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दरबार साहिब में जीजा-साली की सुसाइड, वीडियो देख जानें सच

Sun, 13 Sep 2015 05:24 PM IST
डिजिटल टीम/अमर उजाला, चंडीगढ़
डिजिटल टीम/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 13 Sep 2015 05:24 PM IST
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suicide by brother in law and sister in law at darbar sahib

दरबार साहिब में खुदकुशी करने वाले अमृतपाल सिंह और युवती किरणदीप कौर बटाला के थे। बीते दो दिन से दोनों श्री हरमंदिर साहिब में स्थित गुरु रामदास सराय में ठहरे हुए थे उन्होंने अल सुबह करीब तीन बजे जहर निगलकर जान दे दी।

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दोनों के शव परिक्रमा में कड़ाह प्रसाद काउंटर के पास मिले। बताया जाता है कि दोनों पिछले एक साल से अपनी पहचान छुपाकर अलग-अलग जगहों पर रह रहे थे।  खुदकुशी से पहले रिश्ते में जीजा-साली ने बतौर सुसाइड नोट अपने बयान दर्ज करते हुए वीडियो बनाए थे। देखिए वीडियो में दोनों ने क्या कहा?
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किरणदीप कौर(साली) का बयान
मेरा नाम किरणदीप कौर है। मैं 18 साल की हूं मैं अपने घररवालों के गलत व्यवहार से तंग आकर घर से भागी हूं। मैंने अपने घरवालों के खिलाफ एसएसपी ऑफिस में शिकायत दी थी लेकिन पुलिस वालों ने भी जबरदस्ती मारपीट कर मुझसे राजीनामे पर हस्ताक्षकर करवा लिया। मेरी बहन दीपिका कौर और नवदीप कौर ने पिता के साथ मिलकर मेरी पिटाई कर कहा कि तेरे जीजा को बुलाकर सारी बात बताते हैं।
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इसके बाद मेरे पिता ने बुआ के लड़के को फोन कर बताया कि अब इनको(मुझे और जीजा को) खत्म करना  है। ये बातें मैंने सुन ली और मैंने अपने जीजा को फोन कर बताया कि ये लोग हमें मारने की प्लानिंग कर रहे हैं। इस पर जीजा ने कहा कि हमलोग ये शहर छोड़ कर कहीं और चले जाएंगे। उन्होंने पहले भी खाने में जहर देकर इन्हें (जीजा को) मारने की कोशिश की और जब ये इलाज के लिए सिंगला हॉस्पीटल पहुंचे तो मेरे पिताजी डर गए कि कहीं उल्टा उन्हीं लोगों पर मारने का केस न दर्ज हो जाए। तब उन्होंने मुझे कहा कि तू अपने जीजा के खिलाफ बयान दे कि तेरे जीजा ने तुझसे नाजायज संबंध बनाए। तब मेरे ऐसा कहने से मना करने पर उन्होंने इन पर दहेज का केस डालना चाहा।

पुलिस वालों ने जब दहेज का केस दर्ज करने से मना किया तो उन्होंने इन पर सुसाइड का केस डाला। इस केस में जीजा को 17 दिन की कैद हुई। 10 सितंबर 2014 को जब जीजा जेल से वापस आए तो मेरे भाई को इसका पता चलने पर अपने दोस्तों के साथ मिलकर उन्होंने जीजा की पिटाई कर दी। ये बचकर किसी तरह सिविल हॉस्पीटल पहुंच गए और डॉक्टरों के कहने पर पुलिस ने मेरे भाई पर धारा 326 के तहत पर्चा दर्ज किया। मेरे घर वालों ने पुलिस वालों को 10 हजार रिश्वत देते हुए कहा कि मेरे भाई को केस से बचाने और मेरे जीजा को किसी तरह से दहेज के केस में फंसाने को कहा।  मेरी बहन का अपने ससुराल से भागना रोज का काम बन गया था। वो अपने बेटे अमनदीप को लेकर जीजा के घर से भाग जाती थी। घर से भागकर वो पिता को फोन करती तो पिता बड़े प्यार से कहते कोई बात नहीं बेटी अपनी बुआ के घर चली जाओ।

