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ज्योति मर्डर: SIT की रिपोर्ट चौंकाने वाली

Wed, 01 Oct 2014 05:45 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला Updated Wed, 01 Oct 2014 05:45 PM IST
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Jyoti murder case: sensational report of SIT

ज्योति हत्याकांड में सभी आरोपियों के बरी होने के बाद जांच में पुलिस की कमियां ढूंढने के लिए बनाई गई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने डीजीपी को रिपोर्ट सौंप दी है।

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इसमें तत्कालीन एसीपी वीरेंद्र सांगवान, एसीपी सुरेश कौशिक, तत्कालीन इंस्पेक्टर अजय राणा, तत्कालीन एएसआई जय सिंह व एएसआई सुरिंदर के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी करने और उन पर कार्रवाई करने की सिफारिश की गई है।
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साथ ही अदालत के फैसले पर हामी भरते हुए हाईकोर्ट में अपील करने की भी सिफारिश की है। अब डीजीपी इसी रिपोर्ट के आधार पर अगली कार्रवाई के लिए गृह विभाग से सिफारिश करेंगे।
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पुलिस की लापरवाही से बरी हुए चौधरी

Jyoti murder case: sensational report of SIT

ज्योति हत्याकांड की जांच में कई खामियां होने और सबूतों को साबित कर पाने में पुलिस की नाकामियों की वजह से अदालत ने हिमाचल के दून क्षेत्र के विधायक रामकुमार चौधरी सहित सभी आरोपियों को बरी कर दिया था।

आरोपियों के बरी होने से पंचकूला पुलिस की खूब किरकिरी हुई, जिसे देखते हुए एसआईटी का गठन कर मामले की जांच के आदेश दिए गए थे।

एसआईटी ने जांच रिपोर्ट सौंपने में तय समय से ज्यादा वक्त लिया, लेकिन रिपोर्ट में अदालत के फैसले पर हामी भरते हुए पांच पुलिस अफसरों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी करने व कार्रवाई की सिफारिश की। साथ ही इस मामले में जिलाधिकारी से भी ऊपरी अदालत में अपील करने की सिफारिश की।

ज्योति हत्याकांड की जांच में ये थी कमियां

Jyoti murder case: sensational report of SIT

- सुनवाई के दौरान अदालत में मोबाइल कॉल डिटेल्स के साथ सर्टिफिकेट नहीं पेश किए गए।
- कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड को सबूत के तौर पर पेश करने के लिए महत्वपूर्ण है कि कंपनी की ओर से किसी अधिकारी के बयान दर्ज करने के बाद 65 एविडेंस एक्ट के तहत सर्टिफिकेट लगाया जाएं, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

- टावर लोकेशन के कई बिंदुओं पर पुलिस ने अपना पक्ष नहीं रखा।

- पुलिस की ओर से पेश सुबूतों में मोबाइल कॉल डिटेल्स को अहम बताया गया, लेकिन इसके मान्य होने के लिए जरूरी औपचारिकताएं पूरी नहीं की गईं।

-पुलिस ने जांच के दौरान ज्योति की मौत से पहले उसके पिता के अलावा दूसरे शख्स से हुई बातचीत के बारे में भी जानकारियां नहीं जुटाईं।

रिश्ता साबित नहीं कर पाई पुलिस

Jyoti murder case: sensational report of SIT

- टावर लोकेशन और ज्योति के साथ विधायक रामकुमार चौधरी के रिश्ते को सिद्ध करने में पुलिस नाकाम रही।
- चंडीगढ़ के सेक्टर-20 के नर्सिंग होम में जहां ज्योति का अबॉर्शन हुआ, वहां से डा. अदिति ने विधायक रामकुमार चौधरी को पहचानने से इनकार कर दिया। इस मामले में डा. गुरप्रीत से पुलिस ने पूछताछ नहीं की। यहां भी पुलिस की कमजोरी साबित हुई।

- ज्योति की हत्या के बाद पुलिस के मुताबिक, आरोपी गुरमीत के कब्जे से मोबाइल रिकवर किया गया था, लेकिन गुरमीत के भाई प्रवीण ने बयान दिया कि यह फोन उसकी कंपनी के कर्मी इस्तेमाल करते हैं। पुलिस इस मोबाइल की रिकवरी भी साबित नहीं कर सकी।

शुरू से ही केस कमजोर करती गई पुलिस!

Jyoti murder case: sensational report of SIT

21-22 नवंबर 2012 को ज्योति की हत्या के बाद पुलिस ने इस मामले में छानबीन शुरू की, लेकिन पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ और सबूतों की गहराईयों में जाने की कोशिश नहीं की।

नतीजतन केस कमजोर पड़ता गया। बाद में धमकी मिलने के बाद ज्योति के पिता बूटी राम भी बयान से मुकर गए, लेकिन दोबारा अपनी बेटी को न्याय दिलाने की बात कहते हुए अदालत में बयान दर्ज कराया। इसके अलावा भी जितनी कमियां सामने आईं, जांच से जुड़े अधिकारी उन सुबूतों को ठीक ढंग से पेश नहीं कर पाए।

पुलिस आयुक्त अजय सिंघल के मुताबिक एसआईटी ने इस मामले की रिपोर्ट सौंप दी है। इसमें पांच पुलिस अधिकारियों व कर्मियों के खिलाफ जांच की सिफारिश की गई है।

जिलाधिकारी डा. एसएस फुलिया ने बताया कि रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है। एक-दो दिनों के अंदर हाईकोर्ट में अपील की जा सकती है।

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