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रोडरेज का मामला: नवजोत सिद्धू ने सुप्रीम कोर्ट से किया अनुरोध- 33 साल पहले के मामले में पुनर्विचार याचिका खारिज की जाए

Fri, 25 Feb 2022 02:36 PM IST
निवेदिता वर्मा एएनआई, चंडीगढ़
एएनआई, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 25 Feb 2022 02:36 PM IST
सार

यह मामला दिसंबर 1988 का है। सिद्धू पटियाला में कार से जाते समय बुजुर्ग गुरनाम सिंह से भिड़ गए थे। गुस्से में सिद्धू ने उन्हें मुक्का मारा जिसके बाद गुरनाम सिंह की मौत हो गई थी।

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Congress leader Navjot Sidhu urges Supreme Court to dismiss review petition in road rage case against him
नवजोत सिद्धू। - फोटो : ANI

विस्तार

कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने सुप्रीम कोर्ट से अपने खिलाफ रोडरेज मामले में दायर पुनर्विचार याचिका खारिज करने का अनुरोध किया है। सिद्धू ने पुनर्विचार याचिका के जवाब में कहा कि यह घटना 33 साल पहले की है और याचिका विचारणीय नहीं है। सिद्धू ने अपनी स्वच्छ प्रतिष्ठा का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट से मामले में उनकी सजा में बदलाव नहीं करने का आग्रह भी किया। सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धू के वकील से नोटिस का दायरा बढ़ाने की मांग वाली एक अर्जी पर जवाब दाखिल करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को दो हफ्ते बाद लिस्ट किया है। 

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इससे पहले तीन फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने नवजोत सिद्धू पर रोडरेज के दौरान गैर इरादतन हत्या के दर्ज मामले में 25 फरवरी तक सुनवाई टाल दी थी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में सिद्धू को मात्र एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद पीड़ित पक्ष ने इस पर पुनर्विचार याचिका दायर की थी। 
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सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश को 15 मई 2018 को दरकिनार कर दिया था जिसमें रोडरेज के मामले में सिद्धू को गैरइरादतन हत्या का दोषी ठहराते हुए तीन साल कैद की सजा सुनाई थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धू को एक 65 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक को जानबूझकर चोट पहुंचाने का दोषी माना था लेकिन उन्हें जेल की सजा नहीं दी थी और 1000 रुपये का जुर्माना लगाया था। भारतीय दंड संहिता की धारा 323 के तहत इस अपराध के लिए अधिकतम एक साल जेल की सजा या 1000 रुपये जुर्माने या दोनों का प्रावधान है। 

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1988 का है मामला

यह मामला दिसंबर 1988 का है। सिद्धू पटियाला में कार से जाते समय बुजुर्ग गुरनाम सिंह से भिड़ गए थे। गुस्से में सिद्धू ने उन्हें मुक्का मारा जिसके बाद गुरनाम सिंह की मौत हो गई थी। पटियाला पुलिस ने सिद्धू और उनके दोस्त रुपिंदर सिंह के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया था। निचली अदालत ने 1999 में सिद्धू को बरी कर दिया था लेकिन पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने 2006 में सिद्धू को इस मामले में तीन साल की सजा सुनाई थी। सिद्धू तब भाजपा के अमृतसर से सांसद थे। सजा के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद सिद्धू ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले का चुनौती दी थी। 

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