उधर जीजा दोनों को पागलों की तरह ढूंढते और जब वो पिता से इस संबंध में बात करते तो पिता कहते कि अगर उसे कुछ हुआ तो हम तेरे पर(जीजा पर) केस डाल देंगे। 14 नवंबर 2014 जीजा ने बहन के घर से चले जाने की शिकायत दर्ज कराई लेकिन जब कुछ दिनों बाद पता चला कि वो अपने मायके में ही रह रही है तो इन्होंने शुक्र मनाया कि चलो तो वो घर में ही है।

अब हम फिर वापस आ गए तो मेरी बहन ने अपने ससुर और घर वाले से मिलकर इन पर दहेज का केस दर्ज करवा दिया। अब हम जब फिर वापस आ गए हैं तो पुलिस हमें रोज ही तंग कर रही है। अब हमारे पास कोई उम्मीद नहीं बची है आखिरी उम्मीद भी नहीं रही है हम सुसाइड कर रहे हैं।(जैसा कि वीडियो रिकॉर्डिंग में बताया)

'मेरे पिता के और मेरी पत्नी के नाजायज संबंध हैं'

अमृतपाल सिंह(जीजा) का बयान- दीपिका कौर (मेरी पत्नी) ने 29 सितंबर 2011 को पहले भी केस दर्ज करवाया ‌था कि उसके ससुर और देवर (मेरे पिता और भाई) उनसे दहेज की मांग करते हैं लेकिन मेरा पति मेरे साथ है। उसने कभी दहेज की मांग नहीं की। वो केस अभी तक पेंडिंग ही पड़ा है। अप्रैल 2014को इन्होंने मुझ पर 309 का केस दर्ज करवाया। धारा 309 के अंतर्गत सुसाइड का केस दर्ज किया जाता है। पुलिस वालों ने मुझे और किरणदीप को हवालात में डालकर टॉर्चर किया।

11/14  को दीपिका घर से चली गई और मैंने 181 पर फोन कर शिकायत दर्ज करवा दी बाद में इनके मां बाप से जब इस संबंध में बात की तो उन्होंने कहा ‌अगर उसे कुछ हुआ तो हम तेरे को बख्‍शेंगे नहीं । इसी दौरान किरणदीप ने मुझे बताया ‌कि दीप‌िका अपने बुआ के घर छिपी हुई थी और अब अपने मायके वापस आ गई है। जब किरणदीप के घरवालों को  इस बात का पता चला कि किरणदीप ने मुझे सारी बातें बता दी तो उसके घरवालों ने ‌किरणदीप से मारपीट की इसके बाद किरणदीप अपने घर से भागकर मेरे पास आ गई। बाद में हमें पता चला कि ये लोग हमें मारने की साजिश रच रहे हैं।

इसके चलते हमने शहर छोड़ दिया। पिछले 4 माह से हम अपने घर से छिपे हुए हैं। इस दौरान मुझपर दहेज का केस यह कहकर डाल दिया गया है कि मैं अपनी पत्नी और अपने बच्चे से मारपीट करता हूं। और मैंने अपने बच्चे को घर से बाहर निकाला हुआ है अगर मैंने ऐसा किया है तो उनका सामान मेरे घर से उनके पास कैसे चला गया।

मेरी पत्नी मेरा आईडीप्रूफ, बच्चे का आईडीप्रूफ समेत सारा कागज और सारा सामान लेकर घर से गई है अगर मैंने उसे घर से निकाला है तो वो सारा सामान घर से कैसे ले गई।

 सच यह है कि मेरे पिता के और मेरी पत्नी के नाजायज संबंध हैं और ये दोनों मिलकर हमदोनों को फंसाने की कोशिश कर रहे हैं। निर्मल सिंह और सरबजीत सिंह(मेरे पिता और ससुर) लंबे समय से हमारे खिलाफ साजिश रच रहे ह‌ैं। मैं इन दोनों से इतना तंग आ चुका हूं कि मैं सुसाइड के लिए सोच रहा हूं। अगर मुझे इंसाफ नहीं मिला तो मैं सुसाइड कर लूंगा।
(वीडियो रिकॉर्डिंग में दर्ज बयान के अनुसार हिंदी में अनुवादित।)


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