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Major Ashish Dhonchak: हरियाणा का लाल कश्मीर में शहीद; सेना-आतंकियों में मुठभेड़, तीन बहनों का था इकलौता भाई

Wed, 13 Sep 2023 09:23 PM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, पानीपत (हरियाणा)
अमर उजाला ब्यूरो, पानीपत (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Wed, 13 Sep 2023 09:23 PM IST
सार

हरियाणा के पानीपत के लाल देश के लिए आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए। वह तीन बहनों के इकलौता भाई थे। छह महीने पहले साले की शादी में छुट्टी लेकर घर आ थे। पिता व मां पानीपत के सेक्टर-सात में किराये के मकान में रहते हैं।

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Major Ashish Dhonchak of Panipat Haryana martyred in Kashmir
Martyr Major Ashish Dhaunchak. शहीद मेजर आशीष धौंचक। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

हरियाणा के पानीपत जिले के बिंझौल गांव के लाल मेजर आशीष धौंचक जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हो गया। वह तीन बहनों  के इकलौता भाई थे। उसके शहीद होने पर परिवार और गांव में मातम पसर गया है। पिता एनएफएल से सेवानिवृत्त होने के बाद सेक्टर-7 में किराये के मकान में रहते हैं। मेजर आशीष छह महीने पहले अपने साले की शादी में छुट्टी लेकर घर आए थे। वह सेना मेडल के लिए नामित भी हुए थे। प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों ने शहीद के घर पहुंचकर परिवार को सांत्वना दी।

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बुधवार शाम को सेना से फोन पर मेजर आशीष धौंचक के शहीद होने की सूचना मिली। कुछ ही देर में बात गांव में आग की तरह फैल गई। गांव के लोग सेक्टर-7 में पहुंचे। यहां शहीद मेजर के पिता लालचंद और मां कमला देवी रहती हैं। परिजनों ने बताया कि मेजर आशीष तीन बहनों के इकलौते भाई थे। उन्हें चार-पांच साल की एक बेटी है।
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बताया जा रहा है कि शहीद मेजर आशीष की ससुराल जींद में है। वे मार्च में अपने साले की शादी में छुट्टी पर आए थे। इस दौरान अपने घर पर भी आए थे। उनका टीडीआई सिटी में मकान निर्माणाधीन है। मकान के मुहूर्त पर मेजर आशीष को छुट्टी पर आना था।
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आशीष के घर पहुंच लोग। अमर उजाला

लेफ्टिनेंट पद पर भर्ती हुए थे शहीद आशीष

शहीद मेजर आशीष सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर भर्ती हुए थे। उसी समय उनके चाचा के बेटे भी सेना में भर्ती हुए थे। आशीष पढ़ाई में अव्वल थे। वे अपनी काबिलियत पर पदोन्नति लेते रहे। परिजनों ने बताया कि आशीष बहादुर थे और दुश्मनों से सीधे भिड़ जाते थे।

माता-पिता को ढांढस बंधा रहे ग्रामीण
परिजनों ने बताया कि शहीद मेजर आशीष धौंचक के पिता लालचंद सिंह चार भाइयों में सबसे बड़े हैं। लालचंद एनएफएल से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनके दूसरे चाचा दिलावर एयरफोर्स से सेवानिवृत्त हैं और अब सेक्टर-18 में रहते हैं। दिलावर का एक बेटा भी सेना में मेजर है। तीसरे नंबर के बलवान बिंझौल गांव में रहते हैं और चौथे दिलबाग गुरुग्राम में रहते हैं। माता-पिता को सांत्वना देने वालों का घर पर तांता लगा रहा।

आतंकवादियों की हलचल की सूचना पर शुरू किया था ऑपरेशन

गडोले इलाके में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन मंगलवार शाम को शुरू हुआ था, लेकिन रात में इसे बंद कर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि आज सुबह आतंकवादियों की तलाश तब फिर से शुरू हुई जब सूचना मिलने लगी कि उन्हें एक ठिकाने पर देखा गया है। कर्नल सिंह ने आगे से अपनी टीम का नेतृत्व करते हुए आतंकियों पर हमला बोल दिया। हालांकि, आतंकवादियों ने उन पर गोलीबारी की और वह गंभीर रूप से घायल हो गए।

राजोरी में दो आतंकियों को मार गिराया
इससे पहले जम्मू संभाग के राजोरी जिले में मंगलवार शाम आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच हुई मुठभेड़ हुई। इसमें दो आतंकियों को मार गिराया गया है। राजोरी एनकाउंटर को लेकर एडीजीपी जम्मू मुकेश सिंह ने बताया कि दूसरे आतंकी को बुधवार को ढेर कर दिया गया है। मंगलवार शाम को शुरू हुई मुठभेड़ में एक आतंकी को मारा गया था। इसके बाद देर रात को गोलीबारी रुक गई थी। बुधवार सुबह एक बार फिर ऑपरेशन शुरू हुआ, जिसमें सुरक्षाबलों को सफलता मिली है। हालांकि, मुठभेड़ में सेना का एक जवान भी शहीद हुआ है। इसके अलावा एक पुलिस एसपीओ सहित तीन घायल हुए हैं। 



ये भी पढ़ें- J&K: राजोरी मुठभेड़ में दूसरा आतंकी भी ढेर, जवान रवि कुमार शहीद, गोली लगने से लैब्राडोर डॉग केंट की गई जान

राजोरी मुठभेड़ में सेना का डॉग केंट भी शहीद
राजोरी मुठभेड़ के दौरान एक सैनिक की जान बचाते हुए छह वर्षीय सेना के डॉग केंट शहीद हो गया। इससे पहले वह नौ ऑपरेशनों में भाग ले चुका था। केंद्र शासित प्रदेश के राजोरी जिले में अपने हैंडलर को बचाने की कोशिश में मंगलवार को 21वीं सेना की डॉग यूनिट में शामिल केंट ने जान गवां दी। एक अधिकारी ने जानकारी देते हुए कहा कि केंट भाग रहे आतंकवादियों का पीछा कर रहे सैनिकों की एक टुकड़ी का नेतृत्व कर रहा था। हमारे केंट ने अपने हैंडलर को बचाने के लिए अपनी जान दे दी। उसने सबसे पहले आगे बढ़कर आतंकवादी पर हमला किया।

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