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कार्तिक पूर्णिमा पर नौका पूजन: चंडीगढ़ के जगन्नाथ मंदिर में आयोजन, कृत्रिम सरोवर में चलाई प्रतीकात्मक नाव

Fri, 15 Nov 2024 02:09 PM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 15 Nov 2024 02:09 PM IST
सार

प्राचीन समय में समुद्र के रास्ते व्यापार और अपनी आजीविका के लिए अलग अलग द्वीपों और देशों में जाते थे। जिसमें जावा, सुमात्रा सहित अन्य देश थे। उनकी यात्रा मंगलमय और सही सलामत घर लौटें, कार्तिक पूर्णिमा पर ऐसी कामना की जाती है।

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Boat worship on Kartik Purnima at Jagannath temple in Chandigarh
सेक्टर 31 के श्री जगन्नाथ मंदिर में नौका पूजन करते श्रद्धालु। - फोटो : संवाद

विस्तार

चंडीगढ़ सेक्टर 31 के श्री जगन्नाथ मंदिर में कार्तिक पूर्णिमा पर शुक्रवार को नौका पूजन का आयोजन हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर भगवान के चरणों में माथा टेका। श्रद्धालु अल सुबह ही मंदिर पहुंच गए थे। अपने परिवार के साथ मंदिर में बने कृत्रिम सरोवर में नौका पूजन के बाद उसमें बहाया। श्रद्धालु अपने घरों में छोटे छोटे नाव प्रतीकात्मक रूप में बनाए। नौका पूजा के बाद मंदिर में झंडा चढ़ाया गया। भगवान जगन्नाथ की पूजा के बाद कीर्तन और भव्य आरती हुई। इस मौके पर भंडारा का आयोजन हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भंडारा का प्रसाद ग्रहण किया।
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मंदिर को संचालित करने वाली संस्था उत्कल सांस्कृतिक संघ के सांस्कृतिक सचिव अनिल मलिक ने बताया कि ट्राइसिटी में ओडिशा के बड़ी संख्या में लोग रहते हैं।

उन्होंने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा को हम सभी नौका पूजन के बाद उसे पानी में बहाते है। उन्होंने बताया कि ऐसी मान्यता है कि प्राचीन समय में समुद्र के रास्ते व्यापार और अपनी आजीविका के लिए अलग अलग द्वीपों और देशों में जाते थे। जिसमें जावा, सुमात्रा सहित अन्य देश थे। उनकी यात्रा मंगलमय और सही सलामत घर लौटें ऐसी कामना की जाती है।
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उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ में नदी या समुद्र नहीं है। ऐसे में मंदिर परिसर में कृत्रिम सरोवर बनाकर उसमें नौका पूजन के बाद बहाते हैं। लोग अपने अपने घरों में छोटे छोटे नौका तैयार करते हैं।
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जो भी लोग अपनी आजीविका के लिए परदेश जाते थे वे सभी श्री जगन्नाथ रथयात्रा से पहले अपने अपने घरों में वापस लौट आते थे। यही हमारी परंपरा है। यहां पर हम यह पर्व ऐसे ही मनाते हैं। हमारी युवा पीढ़ी को हमारी विरासत के बारे में जानना चाहिए। हमारी भाषा और संस्कृति के प्रति अपने आने वाली पीढ़ी को जानकारी देना बहुत जरूरी है। ताकि हमारी सांस्कृतिक विरासत बची रहे। इस मौके पर मंदिर कमेटी के सभी पदाधिकारी उपस्थित रहे।
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