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Chandigarh News: अंगूठे से हस्ताक्षर तक... चंडीगढ़ ने लिखी साक्षरता की नई कहानी
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चंडीगढ़। कभी जो लोग कागज पर अंगूठा लगाते थे, आज वही अपना नाम लिख रहे हैं। कई लोग अब अखबार पढ़ लेते हैं तो कुछ अपने बच्चों की पढ़ाई में भी मदद कर रहे हैं। लोगों की इसी मेहनत का नतीजा है कि चंडीगढ़ ने 99.93 प्रतिशत साक्षरता दर हासिल कर देश का पूर्ण साक्षर केंद्र शासित प्रदेश बनने का गौरव हासिल किया है। अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस 8 सितंबर को मनाया जाता है। इस बार इसका विषय ‘लोगों, पृथ्वी और समृद्धि के लिए साक्षरता’ रखा गया है।
चंडीगढ़ की साक्षरता दर पहले 93.7 प्रतिशत थी। अब इसमें करीब छह प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस उपलब्धि के साथ शहर ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत तय 95 प्रतिशत साक्षरता के लक्ष्य को भी पार कर लिया है। इसमें महिलाओं की बढ़ी साक्षरता दर की भी अहम भूमिका रही। महिला साक्षरता 90.7 प्रतिशत से बढ़कर 99.89 प्रतिशत हो गई है। यानी अब शहर की लगभग पूरी महिला आबादी पढ़ना-लिखना जानती है।
उम्र की दीवार तोड़कर किताब-कॉपी से जुड़े लोग
चंडीगढ़ पूर्ण साक्षरता हासिल करने वाला देश का छठा राज्य/केंद्र शासित प्रदेश और दूसरा केंद्र शासित प्रदेश बन गया है। यह उपलब्धि केवल आंकड़ों में बढ़ोतरी नहीं, बल्कि उन लोगों के जीवन में आए बदलाव की कहानी है, जिन्होंने उम्र की परवाह किए बिना पढ़ना शुरू किया। किसी ने पहली बार अपना नाम लिखना सीखा तो किसी ने जरूरी कागज खुद पढ़ना शुरू किया। कई लोगों के लिए पढ़ाई आत्मविश्वास बढ़ाने का जरिया बनी और अब वे छोटे-छोटे कामों के लिए दूसरों पर कम निर्भर हैं।
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उल्लास कार्यक्रम से बदली तस्वीर
उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम ने उन लोगों को पढ़ाई से जोड़ने का काम किया, जो कभी स्कूल नहीं जा पाए थे। शहर में करीब 15 हजार लोगों ने इस पहल के तहत परीक्षा दी। इनमें बड़ी उम्र के लोग भी शामिल थे, जिन्होंने बच्चों की तरह फिर से किताब और कॉपी उठाई। पढ़ाई के साथ मोबाइल चलाने और डिजिटल कामों की जानकारी मिलने से भी लोगों का आत्मविश्वास बढ़ा। इसका असर उनकी रोजमर्रा की जिंदगी में साफ नजर आया।
अब क्यूआर कोड से नहीं लगता डर
40 वर्षीय राम चंद्र यादव दुकान लगाते हैं। उन्होंने उल्लास कार्यक्रम में हिस्सा लिया। वह बताते हैं कि इससे जुड़ने से पहले उन्हें पढ़ना-लिखना नहीं आता था। आजकल डिजिटल भुगतान के लिए क्यूआर कोड का इस्तेमाल आम है, लेकिन इसकी जानकारी न होने के कारण उन्हें पहले डर लगता था। उल्लास कार्यक्रम में पढ़ना-लिखना सीखने के साथ उन्होंने मोबाइल चलाना और डिजिटल लेन-देन भी सीखा। अब वह आसानी से क्यूआर कोड के जरिए भुगतान कर लेते हैं। साथ ही बच्चों की पढ़ाई में भी मदद करते हैं।
अब बच्चों की किताबें खुद देखती हैं शबनम
36 वर्षीय शबनम ने भी उल्लास कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उनके बच्चे मलोया स्कूल में पढ़ते हैं और उन्हें इसी स्कूल के माध्यम से कार्यक्रम की जानकारी मिली। शबनम बताती हैं कि पहले पढ़ी-लिखी न होने के कारण वह बच्चों की पढ़ाई में ज्यादा मदद नहीं कर पाती थीं। अब पढ़ना-लिखना सीखने के बाद वह बच्चों की किताबें खुद देखती हैं और उनकी पढ़ाई में मदद करती हैं। पहले पैसे गिनने और हिसाब रखने में भी परेशानी होती थी, लेकिन अब वह आसानी से गिनती और पैसों का हिसाब कर लेती हैं।
