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Chandigarh: कटे हाथ के ऑपरेशन में अब नहीं होगा असहनीय दर्द, नसों को ब्लॉक कर किया जा रहा इलाज
Thu, 01 Jun 2023 07:56 AM IST
निवेदिता वर्मा
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 01 Jun 2023 07:56 AM IST
सार
शोध से दर्द से बचाव का उपाय निकालने वाली एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. काजल जैन ने बताया कि इस शोध में एक महीने के दौरान पीजीआई के ट्रामा सेंटर में आए ऐसे 80 घायलों को शामिल किया गया। उन्हें दो वर्गों में बांटकर इसका असर जांचा गया।
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pgi chandigarh
विस्तार
चंडीगढ़ पीजीआई के ट्रॉमा सेंटर में कटे हाथ वाले घायलों को अब असहनीय दर्द नहीं झेलना पड़ेगा। संस्थान के एनेस्थीसिया विभाग के विशेषज्ञों ने इस दर्द को दूर करने का उपाय तलाश लिया है।
अब हाथ कटे वाले घायलों को सर्जरी से पहले तक दर्द से बचाव के लिए ओरल या आईवी देना बंद कर दिया गया है। इसकी जगह अब उनके ब्रैकियल प्लेक्सस यानी दर्द उत्पन्न करने वाली नसों को ही ब्लॉक कर दिया जा रहा है। ऐसा करने से उन्हें दर्द की अनुभूति नहीं हो पा रही और वे अपनी बारी आने तक आराम से इंतजार कर पा रहे हैं।
यह भी पढ़ें: Chandigarh: ऑफलाइन सेवाओं के लिए आज से समय मिलेगा कम, RLA में ऑनलाइन सेवाओं को ही प्राथमिकता
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शोध से दर्द से बचाव का उपाय निकालने वाली एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. काजल जैन ने बताया कि इस शोध में एक महीने के दौरान पीजीआई के ट्रामा सेंटर में आए ऐसे 80 घायलों को शामिल किया गया। उन्हें दो वर्गों में बांटकर इसका असर जांचा गया। पहले ग्रुप में रखे गए 40 घायलों के ट्रामा सेंटर में आने पर उनके ब्रैकियल प्लेक्सस में इंजेक्शन दिया गया जबकि दूसरे ग्रुप में शामिल 40 घायलों को पहले की तरह दवा की गोली और आईवी के जरिए दर्द निवारक दिया गया। जिन घायलों की नसों में इंजेक्शन दिया गया उन्हें दर्द से राहत मिली, जबकि दूसरे वर्ग में शामिल घायल दर्द निवारक दवा लेने के बावजूद पीड़ा में थे।
ट्रॉमा में लंबा इंतजार भी हुआ आसान
पीजीआई ट्रॉमा सेंटर चंडीगढ़ के साथ ही पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के रेफरल सेंटर हैं। ऐसे में वहां प्रतिदिन 20 से 25 मामले आ रहे हैं। ट्रॉमा के केस में सभी की स्थिति गंभीर होती है, लेकिन रेफरल के अनुसार संसाधन उपलब्ध न होने से उन्हें दो से तीन दिन तक सर्जरी का इंतजार करना पड़ता है। उस स्थिति में उन्हें दर्द को सहते हुए घाव की ड्रेसिंग, एक्स-रे और दूसरी जरूरी चीजें करानी पड़ती है। उस दौरान होने वाले दर्द को कम करने के लिए ही नसों में इंजेक्शन देने की योजना बनाई गई। अब वे बड़े आराम से दो से तीन दिन तक इंतजार कर लेते हैं।
सर्जरी के बाद दर्द खत्म
डॉ. काजल जैन ने बताया कि सामान्य की बजाय जिन लोगों की ब्रैकियल प्लेक्सस नसों को ब्लॉक किया गया था उनमें परसीस्टेंट पोस्ट सर्जिकल पेन यानपी सर्जरी के बाद होने वाले दर्द की शिकायत भी खत्म हो गई जबकि दूसरे वर्ग में शामिल लोग सर्जरी के महीनों बाद तक दर्द की शिकायत करते रहे।
