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कागजों में सिमटा विकास: चंडीगढ़ में मेट्रो, फिल्म और एजुकेशन सिटी परियोजनाएं वर्षों से अधूरी.. खास रिपोर्ट
Mon, 28 Jul 2025 12:23 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 28 Jul 2025 12:23 AM IST
सार
शहरवासियों का कहना है कि 20 साल से अधिकारी शहर में बड़े-प्रोजेक्ट्स से शहर की तस्वीर बदलने का सपना दिखा रहे हैं लेकिन धरातल पर आज तक कुछ नजर नहीं आया। अमर उजाला की ग्राउंड रिपोर्ट में पेश है चंडीगढ़ के उन अटके हुए प्रोजेक्ट्स की तस्वीर जो आज भी सिर्फ फाइलों में जिंदा हैं।
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चंडीगढ़ का ट्रिब्यून चाैक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
देश के सबसे व्यवस्थित शहरों में शुमार चंडीगढ़ की तस्वीर अब उतनी चमकदार नहीं रह गई है। पिछले दो दशक में कई ऐसे बड़े प्रोजेक्ट शुरू किए गए जो आज तक अधूरे हैं। वजह...कहीं नौकरशाही की सुस्ती तो कहीं राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी ने सिरे नहीं चढ़ने दिया।
यदि सभी मंजूरियां समय पर मिलती हैं तो 2027 में काम शुरू हो सकता है और 2032 तक फेज-1 पूरा होने की उम्मीद है। इसमें से 16.5 किमी हिस्सा चंडीगढ़ के हेरिटेज सेक्टरों से होकर भूमिगत जाएगा। पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल का कहना है कि 2014 के बाद इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यदि इसे तब गंभीरता से लिया जाता तो आज यह जमीन पर दिखती।
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मेट्रो प्रोजेक्ट: 16 साल से पटरियों पर ही अटका
2009 में शुरू की गई मेट्रो परियोजना चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला को जोड़ने वाली थी। हालांकि, भाजपा सांसद किरण खेर समेत कई नेताओं के विरोध और प्रशासनिक उलझनों के चलते यह कभी आगे नहीं बढ़ पाई। जून 2024 में राइट्स (रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक सर्विसेज) ने इसे आर्थिक रूप से व्यावहारिक बताया लेकिन 25,000 करोड़ की अनुमानित लागत के चलते इसका भविष्य अभी भी अधर में है।
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यदि सभी मंजूरियां समय पर मिलती हैं तो 2027 में काम शुरू हो सकता है और 2032 तक फेज-1 पूरा होने की उम्मीद है। इसमें से 16.5 किमी हिस्सा चंडीगढ़ के हेरिटेज सेक्टरों से होकर भूमिगत जाएगा। पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल का कहना है कि 2014 के बाद इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यदि इसे तब गंभीरता से लिया जाता तो आज यह जमीन पर दिखती।
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एजुकेशन सिटी: 19 साल से सपना अधूरा
वर्ष 2006 में सारंगपुर के पास 150 एकड़ में एजुकेशन सिटी बसाने का ख्वाब दिखाया गया था ताकि चंडीगढ़ को शैक्षणिक उत्कृष्टता का केंद्र बनाया जा सके लेकिन अब तक केवल एक संस्थान ही शुरू हो पाया है। 2009 में आईआईटी रोपड़ और आईआईएम अमृतसर जैसे संस्थानों से बातचीत हुई लेकिन कड़े नियमों और प्रशासनिक सुस्ती के चलते सबने हाथ पीछे खींच लिए। इस साल कुछ महीने पहले शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने यूजीसी के साथ बैठक की और चार मॉडल पर काम जारी है। प्रशासन अब आईआईटी-आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से दोबारा बातचीत करने के साथ-साथ विदेशी यूनिवर्सिटी कैंपस को भी आमंत्रित करने की योजना बना रहा है।यह भी पढ़ें: खन्ना में हादसा: नहर में गिरी श्रद्धालुओं से भरी पिकअप, नैना देवी से लाैट रहे थे; दो बच्चों समेत तीन की माैत