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Hathras News: सीएचसी महौ से बनाए गए फर्जी जन्म प्रमाणपत्र, एफआईआर
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15 अगस्त 2024 के अंक में प्रकाशित खबर।
- फोटो : Archive
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) महौ में जन्म प्रमाणपत्रों के फर्जीवाड़े और गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर कोतवाली हाथरस जंक्शन में डिप्टी सीएमओ ने डाटा एंट्री ऑपरेटर तथा एक अन्य बाहरी व्यक्ति पर एफआईआर दर्ज कराई है। फर्जी जन्म प्रमाण पत्र का खेल उजागर होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई है।
जांच में हुआ बड़ा खुलासा
गांव महौ के ही समाजसेवी मनोज कुमार ने 22 जुलाई 2026 को सीएमओ हाथरस को प्रार्थना पत्र देकर सीएचसी महौ में भ्रष्टाचार और अनैतिक वसूली की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत पर सीएमओ ने 25 जुलाई 2026 को एक जांच समिति का गठन किया। 19 अगस्त को समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट सीएमओ को सौंपी। रिपोर्ट के अनुसार, सीएचसी महौ में जन्म-मृत्यु पंजीकरण का कार्य मोहित कुमार (प्राइवेट व्यक्ति) और गौरव कुमार (डाटा एंट्री ऑपरेटर) कर रहे थे। शिकायतकर्ता की ओर से उपलब्ध कराए गए जन्म प्रमाणपत्रों की जब सीआरएस पोर्टल पर जांच की गई, तो वह फर्जी निकले।
ये मामले निकले फर्जी
सुरभि का मामला : सुरभि के बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र (पंजीकरण संख्या- बी-20179-56213-000076) 08 जुलाई 2017 को जारी दिखाया गया, जबकि जन्म दिनांक 01 मई 2017 दर्ज थी और इसे 13 अगस्त 2026 को अपलोड किया गया। इसमें सुरभि का प्रसव प्रमाण पत्र संलग्न पाया गया, जबकि वास्तविक रूप से सुरभि का प्रसव 02 अगस्त 2025 को हुआ था।
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नदनी का मामला: नदनी के बच्चे की जन्म तिथि 25 जनवरी 2017 और पंजीकरण संख्या बी-2017,9-56200-000057 थी, जिसे 20 दिसंबर 2017 को जारी दिखाया गया तथा इसके साथ भी सुरभि का ही प्रसव प्रमाणपत्र अपलोड पाया गया।
एक ही महिला के नाम पर दो अलग जन्म तिथियां : जांच में यह भी पाया गया कि गीता देवी के दो बच्चों (अरुण कुमार गौतम और हिमांशु गौतम) की जन्म तिथि क्रमशः 01 मई 2017 और 01 अगस्त 2017 दर्शाते हुए जन्म प्रमाणपत्र जारी किए गए, जो कि तकनीकी रूप से संभव नहीं है।
बिना अधिकार के हो रहे थे पंजीकरण
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लाडपुर एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देवीनगर (हाथरस जंक्शन) पर हुए जन्मों का पंजीकरण वहां के अधिकृत रजिस्ट्रार (प्रभारी चिकित्साधिकारी) द्वारा नहीं किया जा रहा था। इसके बावजूद ये पंजीकरण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महौ की मुहर लगाकर अवैध रूप से किए जा रहे थे। सामने आई इन गंभीर अनियमितताओं और फर्जी प्रसव प्रमाणपत्रों के आधार पर थाना हाथरस जंक्शन में मुकदमा पंजीकृत कराया गया है।
दो साल पहले सामने आया था खेल
ग्रामीण क्षेत्रों में फर्जी जन्म प्रमाणपत्रों के खेल का पर्दाफाश 14 अगस्त 2024 के अमर उजाला के अंक में किया गया था। हसायन की ग्राम पंचायत सिचावली सानी के वीडीओ की आईडी से 47 जिलाें के लिए प्रमाण पत्र जारी हुए थे। 19 महीनों में करीब 814 मामले सामने आए थे। इसके बाद गांव रहपुरा, बीजलपुर से भी सैकड़ों प्रमाणपत्र जारी होने का खुलासा किया गया था। उस मामले ने जन्म प्रमाणपत्र जारी किए जाने की प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए थे।
