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'अपना घर' में दरिंदगी से सहमी मासूम बच्चियों ने किए ऐसे 10 खुलासे, सुनकर कांप जाएंगे

Mon, 30 Apr 2018 05:22 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाजा, रोहतक(हरियाणा)
ब्यूरो/अमर उजाजा, रोहतक(हरियाणा) Updated Mon, 30 Apr 2018 05:22 PM IST
child abusing, sexual harassment, prostitution in apna ghar rohtak
अपना घर की पीड़िता
डरी डरी सी सहमी और घबराई मासूम बच्चियों ने इसका कारण बताया तो लोग सुनकर सन्न रह गए। बात हो रही है रोहतक के बहुचर्चित ‘अपना घर’ में यौन शोषण और मारपीट मामले की।


रोहतक स्थित अनाथालय ‘अपना घर’ में यौन उत्पीड़न, मारपीट सहित अन्य मामलों की शिकायत मिलने पर 9 मई, 2012 को राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की टीम ने छापामारी की थी।उस वक्त अपना घर से करीब 100 युवतियां और बच्चों को मुक्त करवाने के बाद पुलिस में मामला दर्ज किया था।


बच्चियों और युवतियों से पूछताछ के बाद यौन शोषण और मानसिक शोषण, मारपीट सहित अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग ने 19 पेज की रिपोर्ट में जसवंती के एक-एक अत्याचार की भयावह कहानी को उजागर किया है। आयोग के सदस्य विनोद टिक्कू व डाक्टर दिनेश लोरिया की तरफ से सार्वजनिक की गई रिपोर्ट में बताया गया है कि जब छापा मारा गया तो बच्चियों डरी और सहमी हुई थीं।
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तीन लड़कियां परेशान होकर भागी तो मामला सामने आया

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रोहतक स्थित अपना घर
अपना घर में बतौर नौकरानी बेगार करने वाली 17 वर्षीय पीड़िता 6 मई 2012 की रात को 2 अन्य लड़कियों के साथ फरार होकर दिल्ली पहुंचीं। वहां उसने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्यों को सच्चाई बताई, तभी रातों-रात छापा मारा गया।

वह अपनी छोटी बहन को अपना घर में छोड़कर भागी थी। उसने कोर्ट में जसवंती के खिलाफ गवाही दी। इस लड़की को राष्ट्रीय बहादुरी अवॉर्ड से भी नवाजा गया। अब वह अपने परिवार में लौट गई है। विनोद टिक्कू ने बताया कि 9 मई 2012 को छापेमारी के दौरान उन्होंने एक-एक करके लड़कियों से बातचीत की।

उन्हें विश्वास दिलाया कि वे उनके शुभचिंतक हैं। अब जसवंती से डरने की जरूरत नहीं। तब लड़कियों ने एक-एक करके सारे राज खोले। तड़के चार बजे तक पूछताछ चलती रही। सीबीआई के सामने 12 लड़कियों ने दुष्कर्म, यौन शोषण और गर्भपात करवाए जाने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे।

रिहा होने के बाद लड़कियों ने ऐसे सुनाई आपबीती

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अपना घर जसवंती देवी
18 वर्षीय एक लड़की ने 2012 में अनाथालय से रिहा होने के बाद जसवंती और अपना घर की पोल खोली थी। उसने जब शारीरिक शोषण करवाने से मना कर दिया तो जसवंती ने उसे दांतों से काट खाया था। 17 साल की एक लड़की ने बताया था कि छह साल पहले वह अपनी बहन के साथ मुंबई घूमने निकली थी, लेकिन उनसे बिछड़ गई।

वह जसवंती को मिल गई। उसने भीख मंगवाना शुरू कर दिया। उसकी छोटी बहन को दुबई की एक मैडम को बेच दिया। 12 साल की एक लड़की ने रिहा होने के बाद बताया था कि वह दिल्ली के बदरपुर की रहने वाली थी। मां की सड़क हादसे में मौत हो गई तो पिता ने मुंह मोड़ लिया। वह अपना घर तक पहुंच गई।

