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Chandigarh News: वित्तीय शक्तियां छीने जाने से ठप पड़े विकास कार्य
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चंडीगढ़। यूटी प्रशासन से अधिकारियों से वित्तीय शक्तियां छीने जाने के बाद पूरे प्रशासनिक तंत्र में अफरा-तफरी का माहौल है। हालत यह है कि पिछले पांच दिनों से एक भी नया टेंडर जारी नहीं हुआ, जिससे विकास कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं। सरकारी घरों की सफेदी, इमारतों की मरम्मत से लेकर अस्पतालों में दवाओं की सप्लाई तक सब कुछ रुक गया है। अधिकारी मंजूरी के अभाव में किसी भी काम को आगे बढ़ाने से साफ इन्कार कर रहे हैं।
पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ने हाल ही में एक आदेश जारी कर यूटी प्रशासन के अधिकारियों से सभी वित्तीय शक्तियां वापस लेकर उन्हें केंद्रीय गृह मंत्रालय को सौंप दिया था। इस आदेश के बाद अब किसी भी विभाग को छोटे से छोटे खर्च या काम के लिए भी गृह मंत्रालय से मंजूरी लेनी अनिवार्य कर दी गई है। इस आदेश के बाद से कई विभागों के काम बंद पड़ गए हैं। प्रशासन की ई-टेंडरिंग वेबसाइट के अनुसार किसी भी काम के लिए आखिरी टेंडर एक अक्तूबर को जारी हुआ था। इसके बाद से अब तक कोई नया टेंडर नहीं लगा। इंजीनियरिंग विभाग के अनुसार जब तक नई मंजूरी प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं मिलते, तब तक जेई, एसडीओ, एक्सईएन और अन्य वरिष्ठ अधिकारी कार्य को आगे बढ़ाने की स्थिति में नहीं हैं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो चंडीगढ़ में विकास कार्यों की रफ्तार पूरी तरह थम सकती है। अधिकारी उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन की तरफ से जल्द कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी होगा ताकि कार्य फिर से सामान्य हो सकें।
त्योहारी सीजन पर भी असर
त्योहारी सीजन में जहां आमतौर पर सरकारी भवनों की मरम्मत, रंग-रोगन और सजावट के काम तेजी से होते हैं। वहीं इस बार सारे काम ठप हैं। शहर के कई सरकारी क्वार्टरों, दफ्तरों और संस्थानों में रूटीन रखरखाव कार्य तक रुके पड़े हैं। नतीजतन कर्मचारियों और आम लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई लोग अधिकारियों को फोन कर पूछताछ कर रहे हैं लेकिन हर जगह से यही जवाब मिल रहा है कि टेंडर नहीं हो रहे हैं, मंजूरी का इंतजार है। असमंजस की वजह से सभी विभागों ने काम रोकना ही उचित समझा है।
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दवाओं की सप्लाई के लिए भी नहीं हो पा रहे नए टेंडर
केवल इंजीनियरिंग नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और समाज कल्याण विभाग पर भी इस आदेश का सीधा असर पड़ा है। प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अस्पतालों में दवाओं की सप्लाई के लिए नए टेंडर नहीं हो पा रहे हैं, जिससे स्टॉक खत्म होने का खतरा बन गया है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आने वाले दिनों में अस्पतालों में दवाओं की कमी जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। अधिकारियों का कहना है कि उन्हें अभी तक यह स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं मिला है कि किन स्तरों के कार्यों के लिए मंत्रालय की अनुमति आवश्यक होगी और किनके लिए नहीं।
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पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ने हाल ही में एक आदेश जारी कर यूटी प्रशासन के अधिकारियों से सभी वित्तीय शक्तियां वापस लेकर उन्हें केंद्रीय गृह मंत्रालय को सौंप दिया था। इस आदेश के बाद अब किसी भी विभाग को छोटे से छोटे खर्च या काम के लिए भी गृह मंत्रालय से मंजूरी लेनी अनिवार्य कर दी गई है। इस आदेश के बाद से कई विभागों के काम बंद पड़ गए हैं। प्रशासन की ई-टेंडरिंग वेबसाइट के अनुसार किसी भी काम के लिए आखिरी टेंडर एक अक्तूबर को जारी हुआ था। इसके बाद से अब तक कोई नया टेंडर नहीं लगा। इंजीनियरिंग विभाग के अनुसार जब तक नई मंजूरी प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं मिलते, तब तक जेई, एसडीओ, एक्सईएन और अन्य वरिष्ठ अधिकारी कार्य को आगे बढ़ाने की स्थिति में नहीं हैं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो चंडीगढ़ में विकास कार्यों की रफ्तार पूरी तरह थम सकती है। अधिकारी उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन की तरफ से जल्द कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी होगा ताकि कार्य फिर से सामान्य हो सकें।
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त्योहारी सीजन पर भी असर
त्योहारी सीजन में जहां आमतौर पर सरकारी भवनों की मरम्मत, रंग-रोगन और सजावट के काम तेजी से होते हैं। वहीं इस बार सारे काम ठप हैं। शहर के कई सरकारी क्वार्टरों, दफ्तरों और संस्थानों में रूटीन रखरखाव कार्य तक रुके पड़े हैं। नतीजतन कर्मचारियों और आम लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई लोग अधिकारियों को फोन कर पूछताछ कर रहे हैं लेकिन हर जगह से यही जवाब मिल रहा है कि टेंडर नहीं हो रहे हैं, मंजूरी का इंतजार है। असमंजस की वजह से सभी विभागों ने काम रोकना ही उचित समझा है।
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दवाओं की सप्लाई के लिए भी नहीं हो पा रहे नए टेंडर
केवल इंजीनियरिंग नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और समाज कल्याण विभाग पर भी इस आदेश का सीधा असर पड़ा है। प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अस्पतालों में दवाओं की सप्लाई के लिए नए टेंडर नहीं हो पा रहे हैं, जिससे स्टॉक खत्म होने का खतरा बन गया है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आने वाले दिनों में अस्पतालों में दवाओं की कमी जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। अधिकारियों का कहना है कि उन्हें अभी तक यह स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं मिला है कि किन स्तरों के कार्यों के लिए मंत्रालय की अनुमति आवश्यक होगी और किनके लिए नहीं।