वनपाल व वन रक्षक की भर्ती में महिला अभ्यर्थियों का अपमान.. सीने की माप देने की शर्त पर विवाद
- वनपाल के लिए 6 और वन रक्षक के लिए 14 पदों पर होनी है भर्ती
- शारीरिक परीक्षण के दौरान 5 सेंटीमीटर सीना फुलाने की शर्त भी रखी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
चंडीगढ़ प्रशासन के वन विभाग ने वनपाल और वन रक्षक की भर्ती निकाली है। विभाग ने नौकरी के लिए जो विज्ञापन दिया है, उसे लेकर महिला अभ्यर्थियों में खलबली मच गई है। भर्ती सूचना के अनुसार, इन दोनों पदों पर पुरुष के साथ महिला अभ्यर्थियों को भी सीने का माप देना होगा। सीने का माप न्यूनतम 74 सेमी होना जरूरी है। इसके साथ ही सीना फुलाकर 5 सेमी के अंतर के साथ माप को 79 सेंटीमीटर अनिवार्य किया गया है।
यूटी प्रशासन की तरफ से 28 सितंबर को एक जनसूचना जारी की गई, जिसमें वनपाल के लिए कुल 6 जबकि वन रक्षक के लिए कुल 14 पदों पर भर्ती निकाली गई। दोनों पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया 29 सितंबर से शुरू हो गई है, जो 20 अक्तूबर तक चलेगी। इन दोनों पदों के लिए आवेदनकर्ता की उम्र 18 से 37 साल के बीच होनी चाहिए।
विभाग की तरफ से जारी भर्ती सूचना के तीसरे पन्ने यानी महिलाओं के सीने की माप को लेकर विरोध देखा जा रहा है। शारीरिक मापदंड के इस नियम से परीक्षा की तैयारियों में जुटी महिला अभ्यर्थियों को काफी निराशा है। महिला अभ्यर्थियों का कहना है कि डीएसपी स्तर की भर्ती परीक्षाओं के दौरान शारीरिक मापदंड में सीने की माप नहीं ली जाती। इसके अलावा कुछ साल पहले हुई चंडीगढ़ पुलिस की भर्ती में भी ऐसे नियम नहीं थे लेकिन वन विभाग ने वनपाल और वन रक्षक के विभिन्न पदों की भर्ती में इस शर्त को जोड़ दिया है।
आवेदन के लिए ये योग्यताएं जरूरी
वनपाल के पद के लिए किसी भी बोर्ड से फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ, बायोलॉजी, एग्रीकल्चर में से दो विषयों में 12वीं पास होना चाहिए। वन रक्षक पद के लिए 12वीं पास होना चाहिए। महिलाओं की ऊंचाई 150 सेमी व सीने की माप न्यूनतम 74 सेमी होनी जरूरी है। इसके साथ ही सीना फुलाकर 5 सेमी का अंतर भी जरूरी है। इसके साथ 4 घंटे में 14 किमी पैदल चाल भी शामिल है। पुरुषों के लिए 4 घंटे में 25 किमी की पैदल चाल जरूरी है।
केंद्रीय महिला आयोग से होगी शर्त हटाने की मांग
समस्या समाधान टीम के मनोज शुक्ला ने कहा कि वह रविवार को इस नियम के खिलाफ केंद्रीय महिला आयोग, महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी, केंद्रीय वन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, सांसद किरण खेर और प्रशासक को पत्र लिखेंगे। टीम की संयुक्त सचिव रवि ज्योति ने कहा कि यह नियम महिलाओं की बेइज्जती करने वाला है।
इससे ज्यादातर महिलाएं भर्ती में आने में संकोच करेंगी और इसका सीधा लाभ पुरुष अभ्यर्थियों को मिलेगा। यह शर्त महिलाओं को सशक्त करने की बजाय महिलाओं को पीछे रखने वाला कदम है। उन्होंने कहा कि एसएससी के तहत केंद्रीय पुलिस बल में भर्ती होने वाली महिलाओं, भारतीय सेना में भर्ती होने वाली महिलाओं और सभी राज्य सरकारों की पुलिस में भर्ती होने वाली महिलाओं के लिए भी ऐसे सीना नापने वाला नियम नहीं है।
भर्ती में ऐसे नियम आपत्तिजनक: बीएल शर्मा
इस मामले पर चंडीगढ़ प्रशासन के कार्मिक विभाग के पूर्व सचिव बीएल शर्मा का कहना है कि यह नियम आपत्तिजनक है और ऐसे नियमों से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर संभव हो तो ऐसे नियम को हटा देने चाहिए। गौरतलब है कि कुछ साल पहले मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के वन विभाग की तरफ से निकाली गईं कुछ भर्तियों में महिलाओं की शारीरिक दक्षता में सीने की माप और फुलाव का जिक्र था। इस पर दोनों राज्यों में काफी बवाल हुआ था। मध्य प्रदेश की महिला आयोग ने भी वहां के वन विभाग को नोटिस भी जारी किया था। इसके अलावा मध्य प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री ने भी इसका विरोध किया था।
वन विभाग के कार्य काफी कठिन होता है। यह दफ्तर में बैठने वाला काम नहीं है, इसलिए कर्मचारियों को पूरी तरह से फिट होना चाहिए। वनपाल और वन रक्षक पद के लिए शारीरिक दक्षता और भी महत्वपूर्ण होती है। वन विभाग की भर्तियों में ऐसे नियम होते हैं। यूपीएसई की भर्ती में भी ऐसे नियम होते हैं। - देबेंद्र दलाई, मुख्य वन संरक्षक, चंडीगढ़ प्रशासन