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Chandigarh News: चंडीगढ़ में लीज टू फ्रीहोल्ड नीति की तैयारी, 70 हजार परिवारों को मिलेगा मालिकाना हक
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चंडीगढ़ में लीज टू फ्रीहोल्ड नीति की तैयारी, 70 हजार परिवारों को मिलेगा मालिकाना हक
दो महीने में पूरे शहर में लागू होगी नीति, अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग स्कीम के अलॉटियों को राहत, लैंड पूलिंग पॉलिसी का ड्राफ्ट भी जल्द
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। चंडीगढ़ के रिहायशी इलाकों में रहने वाले हजारों परिवारों के लिए बड़ी राहत की तैयारी है। पूरे शहर में लीज टू फ्रीहोल्ड लागू करने के लिए प्रशासन नई नीति बना रहा है, जिसे अगले दो महीने में लागू किया जाएगा। यह घोषणा पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने शनिवार को डड्डूमाजरा के गुरु द्रोणाचार्य स्टेडियम में आयोजित समाधान शिविर के दौरान की।
प्रशासक ने कहा कि चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड और एस्टेट ऑफिस की ओर से लीज पर या विशेष श्रेणी में अलॉट किए गए कई मकान समय के साथ जीपीए या पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से आगे बेच दिए गए। ऐसे में वर्तमान में रह रहे लोगों के नाम पर मालिकाना हक ट्रांसफर नहीं हो पाया। वहीं, कई लोग 2013 और 2017 में लागू लीज टू फ्रीहोल्ड नीति का लाभ भी नहीं ले सके। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए प्रशासन अब नई नीति तैयार कर रहा है। इसके लागू होने से शहर के गांवों और कॉलोनियों में रहने वाले करीब 70 हजार परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा जबकि अनुमान है कि डेढ़ से दो लाख लोगों को इससे राहत पहुंचेगी। लंबे समय से यह मांग उठती रही है।
अलॉटियों को बेदखल न करने के निर्देश
समाधान शिविर में धनास के स्मॉल फ्लैट की निवासी सुमन और ऋतिक ने प्रशासक के सामने शिकायत रखी कि वे समय पर पानी और बिजली की किश्तें जमा करा रहे हैं, इसके बावजूद चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड की ओर से उन्हें बेदखली के नोटिस भेजे जा रहे हैं। वहीं कोरोना काल के बाद आर्थिक दिक्कतों के कारण जो अलॉटी किस्तें जमा नहीं करा पाए या जिनकी पुरानी किस्तें लंबित हैं, उनके अलॉटमेंट रद्द करने की कार्रवाई की जा रही है। इस पर प्रशासक ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि सही अलॉटियों को बेदखल न किया जाए बल्कि उनकी लंबित किस्तें जमा करवाई जाएं। प्रशासक के आदेश के बाद हाउसिंग बोर्ड अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग स्कीम के तहत अलॉटियों को किस्त जमा कराने के लिए एक बार अंतिम अवसर देने की तैयारी कर रहा है।
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लैंड पूलिंग पॉलिसी का ड्राफ्ट जल्द
प्रशासक ने किसानों से जुड़ी समस्याओं पर कहा कि हाल ही में उनकी गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात हुई है। इस दौरान भू-अधिग्रहण नीति और लैंड पूलिंग पॉलिसी को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। प्रशासक ने बताया कि शहर के किसानों के हित में जल्द लैंड पूलिंग पॉलिसी लाई जाएगी, जिसका ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। ड्राफ्ट जारी कर किसानों से सुझाव भी लिए जाएंगे। शिविर में मौजूद हेमपाल ने कहा कि शहर के 22 गांवों में कई जमीनें नगर निगम सीमा में और कई एमसी से बाहर हैं लेकिन दोनों ही श्रेणियों में मुआवजा बेहद कम मिल रहा है। उन्होंने बताया कि पड़ोसी राज्य पंजाब में एक किल्ले का रेट 19 से 20 करोड़ रुपये है जबकि चंडीगढ़ में भूमि अधिग्रहण पर केवल 1.93 करोड़ रुपये प्रति किल्ला मुआवजा दिया जा रहा है।
प्रशासक के समक्ष 22 गांवों का मुद्दा उठा
समाधान शिविर में वार्ड नंबर-14 के पार्षद कुलजीत सिंह संधू और मनोनीत पार्षद सतिंदर पाल सिंह ने शहर के 22 गांवों से जुड़ी समस्याएं प्रशासक के समक्ष रखीं। उन्होंने कृषि भूमि के कलेक्टर रेट बढ़ाने, चंडीगढ़ के लिए अलग लैंड पूलिंग नीति लागू करने और भविष्य के भूमि अधिग्रहण में मुआवजे के मल्टीप्लाइंग फार्मूले को बढ़ाने की मांग की। पार्षदों ने कहा कि धनास और ड्डूमाजरा सहित सभी 22 गांवों के किसान लंबे समय से उपेक्षा झेल रहे हैं। संधू ने कहा कि पंजाब और हरियाणा में लैंड पूलिंग पॉलिसी लागू है, लेकिन चंडीगढ़ के किसानों ने शहर बसाने के लिए अपनी जमीन दी और आज वे नुकसान में हैं। भूमि अधिग्रहण में लागू 1.25 के मल्टीप्लाइंग फार्मूले को ग्रामीणों ने अपर्याप्त बताते हुए इसे बढ़ाकर 2 करने की मांग की।