पूर्ण साक्षरता हासिल करने वाले
पहला : मिजोरम
दूसरा : गोवा
तीसरा : त्रिपुरा
चौथा : हिमाचल प्रदेश
पांचवां : सिक्किम
छठा : चंडीगढ़
पूर्ण साक्षर केंद्र शासित प्रदेश :
पहला : लद्दाख
दूसरा : चंडीगढ़
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चंडीगढ़ की साक्षरता दर पहले 93.7 प्रतिशत थी। अब इसमें करीब छह प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस उपलब्धि के साथ शहर ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत तय 95 प्रतिशत साक्षरता के लक्ष्य को भी पार कर लिया है। इसमें महिलाओं की बढ़ी साक्षरता दर की भी अहम भूमिका रही। महिला साक्षरता 90.7 प्रतिशत से बढ़कर 99.89 प्रतिशत हो गई है। यानी अब शहर की लगभग पूरी महिला आबादी पढ़ना-लिखना जानती है।
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उम्र की दीवार तोड़कर किताब-कॉपी से जुड़े लोग
चंडीगढ़ पूर्ण साक्षरता हासिल करने वाला देश का छठा राज्य/केंद्र शासित प्रदेश और दूसरा केंद्र शासित प्रदेश बन गया है। यह उपलब्धि केवल आंकड़ों में बढ़ोतरी नहीं, बल्कि उन लोगों के जीवन में आए बदलाव की कहानी है, जिन्होंने उम्र की परवाह किए बिना पढ़ना शुरू किया। किसी ने पहली बार अपना नाम लिखना सीखा तो किसी ने जरूरी कागज खुद पढ़ना शुरू किया। कई लोगों के लिए पढ़ाई आत्मविश्वास बढ़ाने का जरिया बनी और अब वे छोटे-छोटे कामों के लिए दूसरों पर कम निर्भर हैं।
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उल्लास कार्यक्रम से बदली तस्वीर
उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम ने उन लोगों को पढ़ाई से जोड़ने का काम किया, जो कभी स्कूल नहीं जा पाए थे। शहर में करीब 15 हजार लोगों ने इस पहल के तहत परीक्षा दी। इनमें बड़ी उम्र के लोग भी शामिल थे, जिन्होंने बच्चों की तरह फिर से किताब और कॉपी उठाई। पढ़ाई के साथ मोबाइल चलाने और डिजिटल कामों की जानकारी मिलने से भी लोगों का आत्मविश्वास बढ़ा। इसका असर उनकी रोजमर्रा की जिंदगी में साफ नजर आया।
अब क्यूआर कोड से नहीं लगता डर
40 वर्षीय राम चंद्र यादव दुकान लगाते हैं। उन्होंने उल्लास कार्यक्रम में हिस्सा लिया। वह बताते हैं कि इससे जुड़ने से पहले उन्हें पढ़ना-लिखना नहीं आता था। आजकल डिजिटल भुगतान के लिए क्यूआर कोड का इस्तेमाल आम है, लेकिन इसकी जानकारी न होने के कारण उन्हें पहले डर लगता था। उल्लास कार्यक्रम में पढ़ना-लिखना सीखने के साथ उन्होंने मोबाइल चलाना और डिजिटल लेन-देन भी सीखा। अब वह आसानी से क्यूआर कोड के जरिए भुगतान कर लेते हैं। साथ ही बच्चों की पढ़ाई में भी मदद करते हैं।
अब बच्चों की किताबें खुद देखती हैं शबनम
36 वर्षीय शबनम ने भी उल्लास कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उनके बच्चे मलोया स्कूल में पढ़ते हैं और उन्हें इसी स्कूल के माध्यम से कार्यक्रम की जानकारी मिली। शबनम बताती हैं कि पहले पढ़ी-लिखी न होने के कारण वह बच्चों की पढ़ाई में ज्यादा मदद नहीं कर पाती थीं। अब पढ़ना-लिखना सीखने के बाद वह बच्चों की किताबें खुद देखती हैं और उनकी पढ़ाई में मदद करती हैं। पहले पैसे गिनने और हिसाब रखने में भी परेशानी होती थी, लेकिन अब वह आसानी से गिनती और पैसों का हिसाब कर लेती हैं।
पूर्ण साक्षरता हासिल करने वाले
पहला : मिजोरम
दूसरा : गोवा
तीसरा : त्रिपुरा
चौथा : हिमाचल प्रदेश
पांचवां : सिक्किम
छठा : चंडीगढ़
पूर्ण साक्षर केंद्र शासित प्रदेश :
पहला : लद्दाख
दूसरा : चंडीगढ़