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कोरोना वायरसः चंडीगढ़ में कैंटीन और दुकानवाले पीजीआई डायरेक्टर से बोले- माफ कीजिए किराया
Fri, 20 Mar 2020 01:47 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Fri, 20 Mar 2020 01:47 PM IST
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पीजीआई चंडीगढ़ में बनी दुकानें
- फोटो : अमर उजाला
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कोरोना वायरस के खौफ से जहां एक ओर मरीजों को अस्पताल आने से रोका जा रहा है। वहीं, दूसरी ओर अस्पतालों में संचालित कैंटीन और अन्य दुकानवालों के लिए महीने का किराया निकालना मुश्किल हो रहा है।
इससे पीजीआई की कैंटीन और दवा दुकानें प्रभावित हुई हैं। जिससे उबरने के लिए कैंटीन और मेडिकल स्टोर वालों ने पीजीआई डायरेक्ट से एक माह का किराया माफ करने का अनुरोध किया है। पीजीआई न्यू ओपीडी बिल्डिंग में संचालित कैंटीन और मेडिकल स्टोर वालों का कहना है कि कोरोना के कारण मरीजों की संख्या न के बराबर हो गई है। ओपीडी बंद करने के आदेश के बाद तो स्थिति और बदतर हो गई है। इक्का दुक्का ग्राहक के भरोसे दुकान चल रहा है। ऐसे में एक महीने का किराया 40 से 50 लाख तक कहां से चुकाया जाएगा।
बिजनेस बर्बाद हो गया है। इससे उबरने में 5 से 6 महीने का समय लगेगा। ऐसे में पीजीआई प्रशासन को हमारी मदद करनी चाहिए, जिससे इस संकट की घड़ी में हमें भी राहत मिल सके। इसलिए सभी ने मिलकर डायरेक्ट को पत्र लिखकर इस समस्या से अवगत कराया है। इसमें कैंटीन के साथ मेडिकल स्टोर और स्टेशनरी वाले शामिल हैं। इसमें एक दुकान का एक महीने का किराया 80 हजार से डेढ़ करोड़ तक है।
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सुरक्षा गार्डों ने उठाई मास्क और सैनिटाइजर की मांग
जीएमसीएच-32 में तैनात सुरक्षा कर्मियों ने अस्पताल प्रशासन से सभी गेट पर तैनात कर्मियों के लिए मास्क और सैनिटाइजर की व्यवस्था करने को कहा है। उनका कहना है कि गेट पर ड्यूटी के दौरान वह प्रतिदिन सैकड़ों मरीजों के संपर्क में आते हैं। सुरक्षा कारणों से उनसे संपर्क करना जरूरी होता है। ऐसी स्थिति में बचाव के लिए गेट पर तैनात सुरक्षा कर्मियों के लिए मास्क और सैनिटाइजर मुहैया कराया जाए ताकि वे बिना किसी डर के ड्यूटी करें।
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इससे पीजीआई की कैंटीन और दवा दुकानें प्रभावित हुई हैं। जिससे उबरने के लिए कैंटीन और मेडिकल स्टोर वालों ने पीजीआई डायरेक्ट से एक माह का किराया माफ करने का अनुरोध किया है। पीजीआई न्यू ओपीडी बिल्डिंग में संचालित कैंटीन और मेडिकल स्टोर वालों का कहना है कि कोरोना के कारण मरीजों की संख्या न के बराबर हो गई है। ओपीडी बंद करने के आदेश के बाद तो स्थिति और बदतर हो गई है। इक्का दुक्का ग्राहक के भरोसे दुकान चल रहा है। ऐसे में एक महीने का किराया 40 से 50 लाख तक कहां से चुकाया जाएगा।
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बिजनेस बर्बाद हो गया है। इससे उबरने में 5 से 6 महीने का समय लगेगा। ऐसे में पीजीआई प्रशासन को हमारी मदद करनी चाहिए, जिससे इस संकट की घड़ी में हमें भी राहत मिल सके। इसलिए सभी ने मिलकर डायरेक्ट को पत्र लिखकर इस समस्या से अवगत कराया है। इसमें कैंटीन के साथ मेडिकल स्टोर और स्टेशनरी वाले शामिल हैं। इसमें एक दुकान का एक महीने का किराया 80 हजार से डेढ़ करोड़ तक है।
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सुरक्षा गार्डों ने उठाई मास्क और सैनिटाइजर की मांग
जीएमसीएच-32 में तैनात सुरक्षा कर्मियों ने अस्पताल प्रशासन से सभी गेट पर तैनात कर्मियों के लिए मास्क और सैनिटाइजर की व्यवस्था करने को कहा है। उनका कहना है कि गेट पर ड्यूटी के दौरान वह प्रतिदिन सैकड़ों मरीजों के संपर्क में आते हैं। सुरक्षा कारणों से उनसे संपर्क करना जरूरी होता है। ऐसी स्थिति में बचाव के लिए गेट पर तैनात सुरक्षा कर्मियों के लिए मास्क और सैनिटाइजर मुहैया कराया जाए ताकि वे बिना किसी डर के ड्यूटी करें।