ब्रैकियल प्लेक्सस इसलिए महत्वपूर्ण
ब्रैकियल प्लेक्सस नसों का नेटवर्क है जो रीढ़ की हड्डी से हमारे कंधे और हाथ तक सिग्नल भेजता है। ब्रैकियल प्लेक्सस गर्दन से कांख तक जाता है। ब्रैकियल प्लेक्सस चोट की गति की सीमा को सीमित कर सकती हैं। ठीक वैसे ही यह गर्दन, कंधे, बांह, कलाई या हाथ में दर्द पैदा कर सकती हैं।
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अब हाथ कटे वाले घायलों को सर्जरी से पहले तक दर्द से बचाव के लिए ओरल या आईवी देना बंद कर दिया गया है। इसकी जगह अब उनके ब्रैकियल प्लेक्सस यानी दर्द उत्पन्न करने वाली नसों को ही ब्लॉक कर दिया जा रहा है। ऐसा करने से उन्हें दर्द की अनुभूति नहीं हो पा रही और वे अपनी बारी आने तक आराम से इंतजार कर पा रहे हैं।
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शोध से दर्द से बचाव का उपाय निकालने वाली एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. काजल जैन ने बताया कि इस शोध में एक महीने के दौरान पीजीआई के ट्रामा सेंटर में आए ऐसे 80 घायलों को शामिल किया गया। उन्हें दो वर्गों में बांटकर इसका असर जांचा गया। पहले ग्रुप में रखे गए 40 घायलों के ट्रामा सेंटर में आने पर उनके ब्रैकियल प्लेक्सस में इंजेक्शन दिया गया जबकि दूसरे ग्रुप में शामिल 40 घायलों को पहले की तरह दवा की गोली और आईवी के जरिए दर्द निवारक दिया गया। जिन घायलों की नसों में इंजेक्शन दिया गया उन्हें दर्द से राहत मिली, जबकि दूसरे वर्ग में शामिल घायल दर्द निवारक दवा लेने के बावजूद पीड़ा में थे।
ट्रॉमा में लंबा इंतजार भी हुआ आसान
पीजीआई ट्रॉमा सेंटर चंडीगढ़ के साथ ही पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के रेफरल सेंटर हैं। ऐसे में वहां प्रतिदिन 20 से 25 मामले आ रहे हैं। ट्रॉमा के केस में सभी की स्थिति गंभीर होती है, लेकिन रेफरल के अनुसार संसाधन उपलब्ध न होने से उन्हें दो से तीन दिन तक सर्जरी का इंतजार करना पड़ता है। उस स्थिति में उन्हें दर्द को सहते हुए घाव की ड्रेसिंग, एक्स-रे और दूसरी जरूरी चीजें करानी पड़ती है। उस दौरान होने वाले दर्द को कम करने के लिए ही नसों में इंजेक्शन देने की योजना बनाई गई। अब वे बड़े आराम से दो से तीन दिन तक इंतजार कर लेते हैं।
सर्जरी के बाद दर्द खत्म
डॉ. काजल जैन ने बताया कि सामान्य की बजाय जिन लोगों की ब्रैकियल प्लेक्सस नसों को ब्लॉक किया गया था उनमें परसीस्टेंट पोस्ट सर्जिकल पेन यानपी सर्जरी के बाद होने वाले दर्द की शिकायत भी खत्म हो गई जबकि दूसरे वर्ग में शामिल लोग सर्जरी के महीनों बाद तक दर्द की शिकायत करते रहे।
ब्रैकियल प्लेक्सस इसलिए महत्वपूर्ण
ब्रैकियल प्लेक्सस नसों का नेटवर्क है जो रीढ़ की हड्डी से हमारे कंधे और हाथ तक सिग्नल भेजता है। ब्रैकियल प्लेक्सस गर्दन से कांख तक जाता है। ब्रैकियल प्लेक्सस चोट की गति की सीमा को सीमित कर सकती हैं। ठीक वैसे ही यह गर्दन, कंधे, बांह, कलाई या हाथ में दर्द पैदा कर सकती हैं।