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सामान देने में देरी हुई तो बच्चे ने कैंटीन वाले से कहा, सामान देना है कि गोली खानी है...

Wed, 24 Jan 2018 11:59 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, यमुनानगर(हरियाणा)
ब्यूरो/अमर उजाला, यमुनानगर(हरियाणा) Updated Wed, 24 Jan 2018 11:59 AM IST
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student gives death threat to canteen owner in school
Angry Student - फोटो : File Photo
मामला हरियाणा का है, जहां यमुनानगर के जगाधरी के स्प्रिंग डेल्स पब्लिक स्कूल की कैंटीन में सामान देते समय देरी होने पर एक बच्चे ने कैंटीन संचालक को धमकी भरे लहजे में कहा-सामान देना है कि गोली खानी है...। स्कूल में सहमे टीचर्स ने स्कूल के मैनेजर हरपाल सिंह को फोन पर इसकी सूचना दी।
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उस समय हरपाल सिंह स्वामी विवेकानंद पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल रितु छाबड़ा की हत्या को लेकर प्रदेश भर के स्कूल संचालकों व स्कूल स्टाफ की जिमखाना क्लब में चल रही मीटिंग में मौजूद थे। हरपाल सिंह ने स्कूल में घटी इस घटना की जानकारी मीटिंग में मौजूद लोगों को दी तो सभी स्तब्ध रह गए।
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यमुनानगर डिस्ट्रिक पब्लिक स्कूल एसोसिएशन के बैनर तले हुए इस मीटिंग में प्रदेश की विभिन्न प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के पदाधिकारी भी आए हुए थे। इंडियन पब्लिक स्कूल जगाधरी के डायरेक्टर डॉ. ओपी तनेजा ने बताया कि इस घटना के बाद उन्होंने एक बच्चे को यह कहते हुए सुना कि स्वामी विवेकानंद पब्लिक स्कूल में हुआ कांड तो हुडा सेक्टर-17 स्थित स्कूल में होना चाहिए था जहां स्कूल संचालक की पत्नी स्कूल की प्रिंसिपल है।
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मीटिंग में प्रिंसिपल रितु छाबड़ा की एक छात्र द्वारा हत्या किए जाने पर चिंता जताते हुए स्कूलों स्टाफ खासकर महिला प्रिंसिपल और टीचर्स की सुरक्षा पर चर्चा की जा रही थी। मीटिंग में मौजूद स्कूल संचालकों, प्रिंसिपल व स्टाफ सदस्यों ने कहा कि इस घटना के बाद स्कूलों में टीचर्स में भय का माहौल है। उन्होंने कहा कि अब स्कूलों में टीचर्स कमजोर बच्चों को डांट-डपट कर पढ़ाने से डरेंगे।

टीचर पर हावी होने लगते हैं बच्चे : प्रेसिडेंट

student gives death threat to canteen owner in school
परवरिश की पाठशाला - फोटो : File Photo
शिक्षाविदों ने इस बात पर चिंता जताई कि आज गुरु और शिष्य का रिश्ता पहले जैसा नहीं रहा। एक शिक्षाविद के मुताबिक साल में बच्चे औसत 45 स्कूल में और 320 दिन घरों में पेरेंट्स के साथ होते हैं। शिक्षक बच्चों को पढ़ा सकता है, लेकिन पेरेंट्स उन्हें संस्कारवान बना सकते हैं। लेकिन आज पेरेंट्स बच्चों पर पूरा ध्यान नहीं दे पा रहे हैं।

स्कूल संचालकों ने इस बात पर नाराजगी जताई कि स्कूल में होने वाली किसी भी घटना के बाद सबसे पहले गाज स्कूल मैनेजमेंट और प्रिंसिपल पर गिरती है, जबकि अब तक गुरुग्राम सहित देश के अन्य हिस्सों में स्कूलों में हुई घटनाओं में टीचर्स या मैनेजमेंट की भूमिका सामने नहीं आई है। शिक्षाविदों ने कहा कि सरकार स्कूलों में सेफ्टी बढ़ाने की रट लगाई हुई है, लेकिन शिक्षा के स्तर में सुधार की ओर सरकार का कोई ध्यान नहीं है। मीटिंग के अंत में दिवंगत प्रिंसिपल रितु छाबड़ा की आत्मिक शांति के लिए दो  मिनट का मौन रखा गया।

टीचर पर हावी होने लगते हैं बच्चे : प्रेसिडेंट
जगाधरी। ऑल इंडिया पब्लिक स्कूल एसोसिएशन के नेशनल प्रेसिडेंट कर्नल प्रताप ने कहा कि बदलते समय के साथ बहुत कुछ बदल गया है। आज अधिकतर घरों में कलह का माहौल व्याप्त है। इस कारण बच्चों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। जब कभी कोई टीचर बच्चों को कोई बात कहता है तो पैरेंट्स अपने बच्चों का पक्ष लेने लगते हैं।  बाद में चलकर बच्चे का मनोबल इस कदर बढ़ जाता है कि जरा सी बात पर बच्चा टीचर पर हावी होने की कोशिश करने लगता है। इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन और प्राइवेट स्कूल सेक्टर से जुड़े लोगों को एकजुट होना पड़ेगा।
 
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