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Chandigarh News: कैफी! ये हौसला तुमसे कोई नहीं छीन सकता, तुम हमारे लिए मिसाल हो
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चंडीगढ़। कैफी तुम्हारा हौसला और कुछ कर दिखाने की ललक तुमसे कोई नहीं छीन सकता, तुम हम सबके लिए एक मिसाल हो। तुमको खूब सारा प्यार और ढेरों बधाइयां... ये शब्द हैं प्रियंका गांधी वाड्रा के, जिन्हें सोमवार को उन्होंने अपने फेसबुक प्रोफाइल पर साझा किया। एसिड अटैक में अपनी आंखें गंवा देने के बावजूद सीबीएसई दसवीं में स्कूल में टॉप करने वाली कैफी के लिए लिखे गए ये शब्द सभी को भावुक कर गए। इसे सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया गया। बता दें कि कैफी चंडीगढ़ के सेक्टर-26 स्थित इंस्टीट्यूट फॉर ब्लाइंड की छात्रा हैं और मूल रूप से हिसार (हरियाणा) की रहने वाली हैं। हाल ही में जारी सीबीएसई दसवीं की बोर्ड परीक्षा के परिणामों में कैफी ने 95.5 प्रतिशत अंक लाकर स्कूल टॉप किया था। स्कूल टॉप करने के बाद उन्होंने कहा था कि वह आईएएस अधिकारी बनना चाहती हैं। सोमवार को प्रियंका गांधी वाड्रा ने कैफी के हौसले को सलाम करते हुए अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर लिखा कि ‘चंडीगढ़ की रहने वाली कैफी की बहादुरी और जज्बा हम सबके लिए एक मिसाल है। तीन साल की उम्र में एसिड अटैक से आंखें गंवा देने वाली कैफी ने दसवीं की परीक्षा में स्कूल टॉप किया है। वह पढ़-लिखकर आईएएस अधिकारी बनना चाहती हैं। कैफी का हौसला और कुछ कर दिखाने की ललक उनसे कोई नहीं छीन सकता। कैफी को खूब सारा प्यार और ढेरों बधाइयां। मैं कैफी के उज्जवल भविष्य की कामना करती हूं।’
उधर, कैफी को जब इस बात की जानकारी मिली तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि उनके दोस्त ने उन्हें बताया कि प्रियंका गांधी वाड्रा ने उनकी कहानी सबके साथ साझा की है। कैफी ने कहा प्रियंका गांधी वाड्रा ने उनकी मेहनत को सराहा, इससे उन्हें बेहद खुशी हो रही है। यह सराहना उन्हें उनके लक्ष्य को पाने के लिए और प्रेरित करेगी। बता दें कि 12 मई को सीबीएसई दसवीं का परिणाम जारी हुआ था।
एसिड अटैक के समय तीन साल की थीं कैफी
कैफी तीन साल की थीं जब उन पर एसिड से हमला किया गया था। इसके कारण उनकी आंखों की रोशनी चली गई। कम उम्र में घटी इस बड़ी घटना को स्वीकार कर कैफी ने अपने सपनों की ओर कदम बढ़ाए और अपनी मेहनत से कक्षा 10 में 95.2 अंक प्राप्त किए। खबर प्रकाशित होने के बाद से कई लोगों ने उन्हें बधाई दी और मदद का हाथ बढ़ाया है। सोमवार को कांग्रेस नेता मनोज लुबाना कैफी से मिले और उनकी उच्च शिक्षा के लिए 7000 रुपये की राशि भेंट की। इसके अलावा एक सामाजिक संस्था ने कैफी को शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता देने का वादा किया है।
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बेटी की कामयाबी पर माता-पिता को गर्व
कैफी की उपलब्धि पर माता-पिता भी गर्व महसूस कर रहे हैं। पिता पवन हरियाणा के एक सरकारी महकमे में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी हैं जबकि मां गृहिणी हैं। दोनों का कहना है कि कैफी भविष्य में जो कुछ भी करना चाहेगी, उसमें उसका साथ देंगे। कहा कि जब एसिड से हमला हुआ था तो हम बहुत निराश हो गए थे, लेकिन हमने उसे खूब पढ़ाने का फैसला किया और कैफी ने हमारे फैसले को सही साबित कर दिया है। बताया कि आठ साल की उम्र में जब बच्चा तीसरी कक्षा में पढ़ने लगता है तो कैफी ने उस उम्र में इलाज के बाद स्कूल जाना शुरू किया था। चुनौतियां बहुत थीं पर उसने सपने देखने की उम्मीद नहीं छोड़ी। कैफी का आईएएस बनने का सपना अभी बाकी है। दसवीं में टॉप कर वह अपने सपने की ओर कदम बढ़ा चुकी है।
