जहां आए थे पीएम मोदी, वहां हो रही थी लिंग जांच
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जिस जिले में दो दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदेश देने आए थे, वहां लिंग जांच का गोरख धंधा चल रहा था। मामला पानीपत का है।
गर्भ में लड़का है या लड़की, इसको बताने का गोरखधंधा करने वालों की धरपकड़ के लिए सोनीपत के स्वास्थ्य अधिकारियों को पानीपत तक दौड़ लगानी पड़ी।
करीब सात घंटे की भागदौड़ के बीच पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन लेकर लिंग जांच के लिए दिल्ली से पहुंचा डॉक्टर स्वास्थ्य टीम को गच्चा दे गया, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की एक एएनएम और झोलाछाप डाक्टर बेनकाब हो गए। विभाग अब इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई में जुटा है।
ये था लिंग जांच के धंधे का पूरा मामला
स्वास्थ्य विभाग को एक सप्ताह पूर्व सूचना मिली थी कि जिले में कुछ एजेंटों और एएनएम की मध्यस्थता से कन्या भ्रूण हत्या का काम चल रहा है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने एक टीम बनाकर इस पूरे मामले का भंडाफोड़ करने के लिए रणनीति तैयार की।
विभाग ने एक आशा वर्कर और उसकी विवाहित बेटी को तैयार कर इस गोरखधंधे को पर्दाफाश करने की ठानी। चार दिन पहले दोनों मां-बेटी ने एएनएम से कन्या भ्रूण हत्या करने को लेकर बातचीत की। इसके लिए 11 हजार रुपये में बात पक्की हुई।
इसके बाद वह एएनएम बिचौलियों के माध्यम से सोनीपत स्थित एक निजी अस्पताल के बाहर ले गई। वहां पहले से एक महिला एजेंट इंतजार कर रही थी।
एएनएम के कहने पर आशा वर्कर और उसकी विवाहित बेटी ने 2000 रुपये लिंग जांच के लिए एडवांस के रूप में चुकता कर दिए। जबकि बाकी 9 हजार रुपये अल्ट्रासाउंड की जांच के बाद देने की बात कही। इन सभी की सूचना स्वास्थ्य विभाग को पल-पल तक पहुंचती रही।
स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे बनाई छापे की रणनीति
मामले की तह तक पहुंचने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सिविल सर्जन के नेतृत्व में दो टीमों का गठन किया। स्वास्थ्य विभाग ने सिक्का कॉलोनी इंचार्ज को पूरे मामले की जानकारी दी। थाना इंचार्ज और स्वास्थ्य विभाग की दोनों टीमों ने एजेंटों को पकड़ने के लिए उनकी कार का पीछा करना शुरू कर दिया। स्वास्थ्य विभाग की दोनों टीमों ने भी गाड़ी का पीछा किया। करीब 10 किमी आगे जाकर गांव बापौली में जाकर रुकी।
एएनएम और महिला लिंग जांच के लिए एक क्लीनिक पर जा पहुंचे। यहां क्लीनिक के डॉक्टर तैयार बैठे थे। अब यह सभी लिंग जांच करने आने वाले डॉक्टर की प्रतीक्षा करने लगे। इधर, आशा वर्कर और उसकी विवाहित लड़की बाकी नौ हजार रुपये देने के लिए उन्होंने रुपये बैग से बाहर निकाल लिए थे।
इस बीच टीम ने भी अपनी रणनीति के तहत उस क्लीनिक तक पहुंचने में कामयाबी हासिल कर ली थी। जैसे ही पूरी टीम ने क्लीनिक के अंदर दबिश दी, उसी समय क्लीनिक के डॉक्टर को इस बारे में भनक लग गई और वह पीछे के दरवाजे से फरार होने में कामयाब हो गया। उसके बाद पहले से इंतजार कर रहे अल्ट्रासाउंड जांच करने वाला डॉक्टर भी सूचना मिलते ही रास्ते से फरार हो गया।
सूचना पर पानीपत पुलिस और सीएमओ पहुंचे
मौके पर सोनीपत के सिविल सर्जन डॉ. जेएस पूनिया पहले ही पहुंच चुके थे। एएनएम से जैसे ही इस बारे में कड़ी पूछताछ की गई तो वह डर गई। इस बीच पूरे मामले को लेकर सिविल सर्जन ने पूरी पूछताछ की।
इसी दौरान पानीपत पुलिस, पानीपत के सीएमओ डॉ. इंद्रजीत धनखड़ और पीएनडीटी अधिकारी डॉ. बत्रा भी मौके पर पहुंच गए। हालांकि जिस समय पानीपत के सीएमओ को इस बारे में सूचना मिली उस समय वह रोहतक में थे, लेकिन सूचना मिलते ही वह भी मौके पर पहुंच गए।
कन्या भ्रूण हत्या करने वाले को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। थोड़ी सी चूक से डॉक्टर फरार होने में कामयाब रहा। हालांकि जिस डॉक्टर के क्लीनिक पर यह गोरखधंधा चल रहा था वह झोलाछाप है। फर्जी डॉक्टर के खिलाफ पानीपत स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई करेगा। जबकि इस पूरे मामले में लिप्त एएनएम के खिलाफ विभाग कड़ी से कड़ी कार्रवाई करेगा।
-डॉ. जेएस पूनिया, सिविल सर्जन