कर्ज ने छीनी दो और किसानों की जिंदगी, कोर्ट में निगला जहर
पंजाब में कर्ज के दंश ने दो और किसानों की जिंदगी छीन ली। फिल्लौर और बठिंडा में किसानों ने आत्महत्या कर ली। पहला मामला फिल्लौर (जालंधर) का है। जहां जिले के फिल्लौर कोर्ट कांपलेक्स में शुक्रवार दोपहर को केस से परेशान एक किसान ने सल्फास निगल लिया। इसके बाद किसान को तुरंत अस्पताल ले जाया गया।
से हालत गंभीर होने से लुधियाना के डीएमसी रेफर किया गया। वहां पर उसे मृत घोषित कर दिया गया। मृतक की पहचान बहादुर सिंह निवासी सैदोवाल के रूप में हुई है। फिल्लौर थाने के एसएचओ जतिंदर जीत सिंह ने कहा कि बहादुर सिंह ने जिले के गांव नागरा के रहने वाले बलदेव सिंह से ब्याज पर पैसे लिए हुए थे, जिसे वह समय पर नहीं लौटा पाया।
बलदेव सिंह ने अदालत में केस जीतकर बहादुर सिंह की डेढ़ किले जमीन पर कब्जा जमा लिया। बलदेव सिंह के नाम पर ही जमीन की रजिस्टरी तक बन गई। बहादुर सिंह 13 जनवरी को केस हार गया था।
इसके बाद उसने कोर्ट में अपील भी डाली, जो खारिज कर दी गई। इससे परेशान होकर किसान बहादुर सिंह ने शुक्रवार को कोर्ट कांपलेक्स में सल्फास की गोलियां निगल कर जान दे दी। पुलिस ने इस मामले में आरोपी बलदेव सिंह के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।
नहीं मिला बर्बाद फसल का मुआवजा, किसान ने दी जान
उध्रर बठिंडा के गांव नत्त में मुआवजा न मिलने से परेशान एक किसान ने शुक्रवार को स्प्रे निगलकर खुदकुशी कर ली। किसान बचित्तर सिंह (60) को सफेद मक्खी के हमले से बर्बाद हुई कपास की फसल का कोई मुआवजा नहीं मिला था। इस वजह से बचित्तर काफी परेशान था।
गांव निवासी सुखदेव सिंह के अनुसार किसान बचित्तर सिंह के पास 4 एकड़ जमीन थी। इस पर उसने कपास की फसल लगाई थी। यह सफेद मक्खी के हमले से बर्बाद हो गई थी। इसके बाद उसे सरकार और प्रशासन की ओर से कोई मुआवजा नहीं दिया गया। इसके चलते बचित्तर काफी दिनों से परेशान चल रहा था।
उन्होंने बताया कि इसके अलावा किसान पर चार लाख रुपये का सरकारी और गैर सरकारी कर्ज भी था। इससे आहत होकर किसान बचित्तर ने शुक्रवार को स्प्रे निगलकर अपनी जान दे दी। किसान अपने पीछे तीन बच्चे छोड़ गया है। किसान यूनियन के नेता शिंगारा सिंह मान ने प्रदेश सरकार से मांग करते हुए कहा कि पीड़ित परिवार की आर्थिक तौर पर सहायता की जाए और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।