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दो महीने में पूरे शहर में लागू होगी नीति, अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग स्कीम के अलॉटियों को राहत, लैंड पूलिंग पॉलिसी का ड्राफ्ट भी जल्द
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। चंडीगढ़ के रिहायशी इलाकों में रहने वाले हजारों परिवारों के लिए बड़ी राहत की तैयारी है। पूरे शहर में लीज टू फ्रीहोल्ड लागू करने के लिए प्रशासन नई नीति बना रहा है, जिसे अगले दो महीने में लागू किया जाएगा। यह घोषणा पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने शनिवार को डड्डूमाजरा के गुरु द्रोणाचार्य स्टेडियम में आयोजित समाधान शिविर के दौरान की।
प्रशासक ने कहा कि चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड और एस्टेट ऑफिस की ओर से लीज पर या विशेष श्रेणी में अलॉट किए गए कई मकान समय के साथ जीपीए या पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से आगे बेच दिए गए। ऐसे में वर्तमान में रह रहे लोगों के नाम पर मालिकाना हक ट्रांसफर नहीं हो पाया। वहीं, कई लोग 2013 और 2017 में लागू लीज टू फ्रीहोल्ड नीति का लाभ भी नहीं ले सके। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए प्रशासन अब नई नीति तैयार कर रहा है। इसके लागू होने से शहर के गांवों और कॉलोनियों में रहने वाले करीब 70 हजार परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा जबकि अनुमान है कि डेढ़ से दो लाख लोगों को इससे राहत पहुंचेगी। लंबे समय से यह मांग उठती रही है।
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अलॉटियों को बेदखल न करने के निर्देश
समाधान शिविर में धनास के स्मॉल फ्लैट की निवासी सुमन और ऋतिक ने प्रशासक के सामने शिकायत रखी कि वे समय पर पानी और बिजली की किश्तें जमा करा रहे हैं, इसके बावजूद चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड की ओर से उन्हें बेदखली के नोटिस भेजे जा रहे हैं। वहीं कोरोना काल के बाद आर्थिक दिक्कतों के कारण जो अलॉटी किस्तें जमा नहीं करा पाए या जिनकी पुरानी किस्तें लंबित हैं, उनके अलॉटमेंट रद्द करने की कार्रवाई की जा रही है। इस पर प्रशासक ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि सही अलॉटियों को बेदखल न किया जाए बल्कि उनकी लंबित किस्तें जमा करवाई जाएं। प्रशासक के आदेश के बाद हाउसिंग बोर्ड अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग स्कीम के तहत अलॉटियों को किस्त जमा कराने के लिए एक बार अंतिम अवसर देने की तैयारी कर रहा है।
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लैंड पूलिंग पॉलिसी का ड्राफ्ट जल्द
प्रशासक ने किसानों से जुड़ी समस्याओं पर कहा कि हाल ही में उनकी गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात हुई है। इस दौरान भू-अधिग्रहण नीति और लैंड पूलिंग पॉलिसी को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। प्रशासक ने बताया कि शहर के किसानों के हित में जल्द लैंड पूलिंग पॉलिसी लाई जाएगी, जिसका ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। ड्राफ्ट जारी कर किसानों से सुझाव भी लिए जाएंगे। शिविर में मौजूद हेमपाल ने कहा कि शहर के 22 गांवों में कई जमीनें नगर निगम सीमा में और कई एमसी से बाहर हैं लेकिन दोनों ही श्रेणियों में मुआवजा बेहद कम मिल रहा है। उन्होंने बताया कि पड़ोसी राज्य पंजाब में एक किल्ले का रेट 19 से 20 करोड़ रुपये है जबकि चंडीगढ़ में भूमि अधिग्रहण पर केवल 1.93 करोड़ रुपये प्रति किल्ला मुआवजा दिया जा रहा है।
प्रशासक के समक्ष 22 गांवों का मुद्दा उठा
समाधान शिविर में वार्ड नंबर-14 के पार्षद कुलजीत सिंह संधू और मनोनीत पार्षद सतिंदर पाल सिंह ने शहर के 22 गांवों से जुड़ी समस्याएं प्रशासक के समक्ष रखीं। उन्होंने कृषि भूमि के कलेक्टर रेट बढ़ाने, चंडीगढ़ के लिए अलग लैंड पूलिंग नीति लागू करने और भविष्य के भूमि अधिग्रहण में मुआवजे के मल्टीप्लाइंग फार्मूले को बढ़ाने की मांग की। पार्षदों ने कहा कि धनास और ड्डूमाजरा सहित सभी 22 गांवों के किसान लंबे समय से उपेक्षा झेल रहे हैं। संधू ने कहा कि पंजाब और हरियाणा में लैंड पूलिंग पॉलिसी लागू है, लेकिन चंडीगढ़ के किसानों ने शहर बसाने के लिए अपनी जमीन दी और आज वे नुकसान में हैं। भूमि अधिग्रहण में लागू 1.25 के मल्टीप्लाइंग फार्मूले को ग्रामीणों ने अपर्याप्त बताते हुए इसे बढ़ाकर 2 करने की मांग की।