यहां जबरन सफाई करवाई जाती। न करने पर उसके साथ मारपीट की जाती थी। बच्चों को अपना घर से बाहर जाने की अनुमति नहीं थी। अपना घर में निजी डॉक्टर उपचार करता था, जो योग्य नहीं था। बच्चों को मानसिक तौर पर विकृत महिलाओं के साथ रहने के लिए मजबूर किया जाता था।

बच्चों को पर्याप्त भोजन नहीं दिया जाता था, केवल विशेष दिन ही दलिया या दूसरा खाना दिया जाता था। बच्चों को जन्म देने वाली महिलाओं को गलती करने पर सजा के तौर पर बच्चे से अलग कर दिया जाता था। महिलाएं अपने बच्चों के लिए दूध की जसवंती से भीख मांगती थी। मामूली गलती पर भी सजा के तौर पर बच्चों को 1 से 3 दिन तक भूखा रखा जाता था।

 

लड़कियों के निजी पार्ट्स में बेलन डाल देती थी

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अपना घर जसवंती देवी
अपना घर में चार लड़कियां एड्स से पीड़ित मिली, लेकिन उसके उपचार की खास सुविधाएं नहीं थी। लड़कियों को रंडी और वेश्या तक बोला जाता था। गलती करने पर बच्चों से जसवंती, जयभगवान व सिम्मी मारपीट तक करते थे। कई लड़कियों को रात को नग्न रखा जाता था। यहां तक लोहे की राड व डंडे से पीटा जाता।

लड़कियों के निजी पार्ट्स में बेलन डाला गया। बच्चों से अपने घर पर काम करने के लिए भेजा गया। सुंदर लड़कियों को पार्टी में वेटर के तौर भेजा जाता था। खेतों में काम कराया गया। जसवंती के दामाद जयभगवान द्वारा लड़की का यौन शोषण किया गया। ड्राइवर सतीश आधी रात को मानसिक तौर पर बीमार महिलाओं को बस या ट्रेन में बैठाकर छोड़ आता था।

आयोग ने पूरी रिपोर्ट बनाकर सरकार को भेजी। सीबीआई जांच में यह रिपोर्ट अहम साबित हुई। इतने लंबे से जसवंती अपना घर में बच्चों, लड़कियों व महिलाओं का शोषण कर रही थी। दूसरी तरफ उसे नारी शक्ति अवार्ड से सम्मनित किया गया। कहीं न कहीं सवाल खड़े होते हैं। अगर सीबीआई इन सवालों का भी जवाब तलाश करती तो आज उन्हें और ज्यादा खुशी होती।
- विनोद टिक्कू, तत्कालीन जांच अधिकारी राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग

जसवंती देवी समेत 3 को सुनाई गई उम्रकैद की सजा

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अपना घर जसवंती देवी
बता दें कि केस में दोषियों को शुक्रवार को सीबीआई की विशेष अदालत में सजा सुनाई। अदालत ने तीन दोषियों को उम्रकैद जबकि एक को सात साल की सजा सुनाई है। पांच अन्य आरोपियों को राहत देते हुए जमानत पर छोड़ दिया गया है। मामले में दोषी अपना घर की संचालिका जसवंती देवी सहित उम्रकैद के तीनों दोषियों को अदालत ने 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी किया है।

मामले में जयभगवान और सतीश को भी उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। जसवंती के भाई जसवंत को सात साल की सजा सुनाई गई, जिसकी करीब छह साल की सजा पूरी हो चुकी है। इस मामले में दोषी करार दिए गए रोशनी और आरपी सैनी को प्रोबेशन जबकि तीन अन्य वीणा, सुषमा उर्फ सिम्मी और शीला को अंडरगॉन (जितनी सजा काट चुके हैं उतनी ही सजा) कर दिया गया है। इस मामले में रोशनी और आरपी सैनी ने प्रोबेशन बांड भरे।

नहीं मिले पुख्ता सुबूत, पांच को मिली राहत
एडवोकेट अभिषेक सिंह राणा ने बताया कि इस मामले में आरोपी जसवंत को सात साल की सजा सुनाई गई है जबकि वीणा को भी अदालत से राहत दी गई है। इस मामले में दोषी करार दिए आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सुबूत न मिल पाने की वजह से उन्हें अदालत की ओर से राहत मिली है। मामले में तत्कालीन सीडीपीओ अंग्रेज कौर हुड्डा को पहले ही सुबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया है।

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