प्रारंभिक जांच के आधार पर रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है। कंप्यूटर ऑपरेटर व उसके साथी से पूछताछ में जानकारी हासिल हो सकती है। अन्य स्थानों की भी जांच कराई जा रही है।
डॉ. वेदप्रकाश, सीएमओ
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जांच में हुआ बड़ा खुलासा
गांव महौ के ही समाजसेवी मनोज कुमार ने 22 जुलाई 2026 को सीएमओ हाथरस को प्रार्थना पत्र देकर सीएचसी महौ में भ्रष्टाचार और अनैतिक वसूली की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत पर सीएमओ ने 25 जुलाई 2026 को एक जांच समिति का गठन किया। 19 अगस्त को समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट सीएमओ को सौंपी। रिपोर्ट के अनुसार, सीएचसी महौ में जन्म-मृत्यु पंजीकरण का कार्य मोहित कुमार (प्राइवेट व्यक्ति) और गौरव कुमार (डाटा एंट्री ऑपरेटर) कर रहे थे। शिकायतकर्ता की ओर से उपलब्ध कराए गए जन्म प्रमाणपत्रों की जब सीआरएस पोर्टल पर जांच की गई, तो वह फर्जी निकले।
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ये मामले निकले फर्जी
सुरभि का मामला : सुरभि के बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र (पंजीकरण संख्या- बी-20179-56213-000076) 08 जुलाई 2017 को जारी दिखाया गया, जबकि जन्म दिनांक 01 मई 2017 दर्ज थी और इसे 13 अगस्त 2026 को अपलोड किया गया। इसमें सुरभि का प्रसव प्रमाण पत्र संलग्न पाया गया, जबकि वास्तविक रूप से सुरभि का प्रसव 02 अगस्त 2025 को हुआ था।
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नदनी का मामला: नदनी के बच्चे की जन्म तिथि 25 जनवरी 2017 और पंजीकरण संख्या बी-2017,9-56200-000057 थी, जिसे 20 दिसंबर 2017 को जारी दिखाया गया तथा इसके साथ भी सुरभि का ही प्रसव प्रमाणपत्र अपलोड पाया गया।
एक ही महिला के नाम पर दो अलग जन्म तिथियां : जांच में यह भी पाया गया कि गीता देवी के दो बच्चों (अरुण कुमार गौतम और हिमांशु गौतम) की जन्म तिथि क्रमशः 01 मई 2017 और 01 अगस्त 2017 दर्शाते हुए जन्म प्रमाणपत्र जारी किए गए, जो कि तकनीकी रूप से संभव नहीं है।
बिना अधिकार के हो रहे थे पंजीकरण
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लाडपुर एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देवीनगर (हाथरस जंक्शन) पर हुए जन्मों का पंजीकरण वहां के अधिकृत रजिस्ट्रार (प्रभारी चिकित्साधिकारी) द्वारा नहीं किया जा रहा था। इसके बावजूद ये पंजीकरण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महौ की मुहर लगाकर अवैध रूप से किए जा रहे थे। सामने आई इन गंभीर अनियमितताओं और फर्जी प्रसव प्रमाणपत्रों के आधार पर थाना हाथरस जंक्शन में मुकदमा पंजीकृत कराया गया है।
दो साल पहले सामने आया था खेल
ग्रामीण क्षेत्रों में फर्जी जन्म प्रमाणपत्रों के खेल का पर्दाफाश 14 अगस्त 2024 के अमर उजाला के अंक में किया गया था। हसायन की ग्राम पंचायत सिचावली सानी के वीडीओ की आईडी से 47 जिलाें के लिए प्रमाण पत्र जारी हुए थे। 19 महीनों में करीब 814 मामले सामने आए थे। इसके बाद गांव रहपुरा, बीजलपुर से भी सैकड़ों प्रमाणपत्र जारी होने का खुलासा किया गया था। उस मामले ने जन्म प्रमाणपत्र जारी किए जाने की प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए थे।
प्रारंभिक जांच के आधार पर रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है। कंप्यूटर ऑपरेटर व उसके साथी से पूछताछ में जानकारी हासिल हो सकती है। अन्य स्थानों की भी जांच कराई जा रही है।
डॉ. वेदप्रकाश, सीएमओ