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फैसलाः जाट आरक्षण आंदोलन में गोली चलाने वाले 3 दोषियों को अंतिम सांस तक आजीवन कारवास

Thu, 31 Jan 2019 09:40 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हिसार (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हिसार (हरियाणा) Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 31 Jan 2019 09:40 AM IST
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Life imprisonment to Three accused for firing in jaat movement
सांकेतिक तस्वीर

जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हांसी की ढाणी पाल में 22 फरवरी 2016 को हुई गोलीबारी के तीन दोषियों को अदालत ने अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा तीनों पर अदालत ने 17500-17500 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। एडीजे देशराज चालिया की अदालत ने इस मामले में हांसी के सिसाय बोलान गांव निवासी सुरेंद्र झिंडा, रोहतक के हिसार बाईपास निवासी पवन उर्फ पौना और सिसाय निवासी दलजीत उर्फ जलजीत को 24 जनवरी को दोषी करार दिया था।       

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बुधवार को न्यायाधीश देशराज चालिया ने करीब 4 बजकर मिनट पर दोषियों को सजा सुनाई। इस दौरान पुलिस ने कोर्ट परिसर को पूरी तरह घेर लिया और केस से जुड़े लोगों को छोड़कर अन्य कोई परिसर में दिखाई नहीं दे रहा था। यहां तक कि अदालत परिसर में दोनों पक्षों की ओर से वकीलों के अलावा किसी भी पक्ष का कोई परिजन दिखाई नहीं दे रहा था।     
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दलजीत को 4:56 बजे फिर लाया गया कोर्ट
सजा के बाद तीनों दोषियों को पुलिस बख्शीखाना ले गई। इसके बाद उन्हें संबंधित जेल में भेजे जाने की तैयारी की जा रही थी। फिर अदालत के आदेश पर दोषी दलजीत को पुलिस 4 बजकर 56 मिनट पर फिर से कोर्ट लेकर आई। यहां उसे जजमेंट की कॉपी दी गई। दरअसल उसने अदालत से जजमेंट की कॉपी दिए जाने की मांग की थी, इसलिए फैसला तैयार होने के बाद उसे अदालत में दोबारा बुलाकर कॉपी सौंपी गई।  
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पवन को सेंट्रल जेल नंबर-2 और दलजीत व सुरेंद्र को जेल नंबर-1 में भेजा
अदालत के फैसले के बाद तीनों दोषियों को सेंट्रल जेल भेज दिया गया। अदालत के आदेश पर दोषी पवन उर्फ पौना को सेंट्रल जेल नंबर-2 में भेजा गया, जहां वह पहले बंद था, जबकि बाकी दोनों दोषियों को सेंट्रल जेल नंबर-1 में भेजा गया है।  

इन धाराओं के तहत किया था मामला दर्ज

Life imprisonment to Three accused for firing in jaat movement
आरोपी को कोर्ट ले जाती पुलिस

इस मामले में हांसी शहर थाना पुलिस ने एफआईआर नंबर-116 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 149, 302, 307, 395, 397, 427, 436 और आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया था। पुलिस ने 23 फरवरी 2016 को केस दर्ज कर इस मामले की जांच शुरू की थी। वीडियो फुटेज और बयानों के आधार पर पवन, सुरेंद्र और दलजीत इसमें आरोपी बनाए गए थे। अदालत ने इन्हें 24 जनवरी को दोषी करार देते हुए सजा 30 जनवरी को सुनाने का फैसला दिया था।  

यह था मामला
जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान 20-21 फरवरी 2016 को हांसी के ढाणी पाल में दलजीत ने अपने साथियों के साथ मिलकर आगजनी, लूटपाट जैसी घटनाओं को अंजाम दिया था। ढाणी में रहने वाली चचेरी बहन शांति का हाल जानने के लिए मिंटू व कृष्ण 22 फरवरी को बाइक पर सवार होकर वहां गए थे। दोपहर बाद 2 बजे 80 से अधिक हमलावर वहां पहुंच गए और उन पर हमला बोल दिया। 

इस दौरान फायरिंग भी की गई। मिंटू व कृष्ण जान बचाने के लिए खेतों की ओर भाग खड़े हुए तो हमलावरों ने उनकी तरफ गोलियां चलाईं, जिसमें दोनों घायल हो गए थे। कृष्ण को कुछ लोगों ने अस्पताल पहुंचाया, लेकिन मिंटू उस समय नहीं मिला था, लेकिन अगले दिन गोलियों से छलनी हुआ उसका शव ढाणी के खेतों में मिला था।  

किस धारा के तहत क्या सजा सुनाई
धारा - सजा - जुर्माना
148 - 3 साल कैद - 1000 रुपये
302/149 - आजीवन कारावास - 5000 रुपये
307/149 - 7 साल कैद - 5000 रुपये
397/149 - 7 साल कैद  -- 
427/149 - 2 साल कैद - 500 रुपये
436/149 - 10 - 5000 रुपये
नोट - इसके अलावा आर्म्स एक्ट में तीनों को एक-एक हजार रुपये जुर्माना लगाया है।  

दलजीत पहले से काट रहा है सजा

इस मामले में दोषी करार दिया गया दलजीत उर्फ जलजीत पहले से सजायाफ्ता है। उप जिला न्यायवादी राजीव सरदाना ने बताया कि दजलीत को हांसी के सदर थाना में राम अवतार की शिकायत पर एफआईआर नंबर-80 के तहत 23 फरवरी 2016 को दर्ज मामले में एडीजे आरके जैन की अदालत द्वारा पांच साल कैद की सजा सुनाई जा चुकी है।

 दलजीत तोड़फोड़ करने, सरकारी ड्यूटी में बाधा पहुंचाने, फॉरेस्ट एक्ट के तहत दोषी पाया गया था। इस मामले में उसके साथ तीन अन्य राजू, सूरज और विनोद को सजा हुई थी और सभी को करीब 60-60 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया था।  

अलग से शुरू होगी दलजीत की सजा
पब्लिक प्रोसीक्यूटर राजीव सरदाना ने बताया कि दलजीत चूंकि पहले से पांच साल की सजा काट रहा है, इसलिए अदालत से उसे उस सजा के बाद इस सजा के शुरू होने की मांग की गई थी, जिसे अदालत ने मान लिया। दलजीत को पहले पूर्व की पांच साल की सजा काटनी होगी और उसके बाद उसकी अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की वर्तमान सजा शुरू होगी।

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