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चंडीगढ़: पुलिसवाले जबरन खिलाते थे गर्भपात की दवा
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 21 Dec 2013 01:07 PM IST
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मेरी उम्र 17 साल है। मैं दसवीं कक्षा में पढ़ती हूं। मेरे साथ पुलिस वालों ने जबरदस्ती की। उन्होंने मुझे और मेरे मां-बाप को मारने की धमकी दी।
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पांच पुलिस वाले थे। दो पुलिस वालों ने मेरा बलात्कार किया। एक ने कहा कि तू मेरे साथ छह महीने तक रिलेशन रख नहीं तो मैं तुझे मार डालूंगा।
बाकी तीन पुलिस वाले मुझे ब्लैक मेल करते और धमकी देते हम पुलिस वालों का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। मुझे जबरदस्ती गाड़ी में बिठाया और सुनसान जगह पर ले गए।
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मैंने बलात्कार से पहले भागने की कोशिश की तो मुझे मारा और सिर पर रिवाल्वर लगा दी। ...बीच रास्ते में पीसीआर वाले पीछे लग जाते थे और रेप करने के बाद मुझे दवाई खिलाते थे।
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न खाने पर मार डालने की धमकी दी जाती। इस डर से में खुदकुशी करने चली थी मगर मेरे भाई ने मुझे बचा लिया। मैं चाहती हूं कि मुझे इंसाफ मिले।
पुलिस वालों के नाम जगतार, अक्षय, हिम्मत, सुनील हैं पांचवे पुलिस वाले को में शक्ल से पहचान सकती हूं। चंडीगढ़ में पुलिस की मनमानी की शिकार दसवीं की छात्रा ने पुलिस को दी शिकायत में यह आपबीती सुनाई।
अन्य लड़कियों को भी बनाया है शिकार
17 वर्षीय पीड़िता के अनुसार पीसीआर जिप्सी स्कूल के बाहर खड़ी होती थी और जैसे ही वह बाहर निकलती थी तो पीछा कर उसे जबरन साथ बैठा लिया जाता था।
जिप्सी को सुनसान जगह पर खड़ी कर दुराचार किया जाता था। इसके अलावा पुलिसकर्मी उसे कमरे पर ले जाकर भी दुराचार करते थे।
लड़की के भाई के अनुसार उसे बहन से पता चला है कि स्कूल की कई और नाबालिग लड़कियों को भी पुलिस कर्मियों ने अपनी चंगुल में फंसा रखा था।
यही बात भाजपा पार्षद एवं वकील सौरभ जोशी ने शुक्रवार को न्यायाधीश अनिल कौशिक की अदालत में कही। इस अदालत में पीड़ित लड़की के 164 के बयान दर्ज किए गए।
जोशी ने न्यायाधीश से अपील की कि अगर वह पीड़ित लड़की से और लड़कियों के बारे में पूछेंगे तो वह जानकारी दे देगी।
फोन न उठाने पर मारा था थप्पड़
खुड्डा लाहौरा निवासी पीड़ित लड़की पिछले एक सप्ताह से काफी परेशान थी। दो दिन पहले आरोपी कांस्टेबल का जब उसने फोन नहीं उठाया तो मिलने पर उसे थप्पड़ मारा और कहा कि तेर बहुत पर निकल रहे हैं।
लड़की ने सबसे पहले ने वीरवार सुबह पड़ोस में रहने वाली दीदी को सारी जानकारी दी। उसके बाद दीदी ने उसे बताया।
मुल्लापुर के जंगल में भी ले गए थे
पीड़िता काफी गरीब परिवार से है। स्कूल से आने के बाद सेक्टर-15 में एक दुकान पर भी काम करती है। गत अक्तूबर में पिता ने शराब पीकर घर में झगड़ा किया तो पीसीआर को कॉल किया गया था।
उसके बाद दशहरे से एक दिन पहले जब लड़की रामलीला देखकर लौट रही थी तो पीसीआर पर तैनात अक्षय ने उससे फोन नंबर लिया तब उसे कोई शक नहीं हुआ।
उसके बाद अक्षय उसे निरंतर तंग करने लगा। उसने अन्य कर्मचारियों को भी लड़की का मोबाइल नंबर बांट दिया। भाई ने बताया कि एक बार सितंबर में अक्षय पीसीआर की गाड़ी लेकर उनके घर पर आया था।
पीड़ित लड़की ने पुलिस को बताया कि आरोपी अक्षय और सुनील ने उसके साथ अपने कमरे, पीसीआर गाड़ी के साथ एक निजी गाड़ी में भी दुराचार किया।
एक बार आरोपी उसे मुलापुर के जंगलों में भी ले गए और दुराचार किया। लड़की ने पुलिस को बताया कि सेक्टर-15 से जब काम से वह वापस लौटती थी तो आरोपी कर्मचारी उसे अपने साथ दुराचार के लिए ले जाते थे।
कई बार दुकान के बाहार से और स्कूल के बाद भी ले जाते थे। कई बार पीड़ित लड़की का अपना मोबाइल फोन भी बंद कर लेती थी।
अब पुलिस लड़की के मोबाइल नंबर की भी जांच कर रही है जिससे यह पता चल सके कि किस किस कर्मचारी ने कब कब फोन किया है।
पुलिस से डर रहे थे मां-बाप
पीड़िता के मां-बाप पुलिस और बदनामी के डर से मामले को सामने लाने में हिचक रहे थे। लड़की के चचेरे भाई ने उन्हें समझाया कि हम न्याय के लिए लड़ेंगे अगर हमारी नहीं सुनी तो हम शहर छोड़ कर कहीं दूसरी जगह बस जाएंगे। पीड़िता की तीन छोटी बहनें भी हैं।