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Chandigarh News: स्ट्रोक में जान बचाने का सबसे कारगर फार्मूला है बीफास्ट

Sat, 02 Dec 2023 02:07 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 02 Dec 2023 02:07 AM IST
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BFast is the most effective formula to save life in stroke.
चंडीगढ़। बीफास्ट स्ट्रोक के लक्षणों को समय रहते पहचान कर डॉक्टर के पास पहुंचने का फार्मूला है। यह एक शॉर्ट फार्म है। इसे बी बैलेंस, ई आई, एफ फेस, अ आर्म, एस स्पीच और ट टाइम से समझ सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि देश में स्ट्रोक के मरीजों की संख्या बहुत ज्यादा है। देश में हर चार में से एक व्यक्ति इसकी चपेट में है लेकिन इलाज महज 0.1 प्रतिशत मरीजों को ही मिल पा रहा है। इसलिए जागरूक होने की जरूरत है। यह जानकारी सोसायटी ऑफ थेराप्यूटिक न्यूरो इंटरवेंशंस के संस्थापक सदस्य डॉ. विवेक गुप्ता ने शुक्रवार को दी। वे सेक्टर 35 स्थित एक होटल में आयोजित सोसाइटी के 6वें वार्षिक सम्मेलन में बतौर आयोजक चेयरमैन मौजूद थे।
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उन्होंने बताया कि पहले स्ट्रोक के मरीजों के लिए शुरू के डेढ़ घंटे महत्वपूर्ण होते थे। तकनीक के बल पर यह समयाविध 4.30 घंटे तक बढ़ गई है। इसके बाद भी मरीज को अगले 24 घंटे तक इलाज दिया जा रहा है लेकिन हो सकता है मरीज 24 घंटे के बाद पहुंचे। उस स्थिति में भी इलाज दिया जाता है लेकिन उन मरीजों में इलाज से ज्यादा फिजियोथेरेपी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है क्योंकि स्ट्रोक के कारण दिमाग की जो नसें ब्लॉक हो गई होती हैं, उसके आसपास की नसों को फिजियोथेरेपी से क्रियाशील बनाए रखने में मदद मिलती है। डॉ. विवेक ने बताया कि मौजूदा समय में आधुनिक डिवाइस की मदद से बेहद सुरक्षित तरीके से ऐसे मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
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पीजीआई ब्रेन एन्यूरीज्म के इलाज में देश में सबसे आगे
पीजीआई ब्रेन एन्यूरिज्म के मरीजों का इलाज करने में देश में सबसे आगे है। यह कहना है सम्मेलन के सचिव व पीजीआई के रेडियोडाइग्नोसिस विभाग के डॉ. चिराग आहूजा का। डॉ. चिराग ने बताया कि एन्यूरिज्म एक गंभीर चिकित्सीय स्थिति है, जो तब होती है जब रक्त वाहिका/धमनी का एक हिस्सा गुब्बारे की तरह फूल जाता है। यह या तो रक्त वाहिका के क्षतिग्रस्त होने या रक्त वाहिकाओं की दीवारों में कमजोरी के कारण हो सकता है। यह सभी आयु वर्ग के रोगियों में पाया जाता है, एन्यूरिज्म शरीर के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकता है, लेकिन ज्यादातर मस्तिष्क में होता है। पीजीआई देश में सबसे ज्यादा ऐसे मरीजों का सफलतापूर्वक इलाज कर रहा है।
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