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जिंदगी पर भारी पड़ा कर्ज, 3 किसानों ने की जहर खाकर आत्महत्या
ब्यूरो/अमर उजाला, मानसा।
Updated Thu, 07 Jul 2016 09:29 AM IST
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दो अलग अलग गांवों में दो किसानों ने कर्ज के चलते जहर खाकर आत्महत्या कर ली।
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कर्ज से आहत मानसा जिले के दो और फरीदकोट के एक किसान ने बुुधवार को जहरीला पदार्थ खाकर जान दे दी। मानसा जिले के गांव आदमके के नौजवान किसान जनरैल सिंह पर लगभग दस लाख का कर्ज था। मृतक के पिता बलदेव सिंह ने बताया कि उसके पास चार एकड़ जमीन थी, जिसमें से एक एकड़ कुछ समय पहले उसने कर्ज उतारने के लिए बेच दी थी। बलदेव सिंह ने बताया कि बीते समय कपास की फसल खराब होने और इस बार भी कोई खास कमाई न होने से उनका बेटा जरनैल सिंह काफी परेशान था। इसके चलते उसने जहरीला पदार्थ निगलकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। एएसआई फौजी राम ने कहा कि मृतक के पिता बलदेव सिंह के बयान पर 174 की कार्रवाई करके शव को वारिसों को सौंप दिया है।
इसी जिले के गांव कोटली कला के एक खेत मजदूर सिकंदर सिंह ने कर्ज से आहत होकर खुदकुशी कर ली। मृतक के पिता कर्म सिंह ने बताया कि बीते साल सफेद मक्खी के हमले से कपास की फसल बर्बाद होने की वजह से मजदूरों को रोजगार मिलना बंद हो गया था। इस वजह से उसका बेटा सिकंदर सिंह काफी परेशान रहता था। कर्म सिंह ने बताया कि उसके बेटे पर 70-80 हजार रुपये का कर्ज भी था।
उन्होंने बताया कि इसके आहत होकर उसके बेटे सिकंदर सिंह ने मंगलवार शाम को अपने घर में ही जहरीला पदार्थ निगल कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।
फरीदकोट जिले के गांव चक्क भाग सिंह वाला में कर्ज से परेशान होकर एक किसान ने कीटनाशक दवा पीकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान जगतार सिंह (48) के रूप में हुई।
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गांव के किसान जगतार सिंह के पास मात्र डेढ़ एकड़ जमीन ही थी और उसे भी उसने कर्ज उतारने के चक्कर में बेच दिया था। इन दिनों वह गांव में ठेके पर जमीन लेकर खेतीबाड़ी कर रहा था। जमीन बेचने के बाद भी कर्ज के दलदल से नहीं निकल पाने के चलते वह मानसिक रूप से परेशान रहने लगा।
परिवार के करीबी परमजीत सिंह ढिल्लों ने बताया कि जगतार सिंह पर बैंक, सोसायटी, आढ़ती समेत वित्तीय संस्थाओं का 15 से 18 लाख रुपये का कर्ज बकाया था। इससे परेशान होकर उसने मंगलवार देर शाम खेतों में मोटर के कमरे पर जाकर कीटनाशक दवा पी ली, जिसके चलते उसकी मौत हो गई।
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इसी जिले के गांव कोटली कला के एक खेत मजदूर सिकंदर सिंह ने कर्ज से आहत होकर खुदकुशी कर ली। मृतक के पिता कर्म सिंह ने बताया कि बीते साल सफेद मक्खी के हमले से कपास की फसल बर्बाद होने की वजह से मजदूरों को रोजगार मिलना बंद हो गया था। इस वजह से उसका बेटा सिकंदर सिंह काफी परेशान रहता था। कर्म सिंह ने बताया कि उसके बेटे पर 70-80 हजार रुपये का कर्ज भी था।
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उन्होंने बताया कि इसके आहत होकर उसके बेटे सिकंदर सिंह ने मंगलवार शाम को अपने घर में ही जहरीला पदार्थ निगल कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।
फरीदकोट जिले के गांव चक्क भाग सिंह वाला में कर्ज से परेशान होकर एक किसान ने कीटनाशक दवा पीकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान जगतार सिंह (48) के रूप में हुई।
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गांव के किसान जगतार सिंह के पास मात्र डेढ़ एकड़ जमीन ही थी और उसे भी उसने कर्ज उतारने के चक्कर में बेच दिया था। इन दिनों वह गांव में ठेके पर जमीन लेकर खेतीबाड़ी कर रहा था। जमीन बेचने के बाद भी कर्ज के दलदल से नहीं निकल पाने के चलते वह मानसिक रूप से परेशान रहने लगा।
परिवार के करीबी परमजीत सिंह ढिल्लों ने बताया कि जगतार सिंह पर बैंक, सोसायटी, आढ़ती समेत वित्तीय संस्थाओं का 15 से 18 लाख रुपये का कर्ज बकाया था। इससे परेशान होकर उसने मंगलवार देर शाम खेतों में मोटर के कमरे पर जाकर कीटनाशक दवा पी ली, जिसके चलते उसकी मौत हो गई।