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जीरकपुरः खाने को रोटी नहीं, मकान मालिक मांगते किराया तो कैसे रुक जाएं...जाना ही बेहतर है
Tue, 19 May 2020 02:19 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, जीरकपुर
अमर उजाला, जीरकपुर
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 19 May 2020 02:19 PM IST
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जीरकपुर रोड पर जमा हुआ प्रवासी मजदूर
- फोटो : अमर उजाला
हम यहां कैसे रुक सकते हैं बेशक बिल्डरों ने काम शुरू कर दिया है और हमको भी आगे काम मिल जाएगा। हमारी समस्या अब काम से ज्यादा है किराया। हमारे पास न तो खाने को है न ही पैसे ऐसी स्थिति में हम या भूखे मर जाएं या फिर घर जाएं। यह आवाज है उन छह सौ मजदूरों की जोकि पिछले पांच दिनों से राधास्वामी सत्संग भवन के सामने डेरा डाले हैं।
इन मजदूरों को इंतजार है अपनी बारी का। छपरा जाने के लिए बैठे इन मजदूरों को दिन में तपती धूप का सामना करना पड़ता है तो रात को मच्छरों और गर्मी से जूझना पड़ता है। राधास्वामी सत्संग भवन के सामने रूके हुए राम खिलावन ने बताया कि उनके मकान मालिक ने उनसे किराया मांगा। उन्होंने जब कहा कि उनके पास कुछ नहीं है तो बोले खाली कर दीजिए।
ऐसी स्थिति में उनके पास चारा सिर्फ यही है कि वह अपने घर लौट जाएं। कम से कम नमक रोटी तो खाने को मिलेगी। वहीं कोई काम भी कर लेंगे। छपरा जाने के लिए अपने भाई के साथ मौजूद गंगा देवी ने बताया कि उनके पति ठेकेदार के अंडर में एक कंपनी में काम करते थे लेकिन लाकडाउन के कारण सारा कुछ खत्म हो गया। अब घर जाना ही एकमात्र रास्ता है।
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इन मजदूरों को इंतजार है अपनी बारी का। छपरा जाने के लिए बैठे इन मजदूरों को दिन में तपती धूप का सामना करना पड़ता है तो रात को मच्छरों और गर्मी से जूझना पड़ता है। राधास्वामी सत्संग भवन के सामने रूके हुए राम खिलावन ने बताया कि उनके मकान मालिक ने उनसे किराया मांगा। उन्होंने जब कहा कि उनके पास कुछ नहीं है तो बोले खाली कर दीजिए।
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ऐसी स्थिति में उनके पास चारा सिर्फ यही है कि वह अपने घर लौट जाएं। कम से कम नमक रोटी तो खाने को मिलेगी। वहीं कोई काम भी कर लेंगे। छपरा जाने के लिए अपने भाई के साथ मौजूद गंगा देवी ने बताया कि उनके पति ठेकेदार के अंडर में एक कंपनी में काम करते थे लेकिन लाकडाउन के कारण सारा कुछ खत्म हो गया। अब घर जाना ही एकमात्र रास्ता है।
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हरदोई जाने के लिए बैठे हैं दो सौ लोग
राधास्वामी सत्संग भवन के सामने करीब दो सौ मजदूर ऐसे बैठे हैं जिनको हरदोई और लखनऊ जाना है। मजदूरों की समस्या यह है कि उनके पास आधार कार्ड उस शहर के नहीं हैं जहां के वह रहने वाले हैं। ट्रेन कुछ सीमित जगह ही रुकती है। ऐसी स्थिति में इन मजदूरों ने गुहार भी की कि किसी पास के स्टेशन पर उतार दें जिससे कि वह वहां से अपने घर चले जाएंगे लेकिन इस मांग पर अभी कोई विचार नहीं किया गया।
अभी नहीं रुकना, बाद में आ जाएंगे
कोरोना वायरस के कारण बदल हुए हालात में अब कोई भी मजदूर यहां रुकने को तैयार नहीं। ज्यादातर मजदूरों का कहना है कि काम शुरू हो गया पर अभी उनको अपनी सुरक्षा की ज्यादा फिक्र है। इन मजदूरों का कहना है कि अभी तो वह यहां से जाएंगे, बाद में चाहे वापस लौट आएं। मजदूरों का कहना है कि लाकडाउन जिस तरह से बढ़ाया जा रहा है उससे ऐसा लगता है कि यह ज्यादा लंबा चलेगा। ऐसी स्थिति में उनको और उनके परिवारों को कौन खाना देगा।
अभी नहीं रुकना, बाद में आ जाएंगे
कोरोना वायरस के कारण बदल हुए हालात में अब कोई भी मजदूर यहां रुकने को तैयार नहीं। ज्यादातर मजदूरों का कहना है कि काम शुरू हो गया पर अभी उनको अपनी सुरक्षा की ज्यादा फिक्र है। इन मजदूरों का कहना है कि अभी तो वह यहां से जाएंगे, बाद में चाहे वापस लौट आएं। मजदूरों का कहना है कि लाकडाउन जिस तरह से बढ़ाया जा रहा है उससे ऐसा लगता है कि यह ज्यादा लंबा चलेगा। ऐसी स्थिति में उनको और उनके परिवारों को कौन खाना देगा।