पहुंच पाई हैं जिनकी मांग भी कर दी गई है। टीम 14 नवंबर तक प्रोजेक्ट की ऑडिट रिपोर्ट तैयार करेगी।
75 करोड़ का प्रोजेक्ट बना विवाद का केंद्र
करीब 75 करोड़ की लागत से बना यह प्रोजेक्ट पूरी तरह सफल नहीं हो सका। लगातार आ रही शिकायतों के बाद अब केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश पर इसका ऑडिट हो रहा है। इस मुद्दे पर नगर निगम सदन से लेकर संसद तक सवाल उठ चुके हैं।
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सांसद मनीष तिवारी ने उठाई थी आवाज
सांसद मनीष तिवारी ने इस प्रोजेक्ट पर सवाल खड़े करते हुए केंद्र को पत्र लिखा था। उन्होंने कहा था कि भारी खर्च के बावजूद प्रोजेक्ट की कार्यकुशलता संतोषजनक नहीं रही। इसके बाद 4 अगस्त 2024 को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ऑडिट की मंजूरी दी थी। अब टीम चार दिन तक जांच कर अपनी रिपोर्ट केंद्र को भेजेगी।
अगले चरण में होगी पूछताछ और तकनीकी जांच
ऑडिट टीम आने वाले दिनों में स्मार्ट सिटी लिमिटेड, नगर निगम इंजीनियरों और अन्य संबंधित अधिकारियों से सीधी बातचीत करेगी। टीम वॉटर मीटरिंग सिस्टम, पाइपलाइन, सप्लाई कंट्रोल, पानी की गुणवत्ता और खर्च के दस्तावेजों की भी बारीकी से जांच करेगी। जांच में यह मुख्य रूप से देखा जाएगा कि सातों दिन 24 घंटे पानी सप्लाई का दावा वास्तव में कितना सही साबित हुआ। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, कई जगह पाइपलाइन लीकेज, मीटरिंग गड़बड़ी और खर्च में पारदर्शिता की कमी जैसे मुद्दे सामने आए हैं।
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सूत्रों के मुताबिक जांच टीम सबसे पहले नगर निगम कार्यालय पहुंची, जहां नगर आयुक्त से मुलाकात कर प्रारंभिक जानकारी ली गई। इसके बाद मनीमाजरा में साइट पर जाकर टीम ने प्रोजेक्ट की वास्तविक स्थिति देखी और फिर स्मार्ट सिटी कार्यालय पहुंचकर संबंधित फाइलें मांगी। टीम ने इस प्रोजेक्ट से जुड़े जेई, एसडीओ और एक्सईएन को भी बुलाया। सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक जांच जारी रही। कुछ आवश्यक फाइलें टीम तक नहीं पहुंच पाई हैं जिनकी मांग भी कर दी गई है। टीम 14 नवंबर तक प्रोजेक्ट की ऑडिट रिपोर्ट तैयार करेगी।
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75 करोड़ का प्रोजेक्ट बना विवाद का केंद्र
करीब 75 करोड़ की लागत से बना यह प्रोजेक्ट पूरी तरह सफल नहीं हो सका। लगातार आ रही शिकायतों के बाद अब केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश पर इसका ऑडिट हो रहा है। इस मुद्दे पर नगर निगम सदन से लेकर संसद तक सवाल उठ चुके हैं।
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सांसद मनीष तिवारी ने उठाई थी आवाज
सांसद मनीष तिवारी ने इस प्रोजेक्ट पर सवाल खड़े करते हुए केंद्र को पत्र लिखा था। उन्होंने कहा था कि भारी खर्च के बावजूद प्रोजेक्ट की कार्यकुशलता संतोषजनक नहीं रही। इसके बाद 4 अगस्त 2024 को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ऑडिट की मंजूरी दी थी। अब टीम चार दिन तक जांच कर अपनी रिपोर्ट केंद्र को भेजेगी।
अगले चरण में होगी पूछताछ और तकनीकी जांच
ऑडिट टीम आने वाले दिनों में स्मार्ट सिटी लिमिटेड, नगर निगम इंजीनियरों और अन्य संबंधित अधिकारियों से सीधी बातचीत करेगी। टीम वॉटर मीटरिंग सिस्टम, पाइपलाइन, सप्लाई कंट्रोल, पानी की गुणवत्ता और खर्च के दस्तावेजों की भी बारीकी से जांच करेगी। जांच में यह मुख्य रूप से देखा जाएगा कि सातों दिन 24 घंटे पानी सप्लाई का दावा वास्तव में कितना सही साबित हुआ। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, कई जगह पाइपलाइन लीकेज, मीटरिंग गड़बड़ी और खर्च में पारदर्शिता की कमी जैसे मुद्दे सामने आए हैं।