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40 साल से सिर पर था सवा 7 लाख का कर्ज, तंग आकर खा लिया जहर
ब्यूरो/अमर उजाला, सुनाम (संगरूर)
Updated Tue, 01 Aug 2017 09:22 AM IST
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मृतक किसान निर्मल सिंह।
कर्ज से दुखी गांव छाजली के किसान ने जहर खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। मात्र डेढ़ एकड़ जमीन के मालिक किसान पर सवा सात लाख रुपये का कर्ज था।
गांव छाजली के किसान निर्मल सिंह (40) ने सोमवार को अपने घर में ही जहर निगल लिया। निर्मल सिंह की पत्नी मनजीत कौर ने बताया कि कर्ज ने उसके पति को भीतर से तोड़ दिया था। निर्मल सिंह के सिर पर स्टेट बैंक ऑफ पटियाला का दो लाख रुपये, खेतीबाड़ी विकास बैंक का तीन लाख रुपये और आढ़ती का सवा दो लाख रुपये का कर्ज था।
पिछले तीन दिन से निर्मल सिंह बेहद परेशान था और आज उसने घर में जहर निगल लिया। जब उसकी हालत गंभीर हो गई तो परिजनों को पता चला। अस्पताल ले जाने से पहले ही उसकी मौत हो गई।
भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के जिला सचिव दरबारा सिंह छाजला ने किसानों की आत्महत्या के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि कोई भी सियासी दल किसानों के प्रति गंभीर नहीं है।
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प्रदेश सरकार ने किसानों का कर्ज माफ करने का एलान तो कर दिया लेकिन राहत किसी को नहीं मिली है। पिछले तीन माह में सवा सौ के ज्यादा किसान आत्महत्या कर चुके हैं जबकि सरकार अपनी पीठ थपथपाने में लगी है। उन्होंने मांग की कि पीड़ित परिवार को सरकारी नौैकरी दी जाए व उसका पूरा कर्ज माफ करने का प्रबंध किया जाए।
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गांव छाजली के किसान निर्मल सिंह (40) ने सोमवार को अपने घर में ही जहर निगल लिया। निर्मल सिंह की पत्नी मनजीत कौर ने बताया कि कर्ज ने उसके पति को भीतर से तोड़ दिया था। निर्मल सिंह के सिर पर स्टेट बैंक ऑफ पटियाला का दो लाख रुपये, खेतीबाड़ी विकास बैंक का तीन लाख रुपये और आढ़ती का सवा दो लाख रुपये का कर्ज था।
पिछले तीन दिन से निर्मल सिंह बेहद परेशान था और आज उसने घर में जहर निगल लिया। जब उसकी हालत गंभीर हो गई तो परिजनों को पता चला। अस्पताल ले जाने से पहले ही उसकी मौत हो गई।
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भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के जिला सचिव दरबारा सिंह छाजला ने किसानों की आत्महत्या के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि कोई भी सियासी दल किसानों के प्रति गंभीर नहीं है।
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प्रदेश सरकार ने किसानों का कर्ज माफ करने का एलान तो कर दिया लेकिन राहत किसी को नहीं मिली है। पिछले तीन माह में सवा सौ के ज्यादा किसान आत्महत्या कर चुके हैं जबकि सरकार अपनी पीठ थपथपाने में लगी है। उन्होंने मांग की कि पीड़ित परिवार को सरकारी नौैकरी दी जाए व उसका पूरा कर्ज माफ करने का प्रबंध किया जाए।