स्कूल के 180 बच्चों के लिए बनी रोल मॉडल
अंधकार को क्यों धिक्कारें, अच्छा है दिया जलाएं... यह पंक्तियां बोलते हुए इंस्टीट्यूट फॉर द ब्लाइंड के प्रधानाचार्य जेएस जायरा ने कैफी की उपलब्धि पर कहा कि वह स्कूल के सभी 180 बच्चों के लिए रोल मॉडल बन गई है। उन्होंने कहा कि उनके लिए बहुत गर्व की बात है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक कैफी की कहानी पहुंच रही है। इससे समाज में सभी दृष्टिबाधित लोगों के प्रति नजरिया बदल रहा है कि इन बच्चों के पास नजर नहीं है पर जीवन जीने का नजरिया जरूर है। आज स्कूल के सभी विद्यार्थी कैफी की कामयाबी का जश्न मना रहे हैं।
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उधर, कैफी को जब इस बात की जानकारी मिली तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि उनके दोस्त ने उन्हें बताया कि प्रियंका गांधी वाड्रा ने उनकी कहानी सबके साथ साझा की है। कैफी ने कहा प्रियंका गांधी वाड्रा ने उनकी मेहनत को सराहा, इससे उन्हें बेहद खुशी हो रही है। यह सराहना उन्हें उनके लक्ष्य को पाने के लिए और प्रेरित करेगी। बता दें कि 12 मई को सीबीएसई दसवीं का परिणाम जारी हुआ था।
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एसिड अटैक के समय तीन साल की थीं कैफी
कैफी तीन साल की थीं जब उन पर एसिड से हमला किया गया था। इसके कारण उनकी आंखों की रोशनी चली गई। कम उम्र में घटी इस बड़ी घटना को स्वीकार कर कैफी ने अपने सपनों की ओर कदम बढ़ाए और अपनी मेहनत से कक्षा 10 में 95.2 अंक प्राप्त किए। खबर प्रकाशित होने के बाद से कई लोगों ने उन्हें बधाई दी और मदद का हाथ बढ़ाया है। सोमवार को कांग्रेस नेता मनोज लुबाना कैफी से मिले और उनकी उच्च शिक्षा के लिए 7000 रुपये की राशि भेंट की। इसके अलावा एक सामाजिक संस्था ने कैफी को शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता देने का वादा किया है।
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बेटी की कामयाबी पर माता-पिता को गर्व
कैफी की उपलब्धि पर माता-पिता भी गर्व महसूस कर रहे हैं। पिता पवन हरियाणा के एक सरकारी महकमे में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी हैं जबकि मां गृहिणी हैं। दोनों का कहना है कि कैफी भविष्य में जो कुछ भी करना चाहेगी, उसमें उसका साथ देंगे। कहा कि जब एसिड से हमला हुआ था तो हम बहुत निराश हो गए थे, लेकिन हमने उसे खूब पढ़ाने का फैसला किया और कैफी ने हमारे फैसले को सही साबित कर दिया है। बताया कि आठ साल की उम्र में जब बच्चा तीसरी कक्षा में पढ़ने लगता है तो कैफी ने उस उम्र में इलाज के बाद स्कूल जाना शुरू किया था। चुनौतियां बहुत थीं पर उसने सपने देखने की उम्मीद नहीं छोड़ी। कैफी का आईएएस बनने का सपना अभी बाकी है। दसवीं में टॉप कर वह अपने सपने की ओर कदम बढ़ा चुकी है।
स्कूल के 180 बच्चों के लिए बनी रोल मॉडल
अंधकार को क्यों धिक्कारें, अच्छा है दिया जलाएं... यह पंक्तियां बोलते हुए इंस्टीट्यूट फॉर द ब्लाइंड के प्रधानाचार्य जेएस जायरा ने कैफी की उपलब्धि पर कहा कि वह स्कूल के सभी 180 बच्चों के लिए रोल मॉडल बन गई है। उन्होंने कहा कि उनके लिए बहुत गर्व की बात है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक कैफी की कहानी पहुंच रही है। इससे समाज में सभी दृष्टिबाधित लोगों के प्रति नजरिया बदल रहा है कि इन बच्चों के पास नजर नहीं है पर जीवन जीने का नजरिया जरूर है। आज स्कूल के सभी विद्यार्थी कैफी की कामयाबी का जश्न मना रहे हैं।