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वाटर स्टोरेज बढ़ाने के लिए स्मार्ट सिटी से 11 करोड़ लेगा निगम

Wed, 10 Jun 2020 09:18 PM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Wed, 10 Jun 2020 09:18 PM IST
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Corporation to take 11 crore from smart city to increase water storage
चंडीगढ़। शहर में एक दिन की पानी की क्षमता बढ़ाने के लिए नगर निगम स्मार्ट सिटी से 11 करोड़ रुपये लेगा। साथ ही निगम अगले सप्ताह 38 करोड़ रुपये में प्रोजेक्ट के लिए टेंडर करेगा। बुधवार को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की बैठक में यह निर्णय लिया गया। स्मार्ट सिटी के सीईओ केके यादव ने बताया कि निगम के पास 29 करोड़ रुपये थे। सदन की बैठक में कई बार तय हुआ कि प्रशासन से कई बार फंड मांगने के बावजूद नहीं मिला, इसलिए शेष राशि स्मार्ट सिटी से ले ली जाए। चूंकि यह कार्य भी शहर के विकास का कार्य है।
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सेक्टर-39 स्थित वाटर वर्क्स में कजौली से आने वाले पानी को स्टोर किया जाता है। उसके बाद अलग-अलग वाटर वर्क्स को सप्लाई किया जाता है। यहां पानी की टेस्टिंग के साथ ही पानी को स्टोर भी किया जाता है, लेकिन निगम के पास केवल आधे दिन के पानी स्टोरेज की क्षमता है। कजौली स्थित पंप के सभी फेज से पानी सप्लाई ठप होती है तो फिर शहर में पानी की किल्लत शुरू हो जाती है। ऐसे में निगम को टैंकरों का सहारा लेना पड़ता है। निगम ने वाटर स्टोरेज का एजेंडा तो काफी समय पहले पास कर दिया था, लेकिन प्रशासन से फंड न मिलने से स्टोरेज क्षमता नहीं बढ़ाई जा सकी। अब निगम ने अपने ही फंड से पानी की स्टोरेज क्षमता बढ़ाने का फैसला लिया है।
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गर्मियों में हर साल बढ़ जाती है समस्या
सेक्टर-39 वॉटर वर्क्स से शहर के सेक्टर-12, 26, 32, 37, 52 और मनीमाजरा के दो वॉटर वर्क्स को पानी की सप्लाई होती है। वर्तमान में कजौली वाटर वर्क्स से शहर में छह फेज से 87 एमजीडी पानी की सप्लाई हो रही है। शहर में फिलहाल पानी की खपत 90 एमजीडी है, जबकि गर्मियों में डिमांड 125 एमजीडी तक पहुंच जाती है। ऐसी स्थिति में टैंकर से ही पानी की सप्लाई होती है। अगस्त माह में पंप खराब होने से कजौली वाटर वर्क्स के चारों फेज की सप्लाई ठप हो गई थी। इससे शहर में लगभग तीन से चार दिन तक हाहाकार मच गया था। निगम ने अपने 17 टैंकर व 50 किराये पर लेकर सप्लाई करवाई। इसके बावजूद लोगों तक पानी नहीं पहुंच सका था।
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सांसद व मेयर ने पानी स्टोरेज के लिए मांगा था 38 करोड़
28 सितंबर को उद्घाटन के समय तत्कालीन मेयर राजेश कालिया ने प्रशासक से अपील की थी कि अतिरिक्त पानी तो आ गया है, लेकिन उसे स्टोरेज करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। जब कजौली वाटर वर्क्स पर कोई खराबी होती है या पाइप लाइन टूटती है तो पेयजल सप्लाई ठप हो जाती है। प्रशासन की ओर से 38 करोड़ का फंड मिल जाए तो यह समस्या भी हल हो जाएगी। उसके बाद सांसद ने गवर्नर से अपील की कि यह फंड उपलब्ध कराया जाए। प्रशासक ने कहा कि विकास कार्य कोई भी अवरुद्ध नहीं होना चाहिए, लेकिन फंड के लिए हां नहीं किया।
इंटीग्रेटेड सिटी कमांड कंट्रोल सेंटर के लिए लगी अंतिम मुहर
बैठक में इंटीग्रेटेड सिटी कमांड कंट्रोल सेंटर (आइसीसीसीसी) के लिए बेल से अनुबंध पर अंतिम मुहर लग गई। शहर में 250 किमी तक ऑप्टिकल फाइबर केबल डालने के साथ ही सेंटर बनाने का रास्ता भी अब साफ हो गया है। केबल बिछाने के लिए चार्ज माफ करने व 48 पेड़ काटने के लिए कंपनी को पहले ही अनुमति मिल चुकी है। इस व्यवस्था से शहर के एंट्री पॉइंट पर कैमरों के अलावा अन्य 40 व्यवस्थाएं ऑनलाइन हो जाएंगी। सेंटर में पुलिस, नगर निगम व स्काडा तीनों के ऑफिस बनेंगे।

मैटेरियल रिकवरी सेंटर बनाने व डड्डूमजरा में लैंडफिल बनाने का प्रस्ताव भी पास
शहर में बनने वाले तीन मैटेरियल रिकवरी सेंटर बनाने व डड्डूमाजरा में लैंडफिल बनाने के लिए भी प्रस्ताव पास हो गया। अब शहर का सूखा, गीला व खतरनाक कचरा इन सेंटरों पर जाकर अलग-अलग होगा। वहां से कचरा डंपिंग ग्राउंड भेजा जाएगा।
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