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कर्नल मनप्रीत सिंह: तीन पीढ़ियां कर चुकी हैं देश की सेवा, अब मनप्रीत ने दिया सर्वोच्च बलिदान
Thu, 14 Sep 2023 02:09 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 14 Sep 2023 02:09 PM IST
सार
मनप्रीत वर्ष 2003 में सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल बने थे। वर्ष 2005 में उन्हें कर्नल के पद पर पदोन्नत किया गया था। इसके बाद उन्होंने देश के दुश्मनों को मार गिराने के लिए चलाए गए भारतीय सेना के कई अभियानों का नेतृत्व किया।
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परिवार के साथ कर्नल मनप्रीत सिंह।
- फोटो : फाइल
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विस्तार
जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में आतंकियों से मुठभेड़ में मोहाली के मुल्लांपुर के साथ लगते गांव भड़ौंजिया के कर्नल मनप्रीत सिंह (41) शहीद हो गए हैं। उनकी शहादत की खबर जैसे ही गांव पहुंची मातम छा गया। गांव वालों की आंखें नम थीं। हर कोई उनकी बहादुरी के चर्चे कर रहा था। उनका शव शुक्रवार को मोहाली पहुंचने की संभावना है।
परिजनों ने बताया कि कर्नल मनप्रीत ने कई बार अदम्य साहस का परिचय देते हुए दुश्मनों के छक्के छुड़ाए थे। इस बहादुरी के लिए भारतीय सेना ने उन्हें सेना मेडल से अलंकृत किया था। उनकी मां मनजीत कौर ने बताया कि मनप्रीत बचपन से ही पढ़ने में होशियार था। उसकी पढ़ाई मुल्लांपर स्थित एयरफोर्स स्टेशन के पास बने केंद्रीय विद्यालय में हुई थी।
यह भी पढ़ें: Major Ashish Dhonchak: हरियाणा का लाल कश्मीर में शहीद; सेना-आतंकियों में मुठभेड़, तीन बहनों का था इकलौता भाई
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मनप्रीत वर्ष 2003 में सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल बने थे। वर्ष 2005 में उन्हें कर्नल के पद पर पदोन्नत किया गया था। इसके बाद उन्होंने देश के दुश्मनों को मार गिराने के लिए चलाए गए भारतीय सेना के कई अभियानों का नेतृत्व किया। छोटे भाई संदीप सिंह ने बताया कि कर्नल मनप्रीत सिंह वर्ष 2019 से 2021 तक सेना में सेकंड इन कमांड के तौर पर तैनात थे। बाद उन्होंने कमांडिंग अफसर के रूप में काम किया।
परिवार तीन पीढ़ियों से कर रहा देश की सेवा
कर्नल मनप्रीत अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी थी जो सरहद पर देश की सेवा कर रही थी। कर्नल मनप्रीत सिंह के दादा शीतल सिंह, पिता स्व. लखमीर सिंह और चाचा रणजीत सिंह भी भारतीय सेना में थे। पिता ने सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी में सुरक्षा सुपरवाइजर की नौकरी की। उनके निधन के बाद उनके छोटे बेटे संदीप सिंह (38) को वहां जूनियर असिस्टेंट की नौकरी मिल गई थी।
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परिजनों ने बताया कि कर्नल मनप्रीत ने कई बार अदम्य साहस का परिचय देते हुए दुश्मनों के छक्के छुड़ाए थे। इस बहादुरी के लिए भारतीय सेना ने उन्हें सेना मेडल से अलंकृत किया था। उनकी मां मनजीत कौर ने बताया कि मनप्रीत बचपन से ही पढ़ने में होशियार था। उसकी पढ़ाई मुल्लांपर स्थित एयरफोर्स स्टेशन के पास बने केंद्रीय विद्यालय में हुई थी।
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मनप्रीत वर्ष 2003 में सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल बने थे। वर्ष 2005 में उन्हें कर्नल के पद पर पदोन्नत किया गया था। इसके बाद उन्होंने देश के दुश्मनों को मार गिराने के लिए चलाए गए भारतीय सेना के कई अभियानों का नेतृत्व किया। छोटे भाई संदीप सिंह ने बताया कि कर्नल मनप्रीत सिंह वर्ष 2019 से 2021 तक सेना में सेकंड इन कमांड के तौर पर तैनात थे। बाद उन्होंने कमांडिंग अफसर के रूप में काम किया।
परिवार तीन पीढ़ियों से कर रहा देश की सेवा
कर्नल मनप्रीत अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी थी जो सरहद पर देश की सेवा कर रही थी। कर्नल मनप्रीत सिंह के दादा शीतल सिंह, पिता स्व. लखमीर सिंह और चाचा रणजीत सिंह भी भारतीय सेना में थे। पिता ने सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी में सुरक्षा सुपरवाइजर की नौकरी की। उनके निधन के बाद उनके छोटे बेटे संदीप सिंह (38) को वहां जूनियर असिस्टेंट की नौकरी मिल गई थी।
कर्नल मनप्रीत सिंह के ससुर जगदेव सिंह ने बताया कि हमें कल शाम को उनकी शहादत के बारे में पता चला। उनका पार्थिव शरीर शाम 4-5 बजे के बीच मोहाली पहुंचेगा। वहीं कर्नल मनप्रीत के बहनोई वीरेंद्र गिल ने बताया कि हमने उनसे आखिरी बार सुबह 6:45 बजे बात की थी। उन्होंने कहा कि वह बाद में बात करेंगे। गिल ने कहा कि वह एक अच्छे इंसान थे। पिछले साल, उन्हें उनके कर्तव्य के लिए सेना मेडल से सम्मानित किया गया था। मैं उन्हें सलाम करता हूं। परिवार के अनुसार मनप्रीत सिंह अगले माह बेटे के जन्मदिन पर घर आने वाले थे लेकिन उससे पहले उनकी शहादत की खबर आ गई।