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सतीश कैंथ मामलाः जमानत याचिका पर पुलिस का जवाब दाखिल

Sat, 02 Jul 2016 10:00 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 02 Jul 2016 10:00 AM IST
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plot fraud case, bjp councilor satish kainth, widow lady fraud case, ut administration, chandigarh
पार्षद सतीश कैंथ को जेल ले जाती पुलिस - फोटो : amar ujala file
हल्लोमाजरा में विधवा का प्लॉट कब्जाने के मामले में बुड़ैल जेल में बंद भाजपा पार्षद सतीश कुमार कैंथ की नियमित जमानत याचिका का यूटी पुलिस ने विरोध करते हुए शुक्रवार को जवाब दाखिल किया। पुलिस के अनुसार, कैं थ की अग्रिम जमानत याचिका जिला अदालत और हाईकोर्ट से खारिज होने के बाद उनके पास सरेंडर करने के अलावा कोई चारा नहीं था। अदालत ने जवाब के बाद इस पर बहस के लिए शनिवार का दिन तय किया है। 
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वहीं पुलिस के अनुसार कैंथ ने अपने पद और राजनीतिक जान पहचान का दुरुपयोग किया है। जमीन हड़पने के मामले में कैंथ को ही पुलिस ने मास्टरमाइंड बताया है। पुलिस के अनुसार कैंथ अनावश्यक तरीके से शिकायतकर्ता महिला की जमीन को किसी अन्य खसरा नंबर के साथ जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। कैंथ और उनके परिवार पर शिकायतकर्ता की जमीन में गैरकानूनी तरीके से दाखिल होने, जालसाजी कर जमीन हथियाने के आरोप पुलिस ने लगाए हैं। राजस्व विभाग के रिकॉर्ड को भी पुलिस ने आधार बनाया है। इसमें कहा गया है कि जमीन का कब्जा शिकायतकर्ता महिला के पति के पास था। 
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वहीं पुलिस ने सतीश कैंथ के आपराधिक रिकॉर्ड का भी हवाला दिया है। पुलिस के अनुसार 11 अप्रैल 2015 को कैंथ के खिलाफ इंडस्ट्रियल एरिया थाने में हत्या के प्रयास, हथियारों सहित दंगा करने, सरकारी कर्मी को ड्यूटी के दौरान चोट पहुंचाने जैसी धाराओं में केस दर्ज किया गया है। इसके अलावा 2011 में 22 फरवरी को जसवंत कौर और मनीष कैंथ के मकान को संबंधित एक्ट के तहत ढहाने के  आदेश हुए थे, तब भी कैंथ के प्रभाव के चलते कार्रवाई नहीं हुई। 
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27 जून को कैंथ ने दायर की थी याचिका
इससे पहले 27 जून को कैं थ की ओर से दायर जमानत अर्जी में कहा गया था कि उसे केस में झूठा फंसाया गया है। एफआईआर के तथ्यों को देखने से पता चलता है कि पुलिस संबंधित अपराध के साथ उनकी भूमिका को जोड़ने में नाकाम रही है। संबंधित जमीन की जीपीए उनके पिता सोहन लाल के नाम है। वहीं इसकी सेल डीड उनकी पत्नी जसवंत कौर के नाम है। दस्तावेजों में कहीं भी उनका नाम नहीं है। इससे उनके खिलाफ कोई केस नहीं बनता। 
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