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Chandigarh News: नाराज विधायकों और दिग्गजों को साधना भाजपा के लिए चुनौती
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अनिल विज, राव इंद्रजीत, कुलदीप बिशनोई, गोपाल कांडा के समर्थकों में भी मायूसी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। लोकसभा चुनावों को लेकर बेशक भाजपा ने पूरी रणनीति के साथ मंत्रिमंडल विस्तार किया हो, लेकिन इससे निर्दलीय विधायकों, जजपा विधायकों के साथ साथ भाजपा के ही कई दिग्गज नेता नाराज हो गए हैं। इनमें पूर्व गृह मंत्री अनिल विज, केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह और कुलदीप बिश्नोई समेत पूर्व गृह राज्य मंत्री गोपाल कांडा और भाजपा के कई विधायक शामिल हैं। ऐसे में लोकसभा चुनावों में भाजपा प्रत्याशियों के लिए इनका समर्थन पाना और इन नेताओं को मनाना भाजपा के लिए चुनौती है।
पूर्व गृह मंत्री अनिल विज को हाईकमान ने मनाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बन पाई। हालांकि, सूत्रों का दावा है कि मंत्रिमंडल के विस्तार में विज का नाम इसलिए नहीं आया, क्योंकि वह विधायक दल की बैठक से नाराज हो गए बाहर आ गए थे और हाईकमान ने इसे अनुशासनहीनता माना है। इसलिए अगर लोकसभा चुनावों में भी विज की नाराजगी बरकरार रहती है तो पार्टी के लिए अंबाला में चुनाव इतना आसान नहीं होगा, क्योंकि विज का अपने क्षेत्र में प्रभाव है।
वहीं, भाजपा ने नांगल चौधरी से डॉ. अभय यादव को राज्यमंत्री बनाकर अहीरवाल के दिग्गज नेता राव इंद्रजीत सिंह को झटका दिया है। उनके खास समर्थक ओपी यादव को दोबारा से मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया है, जबकि उनके विरोधी अभय को मौका दिया है। राव अहीरवाल से दो विधायकों को मंत्री बनाने की मांग कर चुके थे, लेकिन भाजपा ने उनकी बात नहीं मानी।
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इसी प्रकार, सिरसा से हलोपा विधायक गोपाल कांडा को वैश्य कोटे से मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की अटकलें कई दिनों से लगाई जा रही थीं। विवादित चेहरा होने के चलते हाईकमान से उनके नाम को हरी झंडी नहीं मिली। हालांकि, सिरसा में कांडा का प्रभाव है, लोकसभा चुनावों में कांडा इस प्रभाव का भाजपा के लिए कितना प्रयोग करते हैं, यह तो समय ही बताएगा।
बिश्नोई की टूटी भव्य की उम्मीद
आदमपुर से भाजपा विधायक कुलदीप बिश्नोई के कैबिनेट में शामिल होने की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन उन्हें जगह नहीं मिल पाई। बताते हैं कि भव्य बिश्नोई को कैबिनेट में शामिल करवाने के लिए लॉबिंग भी हुई, लेकिन बात नहीं बन पाई। ऐसे में कुलदीप बिश्नोई को साधना भाजपा के लिए आसान नहीं होगा। वह कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए हैं और हिसार से लोकसभा प्रत्याशी के दावेदार हैं।
इसलिए कटा पत्ता
अनिल विज : विधायक दल की बैठक से नाराज होकर बाहर निकला, पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता माना।
संदीप सिंह : जूनियर कोच द्वारा शारीरिक उत्पीड़न के आरोप लगाने के बाद विवादित होना।
कमलेश ढांडा : अच्छी परफार्मेंस नहीं दे पाना, क्षेत्र और विभागों पर कमजोर पकड़।
ओपी यादव : विभागीय परफार्मेंस अच्छी नहीं, केवल राव इंद्रजीत सिंह का था सहारा।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। लोकसभा चुनावों को लेकर बेशक भाजपा ने पूरी रणनीति के साथ मंत्रिमंडल विस्तार किया हो, लेकिन इससे निर्दलीय विधायकों, जजपा विधायकों के साथ साथ भाजपा के ही कई दिग्गज नेता नाराज हो गए हैं। इनमें पूर्व गृह मंत्री अनिल विज, केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह और कुलदीप बिश्नोई समेत पूर्व गृह राज्य मंत्री गोपाल कांडा और भाजपा के कई विधायक शामिल हैं। ऐसे में लोकसभा चुनावों में भाजपा प्रत्याशियों के लिए इनका समर्थन पाना और इन नेताओं को मनाना भाजपा के लिए चुनौती है।
पूर्व गृह मंत्री अनिल विज को हाईकमान ने मनाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बन पाई। हालांकि, सूत्रों का दावा है कि मंत्रिमंडल के विस्तार में विज का नाम इसलिए नहीं आया, क्योंकि वह विधायक दल की बैठक से नाराज हो गए बाहर आ गए थे और हाईकमान ने इसे अनुशासनहीनता माना है। इसलिए अगर लोकसभा चुनावों में भी विज की नाराजगी बरकरार रहती है तो पार्टी के लिए अंबाला में चुनाव इतना आसान नहीं होगा, क्योंकि विज का अपने क्षेत्र में प्रभाव है।
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वहीं, भाजपा ने नांगल चौधरी से डॉ. अभय यादव को राज्यमंत्री बनाकर अहीरवाल के दिग्गज नेता राव इंद्रजीत सिंह को झटका दिया है। उनके खास समर्थक ओपी यादव को दोबारा से मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया है, जबकि उनके विरोधी अभय को मौका दिया है। राव अहीरवाल से दो विधायकों को मंत्री बनाने की मांग कर चुके थे, लेकिन भाजपा ने उनकी बात नहीं मानी।
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इसी प्रकार, सिरसा से हलोपा विधायक गोपाल कांडा को वैश्य कोटे से मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की अटकलें कई दिनों से लगाई जा रही थीं। विवादित चेहरा होने के चलते हाईकमान से उनके नाम को हरी झंडी नहीं मिली। हालांकि, सिरसा में कांडा का प्रभाव है, लोकसभा चुनावों में कांडा इस प्रभाव का भाजपा के लिए कितना प्रयोग करते हैं, यह तो समय ही बताएगा।
बिश्नोई की टूटी भव्य की उम्मीद
आदमपुर से भाजपा विधायक कुलदीप बिश्नोई के कैबिनेट में शामिल होने की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन उन्हें जगह नहीं मिल पाई। बताते हैं कि भव्य बिश्नोई को कैबिनेट में शामिल करवाने के लिए लॉबिंग भी हुई, लेकिन बात नहीं बन पाई। ऐसे में कुलदीप बिश्नोई को साधना भाजपा के लिए आसान नहीं होगा। वह कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए हैं और हिसार से लोकसभा प्रत्याशी के दावेदार हैं।
इसलिए कटा पत्ता
अनिल विज : विधायक दल की बैठक से नाराज होकर बाहर निकला, पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता माना।
संदीप सिंह : जूनियर कोच द्वारा शारीरिक उत्पीड़न के आरोप लगाने के बाद विवादित होना।
कमलेश ढांडा : अच्छी परफार्मेंस नहीं दे पाना, क्षेत्र और विभागों पर कमजोर पकड़।
ओपी यादव : विभागीय परफार्मेंस अच्छी नहीं, केवल राव इंद्रजीत सिंह का था सहारा।