नशा तस्करी पर कैदियों के सनसनीखेज खुलासे
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राज्य के ड्रग माफिया ने कैदियों की नशे की लत पूरी करने के लिए जेल के भीतर ही ड्रग्स पहुंचाने का खास इंतजाम कर रखा है। इसके लिए ड्रग माफिया के बैंक अकाउंट में पैसा जमा करना होगा।
पैसा जमा होते ही संबंधित कैदी को जेल में नशीला पदार्थ मिल जाएगा। जिला पुलिस ने फरीदकोट की मॉडर्न जेल में चल रहे एक ऐसे ही ड्रग रैकेट का भंडाफोड़ किया है।
इस मामले में शुक्रवार को कोतवाली पुलिस ने मॉडर्न जेल के कैदियों समेत 12 आरोपियों को नामजद करके कार्रवाई शुरू कर दी है। जिला पुलिस को कुछ दिन पहले सूचना मिली थी कि मॉडर्न जेल में कुछ कैदी जेल कर्मियों की मदद से नशा तस्करी का कारोबार कर रहे हैं।
जेल में बंद कैदी विक्रमजीत सिंह, हरगोबिंद सिंह सोढी, हरजिंदर सिंह और बिंदर सिंह खास तौर पर अन्य कैदियों को नशा सप्लाई कर रहे हैं।
जांच के लिए गठित की गई एसआईटी
सूचना मिलते ही एसएसपी सुखदेव सिंह काहलों ने एसपी (एच) बलवीर सिंह, डीएसपी विशालजीत सिंह और सीआईए स्टाफ के इंचार्ज इंस्पेक्टर लखवीर सिंह पर आधारित विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया।
एसआईटी की प्राथमिक पड़ताल के दौरान सनसनीखेज तथ्य सामने आए। पुलिस ने आरोपी कैदियों विक्रमजीत सिंह, हरगोबिंद सिंह, हरजिंदर सिंह, बिंदर सिंह समेत जसकरन सिंह, बलजिंदर सिंह, गुरमीत सिंह, कृष्णदेव, सुरजीत सिंह, रछपाल सिंह, राकेश कुमार, सतीश कुमार के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट और जेल एक्ट के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। इन आरोपियों में नशा सप्लाई करने वाले कैदियों के अलावा उनके सहयोगी व बैंक अकाउंट धारक शामिल हैं।
रोज लाखों रुपये का लेनदेन
जिला पुलिस को मॉडर्न जेल के ड्रग रैकेट के सात बैंक अकाउंटों का पता चला है। इनमें रोज लाखों रुपये का लेनदेन होता था। सबसे ज्यादा चार अकाउंट अमृतसर शहर के हैं जिनमें दो स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और दो पंजाब नेशनल बैंक के हैं।
पता चला है कि इनमें से एक अकाउंट कैदी का है जबकि बाकी उसके बेटे व रिश्तेदारों के नाम पर हैं। एक-एक अकाउंट अबोहर व मुक्तसर के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और एक अकाउंट जलालाबाद के बैंक आफ इंडिया का है।
बैंक अकाउंटों को खंगालने पर पता चला कि इनमें रोज राज्य के विभिन्न शहरों से लाखों रुपये जमा होते थे और इन्हें अलग-अलग शहरों से निकाला जाता था।
कैदियों ने खोला गोरखधंधे का राज
मॉडर्न जेल के ड्रग रैकेट का राज नशे की सप्लाई लेने वाले कैदियों ने ही खोला है। कुछ दिन पहले जेल प्रशासन ने पेशी से लौटे एक विचाराधीन कैदी सुरजीत सिंह से 25 ग्राम हेरोइन बरामद की थी।
पूछताछ में सुरजीत सिंह ने इसे जेल में बेचने का खुलासा किया। इसके बाद पुलिस ने जेल के बाहर चाय स्टाल चलाने वाले राकेश कुमार को 100 ग्राम स्मैक समेत काबू किया।
राकेश से भी जानकारी मिली कि यह माल जेल के भीतर नशा बेचने वाले कैदियों को पहुंचाया जाना था। इसके बाद जेल के नशा छुड़ाओ केंद्र में दाखिल हुए कैदियों ने भी सरेआम नशा मिलने की जानकारी देकर ड्रग रैकेट की पोल खोल कर रख दी।
सब्जी में छिपा कर पहुंचता था नशा
ड्रग रैकेट से जुड़े कैदी जेल में नशा लाने के लिए कई तरीके अपनाते हैं। जेल में आने वाली सब्जी की सप्लाई इस मामले में आसान जरिया है। पुलिस की गिरफ्त में आए चाय विक्रेता राकेश कुमार ने खुलासा किया है कि उसके पास एक टाटा एस गाड़ी थी जिसका उपयोग जेल की सब्जी लाने के लिए किया जाता था।
वह जेल में जाने वाली सब्जी में ड्रग्स की खेप छिपा देता था और इसके लिए उसे 10 हजार रुपये मिलते थे। यह खेप अज्ञात लोग उसके पास पहुंचा देते थे जिसकी सूचना उसे जेल के कैदियों से पहले ही फोन पर मिल जाती थी। इसके अलावा पेशी पर जाने वाले कैदियों की भी कोरियर के रूप में सेवाएं ली जाती थीं।
मॉडर्न जेल में ड्रग रैकेट का सामने आना बहुत ही गंभीर मामला है। इसमें पड़ताल के आधार पर कुछ कैदियों समेत उनके सहयोगियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इसमें जेल कर्मियों की मिलीभगत से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। जिला पुलिस ने केस की पड़ताल सीआईए स्टाफ को सौंप दी गई है और इसमें शामिल किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।
-बलवीर सिंह, एसपी (एच), फरीदकोट