Punjab: पंजाब पुलिस के खुफिया मुख्यालय पर हमले के मुख्य आरोपी दीपक रंगा को NIA ने किया गिरफ्तार
आरपीजी हमले के बाद से रंगा फरार चल रहा था। एनआईए ने कहा कि रंगा सक्रिय रूप से रिंदा और लांडा से टेरर फंड प्राप्त कर रहा है। अधिकारियों ने कहा कि रंगा को रिंदा और लांडा से बड़े पैमाने पर पैसा और लॉजिस्टिक सहयोग मिल रहा था।
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मोहाली के सेक्टर-77 स्थित पंजाब पुलिस के खुफिया मुख्यालय पर नौ महीने पहले आरपीजी हमले के मुख्य शूटर हरियाणा के झज्जर निवासी दीपक रंगा को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने उत्तर प्रदेश के जिला गोरखपुर से गिरफ्तार किया है। वह कनाडा में बैठे आतंकी लखवीर सिंह लंडा और पाकिस्तान में रह रहे हरविंदर सिंह संधू उर्फ रिंदा का करीबी सहयोगी है। उसे वारदात को अंजाम देने के बदले विदेश से फंडिंग तक हुई है। एनआईए ने इस मामले में नेपाल बार्डर से पहली गिरफ्तारी है, जबकि पंजाब पुलिस मामले में नौ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।
पंजाब पुलिस के खुफिया मुख्यालय पर 9 मई 2022 को शाम 7:45 बजे आरपीजी हमला हुआ था। जिस समय हमला हुआ था, उस समय वहां से अधिकतर स्टाफ निकल चुका था। ऐसे में जानी नुकसान होने से बच गया था। मौके से आरोपी फरार होने में कामयाब रहे थे। हालांकि मोहाली के साथ लगते एक गांव में उत्तर प्रदेश निवासी युवक और दीपक रंगा एक जगह सीसीटीवी कैमरे कैद हो गए थे।
इसके बाद पुलिस ने एक के बाद एक करीब 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया था लेकिन दीपक का कोई सुराग नहीं लग पा रहा था। चर्चा यहां तक थी कि वह नेपाल भाग गया। इसी बीच अब एनआईए ने आरोपी को काबू किया है। वहीं आरपीजी दागने में उसकी अहम भूमिका रही है। इससे पहले मोहाली पुलिस उस बाइक को रिकवर कर चुकी है जिससे आरोपियों ने मुख्यालय की रेकी की थी।
वहीं, एनआईए को उम्मीद है कि इससे पंजाब में हुई टारगेट किलिंग की अन्य वारदात के राज खुलेंगे। एनआईए मोहाली में आरपीजी हमले का स्व-संज्ञान लेकर 20 सितंबर 2022 को केस दर्ज किया था।
नशे से लेकर हथियारों की तस्करी में रहा शामिल
आरपीजी हमले के अलावा दीपक हिंसक हत्याओं सहित कई अन्य आतंकवादी और आपराधिक घटनाओं में शामिल रहा है। एनआईए का दावा है कि उत्तर भारत में हिंसक गतिविधियों और टारगेट किलिंग कराना उसका मुख्य उद्देश्य था। इसके साथ ही वह नशा व हथियारों की तस्करी, सीमा पार से गोला बारूद और आईईडी को लाने का काम करता था।
पहली बार करवाया चाल परीक्षण, दो चार्जशीट दाखिल
पंजाब पुलिस के खुफिया मुख्यालय पर हुए हमले में पहली बार एक आरोपी का पुलिस ने चाल परीक्षण करवाया था, क्योंकि आरोपी का दावा था कि वह नाबालिग है जबकि जांच में बालिग निकला था। वहीं, इस मामले में पुलिस अब तक दो चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इस मामले में स्पेशल ऑपरेशन सेल की टीमें भी लगी हुई है।